दक्षिण कोरिया: डंके के चोट पर बना सबसे तेज तरक्की करने वाला देश, जापान और चीन को भी पछाड़ा

दक्षिण कोरिया ने द्वीतीय विश्व युद्ध के बाद उत्तर कोरिया के विपरीत तेजी से उन्नति की और खुद को विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा कर लिया. 

दक्षिण कोरिया: डंके के चोट पर बना सबसे तेज तरक्की करने वाला देश, जापान और चीन को भी पछाड़ा
दक्षिण कोरिया ने तकनीकी में बहुत तेजी से तरक्की है. (फोटो: IANS)

नई दिल्ली: दक्षिण कोरिया एशिया के समृद्ध देशों में से एक है जो अपने आधुनिक विकास के लिए तो जाना ही जाता है, लेकिन इन दिनों वह उत्तर कोरिया के साथ दुश्मनी को लेकर भी चर्चा में है. दक्षिण कोरिया ने जिस तेजी से तरक्की की है वह दुनिया के लिए मिसाल है. चीन और जापान जैसी ताकतों के बीच रहे कोरिया प्रायद्वीप ने अपनी एक अलग भाषा के साथ ही एक अलग संस्कृति का अक्षुण्ण रखा है. 

कोरिया का भूगोल
दक्षिण कोरिया एशिया में कोरिया प्रायद्वीप के दक्षिण में स्थित है. पूर्व में पूर्व सागर ( जिसे जापान सागर भी कहते हैं) और पश्चिम में पीला सागर है. दक्षिण कोरिया उत्तर में उत्तर कोरिया से जमीनी सीमा बांटता है. वहीं दक्षिण में जापान और उसके बीच कोरिया जलडमरूमध्य है जिसके पास स्थित जेजू द्वीप दक्षिण कोरिया का ही हिस्सा है. दक्षिण कोरिया जापान और चीन से समुद्री सीमा साझा करता है. पूर्व में समुद्री तट के समांतर तेबेक पर्वत श्रेणी है और दक्षिणी हिस्से के बीच में रोबेक पर्वत श्रेणी स्थित है. देश की सबसे लंबी नदी नाकतोंग है जो देश के मध्यपूर्व में तेबेक की पहाड़ियों से दक्षिण की ओर बहती है. वहीं हांग नदी उत्तर में पश्चिम की ओर बहती हुई राजधानी सियोल से होकर पीले सागार में मिल जाती है. गर्मियों में यहां मानसून का असर रहता है, लेकिन सर्दियां ज्यादा ठंडी और शुष्क होती हैं.

कोरिया का इतिहास
पहली सदी में कोरिया प्रायद्वीप ही सिला, कोग्युर्यो और बेक्चे नाम के तीन वंशों के शासकों में बंटा था. सातवीं सदी में सिला वंश ने कोरिया को एकीकृत किया. सिला साम्राज्य के बाद कोर-यो वंश का शासन रहा जिनके नाम से कोरिया शब्द आया. 14वीं सदी में चोजन वंश ने यहां राज किया. इसके बाद पहले मंगोलों ने फिर चीन और जापान ने कोरिया पर अनेक बार हमला किया. लेकिन कोग्युर्यो वंश ने काफी समय तक यहां शासन किया. 

दो हिस्सों में बंटा कोरिया प्रायद्वीप
बीसवीं सदी तक दूसरे देशों के अधीन रहने के बावजूद कोरिया ने अपनी संस्कृति को बचाए रखा, 20वीं सदी में जापान यह द्वितीय विश्व युद्ध तक जापान का हिस्सा रहा जिसके बाद यह प्रायद्वीप दो हिस्सों में बंट गया जिससे दक्षिण कोरिया का जन्म हुआ. शीत युद्ध का इस देश पर गहरा प्रभाव पड़ा. उत्तर कोरिया पर रूस का प्रभाव रहा जो कि सोवियत विघटन के बाद से कम होता गया, लेकिन दक्षिण कोरिया में अमेरिका ने गहरी दिलचस्पी दिखाई जिसके सहयोग से इस देश ने हर क्षेत्र में खूब तरक्की की. 

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शीत युद्ध के दौरान दक्षिण कोरिया
युद्ध के बाद, कोरिया में सबसे पहले स्यंग्मन रीह ने सत्ता संभाली जो कोरिया युद्ध के बाद भी 1960 तक सत्ता में बने रहे, जिसके बाद पार्क चुंग ही ने उन्हें हटा कर सत्ता हथिया ली. ही 1979 तक देश के नेता बने रहे. ही के शासन काल में ही देश ने तेजी से तरक्की भी की लेकिन उनके तानाशाही तरीकों से असंतोष भी पनपता रहा. 1950 में एक पिछड़ा देश होने के बावजूद दक्षिण कोरिया एक विकसित देश की श्रेणी में आ गया. चुन दो ह्वान ने पार्क चुंग ही के बाद सत्ता अपने हाथों में ले ली, लेकिन लोकतंत्र की मांग बढ़ने के बाद 1987 में ह्वान की पार्टी के रो ताय वू 1988 में देश के राष्ट्रपति बने. 1988 में ही दक्षिण कोरिया में ओलंपिक का सफल आयोजन हुआ. 

1997 से हुई लोकतंत्र की स्थापना
दक्षिण कोरिया में लोकतंत्र की सही मायनों में 1997 से माना जाता है जब किम दाय जुंग देश के राष्ट्रपति बने. लोकतंत्र की बहाली और उत्तर कोरिया के साथ शांति के लिए किए गए प्रयासों के लिए जुंग को नोबल शांति पुरस्कार भी दिया गया. 2007 में ली म्युंग बाक, 2013 में पार्क गुन हे और 2017 में मून जाए इन दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति बने. इन के शासन को उत्तर कोरिया के साथ संबंधों में सुधार करने और अमेरिका के साथ मजबूत सैन्य सहयोग करने के लिए जाना जाता है. लोकतंत्र की मजबूती के साथ ही दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था मजबूत ही होती रही है. 

South Korea Flag
 
शिक्षा पर दिया जाता है बहुत जोर
दक्षिण कोरिया में कोरियन भाषा ही बोली जाती है, लेकिन अंग्रेजी भी शिक्षा के पाठ्यक्रमों में शामिल है. ज्यादातर लोग किसी भी धर्म से जुड़े नहीं हैं, इनके अलावा 26% ईसाई और 26% बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग हैं. राजधानी सियोल सबसे बड़ा शहर है. इसके अलावा बुसान, इंचियोन, दाएगु, गाएजोन भी प्रमुख शहरों में शामिल हैं. हाल ही में प्योंगचोंग में दक्षिण कोरिया में शीतकालीन ओलंपिक आयोजित किए गए थे. सरकार यहां शिक्षा पर बहुत खर्च करती है. यही वजह है कि ज्यादातर लोग यहां कॉलेज स्तर तक की डिग्री हासिल कर चुके हैं. यहां कुशल कामगारों की संख्या बहुत ज्यादा है. 

दक्षिण कोरिया बड़ी आर्थिक ताकत कैसे बना 
दक्षिण कोरिया की आजादी के बाद से अमेरिका और जापान के सहयोग से यहां बड़े कारोबारी समूह विकसित हुए. इस देश ने तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की.  सैमसंग, एलजी, हुंदेई,  जैसी मशहूर और ताकतवर कंपनियां दक्षिण कोरिया की बढ़ती आर्थिक ताकत का सबसे बड़ा सबूत हैं. आज यहां की कंपनियां सेलफोन, कंप्यूटर, घरेलू उपकरण, रोबोटिक, एयर कंडिशनर मशीनरी, गाड़ियां, कॉस्मेटिक आदि के क्षेत्र सबसे आगे हैं. देश की 82.7% आबादी इंटरनेट और 79% आबादी स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करती है. दक्षिण कोरिया की सफलता के पीछे यहां के लोगों को जुनून और कुछ नया कर दिखाने का जज्बे का सबसे बड़ा योगदान है. 

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आर्थिक स्थिति के अन्य पहलू
देश की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बहुत ज्यादा निर्भर है, देश में आयात और निर्यात दोनों ही बहुत ज्यादा मात्रा में होता है. इसके अलावा देश में आधारभूत संरचना में भी काफी तरक्की की है. यातायात के उन्नत साधनों की कमी नहीं है और उन्हें और बेहतर बनाने के लिए निवेश निरंतर होता रहता है. दक्षिण कोरियाई वान यहां की मुद्रा है. दक्षिण कोरिया कॉर्मेटिक सर्जरी में उत्कृष्टता हासिल की है. इसके अलावा कॉस्मेटिक्स में यह देश काफी आगे हैं. 

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध
दक्षिण कोरिया भारत का सामरिक साथी रहा है. भारत की लुक ईस्ट नीति के तहत दक्षिण कोरिया भारत का महत्वपूर्ण साझेदार हो गया है. दोनों देश आपसी व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, पर्यटन, स्टार्टअप जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. दोनों देशों में गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं जिसके कारण पर्यटन जैसे क्षेत्रों में परस्पर आदान प्रदान बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सियोल शांति सम्मान से पुरस्कृत किय गया है. 

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स्पाइ कैमरे से जुड़े अपराधो को लेकर हो रहा है बवाल
हाल ही में स्पाइ कैमरों की मदद से महिलाओं के अश्लील विडियो बनाकर इंटरनेट पर बेचने के मामलों ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी. ऐसे करीब सैकड़ों मामले सामने आए हैं जिसमें होटलों में रहने वाले युगलों, खासकर महिलाओं के स्पाइ कैमरों की मदद से अश्लील वीडियो बनाए गए. इसके बदा हजारों महिलाओं ने मीटू अभियान के तहत सड़कों पर स्पाइ कैमरों से जुड़े यौन अपराधों का विरोध प्रदर्शन करना शुरू किया. पिछले एक साल से दक्षिण कोरिया में ऊंचे ओहदे पर बैठे पुरुषों पर विवाह से घृणा और यौन हिंसा के आरोप लगे हैं.