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ड्राइविंग के अधिकार को निकाह की शर्तों में शामिल करा रही हैं सऊदी अरब की महिलाएं

सऊदी अरब सरकार ने सितंबर 2017 में ही महिलाओं के गाड़ी चलाने पर दशकों पुराने प्रतिबंध को 24 जून 2018 को हटाने की घोषणा की गई थी.

ड्राइविंग के अधिकार को निकाह की शर्तों में शामिल करा रही हैं सऊदी अरब की महिलाएं
फाइल फोटो

दम्मम: सऊदी अरब ने कानूनी तौर पर भले ही महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति जरूर दे दी है लेकिन इस अधिकार के उपयोग में कभी कोई रोड़ा ना अटकाए यह सुनिश्चित करने के लिए महिलाएं कार रखने और उसके चलाने के अधिकार को अपने निकाह की शर्तों में शामिल करा रही हैं. दम्मम के रहने वाले सेल्समैन माजद ने हाल ही में अपने निकाह की शर्तों के बारे में बातचीत करते हुए बताया कि कैसे उनकी मंगेतर ने शर्त रखी है कि वह कभी उसे गाड़ी चलाने से नहीं रोकेंगे.

दरअसल सऊदी अरब में निकाह की शर्तों का इस्तेमाल महिलाएं और पुरूष दोनों, लेकिन खास तौर से महिलाएं अपने कुछ खास अधिकारों को सुरक्षित कराने के लिए करती हैं. पितृसत्तात्मक सऊदी अरब में महिलाओं को सामान्य तौर पर अपने पुरूष अभिभावक (पति, पिता या अन्य) की सभी बातें मानने के लिए मजबूर होना पड़ता है और वह कानून की शरण में भी नहीं जा सकती हैं.

लेकिन, पुरूष यदि निकाहनामे में लिखी किसी शर्त का उल्लंघन करता है तो महिलाएं इस आधार पर उससे तलाक ले सकती हैं. अभी तक महिलाएं निकाहनामे का इस्तेमाल अपने लिए मकान, घरेलू सहायिका रखने, आगे पढ़ाई जारी रखने या शादी के बाद भी नौकरी करते रहने जैसी शर्तें रखने के लिए करती थीं. लेकिन अब ड्राइविंग का अधिकार भी इसमें जुड़ रहा है.

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माजद (29) बताते हैं कि अगले महीने उनकी शादी होने वाली है. उनकी 21 वर्षीय मंगेतर ने दो शर्तें रखी हैं.. एक वह शादी के बाद भी काम करेंगी और दूसरा कि उन्हें वाहन चलाने का अधिकार होगा. माजद कहते हैं कि वह (मंगेतर) स्वतंत्र रहना चाहती है. मैंने इसपर कहा, ‘‘हां, क्यों नहीं.’’ माजद अपना पूरा नाम साझा नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि निकाहनामा और उसकी शर्तें निहायत निजी और पारिवारिक मामला है.

रियाद में निकाह पढ़ाने वाले एक मौलवी अब्दुलमोसेन अल-अजेमी का कहना है, ‘‘निकाह में किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए कुछ महिलाएं ड्राइविंग के अधिकार को निकाहमाने में शामिल करा रही हैं.’’ अल-अजेमी के पास हाल ही में ऐसा पहला निकाहनामा आया है.उनका कहना है कि निकाहनामा एक तरह से सुनिश्वित करता है कि शौहर अपने वादे को नहीं भूलेगा, क्योंकि यह वादा खिलाफ तलाक का आधार बन सकती है. सऊदी सरकार ने महिलाओं को गाड़ी चलाने का अधिकार तो दे दिया है, लेकिन घर के पुरूष अभिभावकों द्वारा ड्राइविंग से मना किए जाने या कार रखने की इजाजत नहीं मिलने की सूरत में क्या किया जा सकता है, उस संबंध में कुछ नहीं कहा है.

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सऊदी अरब सरकार ने सितंबर 2017 में ही महिलाओं के गाड़ी चलाने पर दशकों पुराने प्रतिबंध को 24 जून 2018 को हटाने की घोषणा की गई थी. यह बड़ा फैसला क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 कार्यक्रम का हिस्सा है. क्राउन प्रिंस 2030 तक सऊदी अरब की इकोनॉमी को तेल से अलग करना चाहते हैं और इसके लिए तमाम सुधार किए जा रहे हैं. उन्हीं सुधारों में महिलाओं को मिली यह आजादी भी शामिल है, जिसके तहत महिलाओं को ड्राइविंग सिखाने के लिए ट्रेनिंग स्कूल खोले गए, महिलाओं के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनने शुरू हुए. फिलहाल सऊदी सरकार ने दस महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए हैं. जल्दी ही ये संख्या 2,000 तक पहुंच जाएगी.

आज से पहले सऊदी अरब दुनिया का इकलौता ऐसा देश था, जहां महिलाओं के गाड़ी चलाने पर बैन था, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए महिलाओं को संघर्ष के बड़े रास्ते से गुजरना पड़ा. महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस का अधिकार दिलाने के लिए लंबे समय से अभियान चलाया जा रहा था. 

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आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि 90 के दशक में कई महिलाओं को नियम तोड़कर शहर में गाड़ी चलाने के लिए गिरफ्तार तक किया गया था. कई महिलाएं ब्रिटेन, कनाडा या लेबनान जैसे मुल्कों में जाकर अपने लिए अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया करती थीं. साथ ही आपको यह भी बता दें कि सऊदी अरब में अब भी महिलाओं को वो अधिकार हासिल नहीं है जो दूसरे देशों की महिलाओं के पास हैं. सऊदी अरब में अब भी महिलाएं अकेले प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकतीं और अब भी कई काम महिलाओं के लिए बैन हैं. 2015 तक सऊदी अरब में महिलाओं को मतदान तक का अधिकार नहीं था