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क्या 'प्रलय' को आमंत्रण दे रहा ईरान? ईरानी अफसर ने डोनाल्ड ट्रंप को कह दी इतनी बड़ी बात

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक 'सिरफिरा राष्ट्रपति' करार देते हुए कहा है कि तेहरान के खिलाफ उनकी धमकियां काम नहीं करेंगी और अगर ट्रंप ईरान से बातचीत करना चाहते हैं तो उन्हें न सिर्फ उसके प्रति सम्मान दर्शाना होगा, बल्कि साथ ही एक स्थिर संदेश पर कायम रहना होगा.

क्या 'प्रलय' को आमंत्रण दे रहा ईरान? ईरानी अफसर ने डोनाल्ड ट्रंप को कह दी इतनी बड़ी बात
ईरान और अमेरिका के बीच लगातार जुबानी जंग जारी है.

तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच टकराव के हालात लगातार बन रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब ईरान में तबाही की बात कही तो जवाब में ईरान के अफसर ने ट्रंप के लिए बेहद तल्ख शब्द का प्रयोग किया है. ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक 'सिरफिरा राष्ट्रपति' करार देते हुए कहा है कि तेहरान के खिलाफ उनकी धमकियां काम नहीं करेंगी और अगर ट्रंप ईरान से बातचीत करना चाहते हैं तो उन्हें न सिर्फ उसके प्रति सम्मान दर्शाना होगा, बल्कि साथ ही एक स्थिर संदेश पर कायम रहना होगा.

ट्रंप के ट्वीट्स पर ईरान की टिप्पणी
ईरानी संसद के विदेशी मामलों के निदेशक हुसैन आमिर-अब्दुलाहियान ने सोमवार को सीएनएन से एक साक्षात्कार में कहा, कि ट्रंप 'सिरफिरे' हैं और उनका प्रशासन 'भ्रमित' है. ट्रंप ने रविवार को सिलसिलेवार ट्वीट्स कर ईरान को ताकीद की थी कि वह 'कभी भी अमेरिका को धमकी न दे' और साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान युद्ध चाहता है तो यह ईस्लामी देश का 'आधिकारिक अंत' होगा. हुसैन की ये टिप्पणियां ट्रंप की इन ट्वीट्स के बाद आई हैं.


ईरानी संसद के विदेशी मामलों के निदेशक हुसैन आमिर-अब्दुलाहियान

'व्हाइट हाउस के भीतर ही विचारों में काफी मतभेद हैं'
हुसैन ने सीएनएन से कहा, 'अपने दिमाग में, ट्रंप सोचते हैं कि उन्होंने प्रतिबंधों के जरिए ईरान के सिर पर बंदूक तान दी है और वह हमारी अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की कोशिश कर रहे हैं.' उन्होंने कहा, 'लेकिन, यह सब सिर्फ उनकी कल्पना है. अब वह चाहते हैं कि हम उनसे बात करें? ये एक सिरफिरे राष्ट्रपति हैं.' उन्होंने वेस्ट विंग में मौजूद युद्ध की आग को भड़काने वालों की ओर ईशारा करते हुए और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन का नाम लेते हुए कहा, 'व्हाइट हाउस के भीतर ही विचारों में काफी मतभेद हैं.'

उन्होंने कहा, 'इतना ही नहीं, ट्रंप अपने निर्णय लेने में संतुलित और स्थिर नहीं हैं, इसलिए हमें एक भ्रमित व्हाइट हाउस से निपटना पड़ रहा है. ईरान को कई संकेत मिलते हैं जिनसे पता चलता है कि कोई नहीं जानता कि व्हाइट हाउस पर किसका शासन है.'

'ट्रंप ईरान की संस्कृति के बारे में जान लें'
उन्होंने, हालांकि, साथ ही कहा कि वह बातचीत के खिलाफ नहीं हैं, प्रश्न यह है कि यह कैसे की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, 'ट्रंप ईरान से फोन पर बात करने के बारे में चर्चा कर सकते हैं, लेकिन तभी जब वह धमकी और बल की भाषा का प्रयोग न करें.' उन्होंने कहा कि ट्रंप को अगर लगता है कि ईरान के खिलाफ उनकी धमकियां काम करेंगी तो उन्हें ईरानी लोगों की संस्कृति और मानसिकता के बारे में कुछ भी पता नहीं है.

हर अमेरिकी राष्ट्रपति किसी ना किसी देश को बनाते रहे हैं निशाना
जानकार मानते हैं कि ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप को लेकर ईरान का तीखा बयान देना पूरे देश को भारी पड़ सकता है. पिछले तीन दशक में अमेरिका में जीतने भी राष्ट्रपति बने हैं, उनके कार्यकाल में उन्होंने किसी ना किसी देश पर हमला किया ही है. सीनियर जॉर्ज बुश ने इराक पर हमला किया था. उनके बाद उनके बेट जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने दोबारा इराक पर हमला किया और तानाशाह शासक सद्दाम हुसैन को फांसी के फंदे पर लटका दिया था. 

बुश के कार्यकाल में ही अफगानिस्तान पर अमेरिका ने हमला किया था. बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ओसामा बिन लादेन को मौत के घाट उतारा था. जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में भी अमेरिका कई देशों पर सैन्य कार्रवाई करता रहा. डोनाल्ड ट्रंप के अब तक के कार्यकाल में अमेरिका किसी देश के खिलाफ कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई नहीं कर पाया है. ट्रंप के कार्यकाल में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच तल्ख रिश्ते बने थे, लेकिन बैठक के बाद दोनों देशों के रिश्ते सुधर गए हैं.

इनपुट: IANS