Period अब समस्या नहीं, यह कंपनी देती है एक दिन की 'पेड लीव'
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Period अब समस्या नहीं, यह कंपनी देती है एक दिन की 'पेड लीव'

अभी तक किसी भी यूरोपियन देशों में इसकी शुरुआत नहीं हुई है. इटली ने 2018 में इस छुट्टी को लागू करने का फैसला किया था, लेकिन विरोध के बाद यह संभव नहीं हो पाया.

इस छुट्टी के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं होगी.

नई दिल्ली: इजिप्ट के एक कंपनी ने जो नया नियम बनाया है, उसकी चर्चा पूरे विश्व में हो रही है. अब कई देशों में सरकार से मांग की जा रही है कि वे इस नियम को सभी कंपनियों के लिए आवश्यक कर दे. इजिप्ट की उस कंपनी ने अपने महिला कर्मचारियों के लिए जो नियम बनाया है, उसके मुताबिक उन्हें हर महीने एक दिन की पेड लीव इसलिए दी जाएगी, क्योंकि महिलाओं में हर महीने पीरियड्स की समस्या होती है और इस दौरान उन्हें बहुत ज्यादा दर्द होता है. एक उम्र के बाद और एक उम्र तक हर महिला को इस समस्या से जूझना पड़ता है.

ब्रिटेन में 'मेंस्ट्रुएल लीव' की मांग

इस कदम की सराहना करते हुए ब्रिटेन की सरकार से इसको लेकर नियम बनाने की अपील की गई है. इजिप्ट की डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी, Shark and Shrimp में काम करने वाली महिला कर्मचारी को हर महीने इस छुट्टी के बदले कोई मेडिकल सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं होगी. महिला अपने मन से एक दिन का चुनाव कर सकती हैं.

नए नियम की जमकर वाहवाही
Shark and Shrimp की ह्यूमन रिसोर्स हेड रानिया युसूफ ने एक इंटरनेशनल न्यूज पेपर से कहा कि हमें अपने कर्मचारियों पर पूरा भरोसा है कि वे इस छूट का गलत फायदा नहीं उठाएंगे. वे अपने मन से एक दिन का चुनाव कर सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीकन देशों में पीरियड्स के बारे में खुलकर बातचीत नहीं की जाती है. ऐसे में जब हमने यह फैसला लिया तो हर कोई आश्चर्यकित थे.

कई देशों में लागू है 'मेंस्ट्रुएल लीव'
'मेंस्ट्रुएल लीव' का कॉन्सेप्ट जापान, साउथ कोरिया, ताईवान, इंडोनेशिया जैसे देशों में पहले से है. यहां तक की भारत की भी कई कंपनियां पेड 'मेंस्ट्रुएल लीव' देती हैं. कई देशों में तो इस छुट्टी के दिन काम करने पर कंपनी ज्यादा पे करती है. 2015 में पहली बार जाम्बिया पहला अप्रीकन देश था जहां, 'मेंस्ट्रुएल लीव' की शुरुआत की गई थी. 

जापान में यह 1947 से लागू है जापान में  'मेंस्ट्रुएल लीव'
जापान में यह 1947 से लागू है. साउथ कोरिया ने इस छुट्टी की शुरुआत 2001 में की. हालांकि, अभी तक किसी भी यूरोपियन देशों में इसकी शुरुआत नहीं हुई है. इटली ने 2018 में इस छुट्टी को लागू करने का फैसला किया था, लेकिन विरोध के बाद यह संभव नहीं हो पाया.

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