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ऑस्ट्रेलिया में धोनी की वापसी पर उनके पहले कोच बोले, माही का केवल बल्ला बोलता है

एमएस धोनी के पहले कोच केशव रंजन बनर्जी का कहना की आलोचकों को जवाब माही बल्ले से ही देते हैं. 

ऑस्ट्रेलिया में धोनी की वापसी पर उनके पहले कोच बोले, माही का केवल बल्ला बोलता है
एमएस धोनी ने जिस अंदाज में ऑस्ट्रेलिया में बल्लेबाजी की है उसकी सभी तारीफ कर रहे हैं. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:  टीम इंडिया के ऑस्ट्रेलिया दौरे की वनडे सीरीज में टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने शानदार वापसी की जिससे लंबे से उनकी आलोचना करने वालों को करारा जवाब मिला. धोनी ने इस सीरीज में तीनों मैचों में संवेदनशील हाफ सेंचुरी लगाई  जिसमें से दो मैचों में उन्होंने टीम के लिए फिनिशर की भूमिका निभाते हुए जीत दिलाई और नाबाद पवेलियन वापस भी लौटे. इसके बाद  चारों तरफ से तारीफ पा रहे धोनी के पहले कोच  केशव रंजन बनर्जी ने उनके बारे में विस्तार से बात की. 

धोनी के पहले कोच केशव रंजन बनर्जी का कहना है कि आलोचकों ने भले ही उसका बोरिया बिस्तर बांध दिया था लेकिन माही को अपनी काबिलियत पर यकीन है और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में बल्ले से जवाब देकर साबित कर दिया कि भारतीय टीम के लिए आज भी उनसे बेहतर ‘मैच फिनिशर’ नहीं है. रांची के जवाहर विद्या मंदिर में धोनी को फुटबाल से क्रिकेट में लाने वाले बनर्जी ने कहा कि आलोचना या प्रशंसा पर प्रतिक्रिया जताना कभी उसकी आदत नहीं रही. 

माही कभी नहीं बोलता, बल्ले से जवाब देता है
बनर्जी ने रांची से भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा, ‘‘वह कभी बोलता नहीं है. बल्ले से जवाब देता है. ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले मैने उससे कहा कि लोग इतना बोल रहे हैं तो तुम जवाब क्यो नहीं देते. इस पर उसने कहा कि आलोचना से क्या होता है. जिस दिन मुझे लगेगा कि मैं टीम को सौ फीसदी नहीं दे पा रहा हूं, मैं खुद क्रिकेट छोड़ दूंगा.’’ 

कई लिहाज से बजोड़ रही पारियां
बनर्जी ने कहा, ‘‘अब ऑस्ट्रेलिया में मैन आफ द सीरिज रहकर उसने अपने आलोचकों को जवाब दे दिया है. उसकी फिटनेस और टीम की जरूरत के हिसाब से खेली गई पारियां बेजोड़ रही. उसके इस तरह खेलने से दूसरे बल्लेबाजों को भी हौसला मिला.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले रांची में उसने काफी अभ्यास किया. बच्चों के साथ मैदान पर घंटो मेहनत की और उसे यकीन था कि वह अच्छा खेलेगा.’’ 

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यह बदलाव किया है धोनी ने पिछले कुछ सालों में
यह पूछने पर कि उनसे धोनी की क्या बात हुई थी, उन्होंने बताया कि अब वह हलके बल्ले से खेल रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘माही ने बताया कि अब वह भारी बल्ला लेकर नहीं खेल रहा जो 27-28 साल की उम्र में खेलता था. इसके साथ ही फिटनेस पर लगातार मेहनत करता आ रहा है जो मैदान पर दिखती है. चाहे विकेटों के बीच दौड़ हो या विकेट के पीछे कीपिंग, उसकी मुस्तैदी देखते बनती है.’’ 

रोहित के बयान का समर्थन भी किया बनर्जी ने
विश्व कप में उनके बल्लेबाजी क्रम को लेकर काफी चर्चा हो रही है लेकिन बनर्जी ने भारतीय उपकप्तान रोहित शर्मा का समर्थन किया कि धोनी को चौथे नंबर पर उतरना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘चौथे नंबर पर उसे पारी के सूत्रधार की भूमिका निभाने का मौका मिलता है जो वह बखूबी कर रहा है. निचले क्रम पर आने से सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी का ही विकल्प रहता है. मुझे लगता है कि चौथा नंबर उसके लिये सही है.’’ 

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यह पूछने पर कि धोनी के भीतर अभी कितना क्रिकेट बाकी है, उन्होंने कहा, ‘‘फिटनेस और फार्म को देखते हुए तो वह अभी कुछ साल और खेल सकता है लेकिन मुझे लगता है कि विश्व कप के बाद वह तय करेगा. किसी को उसे बताने की जरूरत नहीं है. जब उसे लगेगा कि उसका समय आ गया तो टेस्ट की तरह वह बाकी प्रारूपों से भी विदा ले लेगा.’’

(इनपुट भाषा)