ब्रेक्जिट: जानिए, कैसे 29 मार्च बदल गई 12 अप्रैल में, और क्या हैं इसके मायने

ब्रेक्जिट पर ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे की मुश्किलें बढ़ गई हैं. 

ब्रेक्जिट: जानिए, कैसे 29 मार्च बदल गई 12 अप्रैल में, और क्या हैं इसके मायने
यूरोपीय संघ ने ब्रेेक्जिट को लेकर ब्रिटेन पर शिकंजा कसने की कोशिश की है. (फोटो: Reuters)

नई दिल्ली: यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने के प्रक्रिया ( ब्रेक्जिट) में कुछ अहम बदलाव हुए हैं. गुरुवार 21 मार्च तक ब्रिटेन को 29 मार्च तक यूरोपीय संघ से अलग होना था. यह तारीख खुद ब्रिटेन ने तय की थी, लेकिन ब्रिटेन की थेरेसा मे की सरकार और यूरोपीय संघ के बीच हुए ‘अलगाव समझौता’ ( विद्ड्रॉल डील) को ब्रिटेन की संसद से अनुमोदन नहीं मिल रहा है. इस समझौते या डील को ब्रिटिश संसद ने दो बार खारिज कर दिया है. ताजा घटनाक्रम में थेरेसा सरकार ने यूरोपीय संघ से ब्रेक्जिट की तारीख (जो अब तक 29 मार्च थी) आगे बढ़ाने की मांग की थी, जो यूरोपीय संघ ने मान ली, लेकिन अपनी कुछ शर्तों पर. अब हालात ब्रिटेन के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाले ही माने जा रहे हैं. 

तीन पक्ष बन गए हैं ब्रेक्जिट में
ब्रिटेन के लोगों ने 23 जून 2016 को एक जनमत संग्रह में फैसला किया कि ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से अलग हो जाना चाहिए. इसके लिये थेरेसा मे की सरकार ने एक ब्रेक्जिट प्लान तैयार किया जो कि ‘अलगाव समझौता’ (विद्ड्रॉल डील) तैयार किया कि ब्रिटेन को कैसे संघ से अलग होना है और उसकी प्रक्रिया क्या होगी. मे सरकार इस डील का पास करवाने पर अड़ी है. यूरोपीय संघ भी बार-बार डील में बदलाव के पक्ष में नहीं है. वहीं ब्रिटेन के सांसद वार्तमान प्रस्ताव से सख्त नाखुश हैं. इसी वजह से टकराव हो रहा है. 

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ब्रिटेन के स्पीकर ने किया था यह इशारा
हाल ही में ब्रिटेन की संसद के स्पीकर जॉन बेर्को ने कहा था कि एक ही संसद में बार बार खारिज किया जाने वाला प्रस्ताव नहीं रखा जा सकता. इससे थेरेसा मे को झटका लगा था. मे उसी डील को संसद में पास कराने के लिए तीसरी बार पेश करने की तैयारी में थीं. इसी बीच ब्रेक्जिट की तारीख पास आ गई और मजबूरन में को तारीख आगे बढ़वाने की अपील यूरोपीय संघ से करनी पड़ी. 

तो क्या तारीख मिली थेरिसा को
ब्रिटेन को अब दो तारीखें मिली हैं. पहले तो अगर ब्रिटेन दो सप्ताह तक ब्रेक्जिट डील या विद्ड्रॉल डील संसद से पास कर देता है तो ब्रेक्जिट अब 22 मई को होगा. संसद में दो बार इसी मुद्दे पर मात खा चुकीं थेरेसा के लिए यह अब लगभग नामुमकिन है. अगर तीसरे प्रयास में भी मे को सफलता नहीं मिलती, और ब्रिटेन यूरोपीय संसदीय चुनाव में भाग न लेने का फैसला करता है तो ब्रेक्जिट की नई तारीख 12 अप्रैल है. 

ये विकल्प हैं ब्रिटेन के पास लेकिन
ब्रिटेन के पास जितने उपलब्ध विकल्प आज हैं, जब 29 मार्च ब्रिटेन कानून के मुताबिक आखिरी तारीख है, वे डील पास न होने के हालातों में 12 अप्रैल तक नहीं रहेंगे. यूरोपीय संघ के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क का कहना है कि फिलहाल ब्रिटेन सरकार के पास चार विकल्प हैं. एक, डील के साथ अलग होना, दूसरा, बिना कोई डील के अलग होना, तीसरा, एक लंबा स्थगन (नई लेकिन लंबी तारीख लेना) और चौथा, धारा 50 को रद्द करना शामिल है. 

Theresa May

धारा 50 को रद्द करना ब्रेक्जिट को खारिज करना है जो कि जनमत संग्रह के बिलकुल खिलाफ ही बात होगी. थेरेसा ऐसा नहीं चाहतीं.  दूसरा, अगर 12 अप्रैल तक कोई फैसला न हो सका तो लंबे स्थगन का विकल्प नामुमकिन हो जाएगा. 

ब्रिटिश नेताओं से असंतुष्ट हैं यूरोपीय संघ के नेता
इन हालातों से, और अब यूरोपीय संघ के नेताओं के ताजा बयानों साफ है कि जिस तरह से मे के रवैये से असंतुष्ट थे. मे यह नहीं बता सकीं ब्रिक्जिट डील पास न हो पाने की दशा में क्या करेंगी. यहां तक कि उन्होंने इस सवाल को खारिज तक नहीं किया. अब अगर कोई फैसला नहीं होता है तो 12 अप्रैल को संघ ‘बिना किसी समझौते से अगल हो जाने की प्रक्रिया में चला जाएगा.’ माना जा रहा है कि 12 अप्रैल की तारीख देकर संघ ने ब्रेक्जिट प्रक्रिया अपने हाथों में ले ली है. पूरी घटना से संघ के नेता ब्रिटेन के नेताओं अक्षमता से निराश नजर आ  रहे हैं जो कि उनके बयानों में दिखाई भी दे रहा है.