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किस्सा-ए-कंज्यूमर: शॉपिंग से डर नहीं लगता साहब! नकली सामान से लगता है

नए कानून में ई-कॉमर्स कंपनियों को एग्रीगेटर या प्लेटफॉर्म मुहैया कराने वाले की जगह सर्विस प्रोवाइडर का दर्जा दिया गया है, लिहाजा गड़बड़ी होने पर सेलर के साथ ही उन पर भी कानून का हंटर चलेगा. नए कानून के तहत कंज्यूमर जिस इलाके में रहता है वहीं से शिकायत की ई-फाइलिंग कर सकेगा.

किस्सा-ए-कंज्यूमर: शॉपिंग से डर नहीं लगता साहब! नकली सामान से लगता है

कागज का डिब्बा और डिब्बे में लोहे का टुकड़ा. पिछले दिनों ये तस्वीर सोशल मडिया पर खूब वायरल हुई. वायरल होने की 3 वजहें थीं. पहली-जिस डिब्बे में लोहे का टुकड़ा निकला उसमें 18 हजार रुपए का हेडफोन होना था. दूसरी- डिब्बा बेहद पॉपुलर ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न इंडिया ने भेजा था. और तीसरी- डिब्बा बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने मंगवाया था. इस धोखाधड़ी पर सोनाक्षी को बहुत गुस्सा आया. उन्होने दनादन ट्वीट करके अमेज़न को खरी-खोटी सुनाई. तब तक, जब तक अमेजन ने खुद ट्विटर पर आकर माफी नहीं मांगी और उनकी शिकायत दूर करने  का भरोसा नहीं दिया.  

बड़े धोखे हैं ऑनलाइन में
सोनाक्षी अकेली नहीं, ऑनलाइन शॉपिंग के शौकीनों को अक्सर ऐसे झटके लगते रहते हैं. कभी मोबाइल फोन की जगह साबुन, कभी ब्रांडेड के नाम पर नकली सामान तो कभी नए के दाम पर पुराना माल. पिछले दिनों वेलॉसिटी एमआर ने सर्वे कराया था, पता चला कि बीते 6 महीनों में हर 3 में से 1 शॉपर को ऑनलाइन धोखे का शिकार होना पड़ा है. लोकल सर्किल के सर्वे ने भी बताया था कि 38% लोगों को साल में एक बार कोई न कोई नकली सामान जरूर मिला है. 

गोलमाल भाई सब गोलमाल है
वो वायरल वीडियो याद है आपको जिसमें ज़ोमैटो का डिलिवरी ब्वॉय पैकेट खोलकर खाने पर दनादन हाथ साफ कर रहा था? वीडियो वायरल हुआ तो ज़ोमैटो ने तो खाने की पैकिंग में खास तरह का टेप लगाने का एलान कर दिया, लेकिन हर डिलिवरी ब्वॉय का वीडियो इस तरह सामने नहीं आता. और गड़बड़ी यहीं होती है. कई बार डिलिवरी ब्वॉय असली सामान निकालता है, उसकी जगह कुछ और रखता है और पैक कर देता है. 29 दिसंबर को ही गुड़गांव से एक ख़बर आई थी. अमेज़न के डिलिवरी ब्वॉय ने 40-40 हजार रुपये के 2 मोबाइल फोन उठाए लेकिन शाम तक ये कहते हुए सामान कंपनी को लौटाने आ गया कि ग्राहक ने डिफेक्टिव कहकर लेने से मना कर दिया. जांच में पता चला कि डिलिवरी ब्वॉय ने असली फोन निकालकर डमी फोन रख दिया था. पैकिंग में लगे एक खास तरह के सिक्योरिटी टेप की वजह से उसकी चोरी पकड़ ली गई. लेकिन धोखे कहां रुकने वाले हैं? वो कहते हैं ना- ताला बनता है तो साथ ही चाबी भी बनती है. कई बार छोटी-मोटी वेबसाइट से खरीदारी करने पर सेलर्स के लेवल से ही गड़बड़ी कर दी जाती है. 

इलाज से एहतियात बेहतर
अंग्रेजी में कहावत है- प्रिकॉशन इज़ बेटर दैन क्योर. सोनाक्षी सिन्हा सेलिब्रिटी हैं, इसलिए उन्होंने जब अमेज़न के खिलाफ झंडा बुलंद किया तो कंपनी फौरन बैक-फुट पर आ गई. लेकिन आम ग्राहक के साथ अगर महंगे सामान वाला धोखा हो जाए तो कंपनी इतनी आसानी से गलती नहीं मानती. लिहाज़ा ऐसे झमेलों से बचने के लिए ई-शॉपिंग से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें: 
-शॉपिंग हमेशा अमेज़न, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, पेटीएम जैसे किसी जाने-माने प्लेटफॉर्म से ही करें, जिन्हें अपनी इज़्ज़त प्यारी होती है
-प्रोडक्ट के दाम पर कुछ ज्यादा ही डिस्काउंट मिले तो सावधानी से पड़ताल करें, सामान नकली भी हो सकता है
-प्रोडक्ट की कीमत दो तीन वेबसाइट्स पर कंपेयर कर लें, किसी एक पर अतार्किक तौर पर सस्ता हो तो संदेह करें
-ऑर्डर देते वक्त पेमेंट के लिए जहां तक संभव हो 'कैश ऑन डिलिवरी' का विकल्प चुनें

शिकायत सबूत मांगती है
तमाम सावधानियों के बाद भी आपके डिब्बे में डिफेक्टिव या नकली माल हो सकता है. इसलिए डिलिवरी ब्वॉय दरवाज़े पर आ जाए तो कुछ चीजें कर लें, फायदे में रहेंगे. मोबाइल कैमरा ऑन करके डिलिवरी ब्वॉय और डिब्बे पर लिखी डीटेल्स का वीडियो बना लें. डिलिवरी ब्वॉय को जाने दें क्योंकि उसके सामने डिब्बे में सामान गड़बड़ निकला तो भी वो ले नहीं जाएगा, एक्सचेंज या रिटर्न के लिए कोई दूसरा ही आएगा. अब सबसे ज़रूरी ये है कि उस डिब्बे की अनपैकिंग करते हुए आप उसका वीडियो बना लें, सुनने में थोड़ा झमेले वाला काम लगेगा लेकिन यकीन मानिए अगर कुछ धोखा हुआ तो ये वीडियो वरदान साबित होगा. कई बार प्रोडक्ट की दिक्कत कुछ दिनों बात समझ में आती है इसलिए कुछ दिनों के लिए वीडियो, रसीद, ऑर्डर नंबर, एसएमएस और मेल भी बचाकर रखें, हो सके तो डिलिवरी ब्वॉय का नंबर भी  

कंपनियों पर चलेगा कानून का हंटर
ई-कॉमर्स कंपनियों का पूरा कारोबार ग्राहकों के भरोसे पर चलता है. इसलिए आमतौर पर कंपनियों ने 'रिटर्न' या 'रिप्लेसमेंट' प्रॉसेस को बिल्कुल आसान बना रखा है. लेकिन फिर भी अगर कंज्यूमर को किसी तरह से परेशानी हुई तो कंपनी को अब कानून की आंच भी झेलनी पड़ेगी. नए कानून में ई-कॉमर्स कंपनियों को एग्रीगेटर या प्लेटफॉर्म मुहैया कराने वाले की जगह सर्विस प्रोवाइडर का दर्जा दिया गया है, लिहाजा गड़बड़ी होने पर सेलर के साथ ही उन पर भी कानून का हंटर चलेगा. नए कानून के तहत कंज्यूमर जिस इलाके में रहता है वहीं से शिकायत की ई-फाइलिंग कर सकेगा. इंसाफ की प्रक्रिया को रफ्तार देने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाएं भी शुरू होंगी. 

(लेखक गिरिजेश कुमार ज़ी बिज़नेस से जुड़े हैं.)
(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)