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घाटी में Apple के नाम पर आतंक और दहशत फैलाने की 'पाकिस्तानी साजिश'!

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. घाटी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाले सेब के नाम पर दहशतर्दी का खेल खुल्लम-खुल्ला चल रहा है. अबतक इतने ट्रक ड्राइवर की हत्या हो चुकी है.

घाटी में Apple के नाम पर आतंक और दहशत फैलाने की 'पाकिस्तानी साजिश'!

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी सेब लगातार खराब हो रहे हैं, इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह आतंकियों की वो कायराना हरकतें जिससे घाटी में दहशत फैलाने की साजिश रची जा रही है. बीते 15 दिनों से आतंकी लगातार घाटी में अपनी नापाक करतूत को अंजाम दे रहे हैं. जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद से ही बौखलाए आतंकवादी नहीं चाहते कि सूबे में हालात सामान्य हो. अनुच्छेद 370 के खात्मे के दो महीने बाद पटरी पर लौटती जिंदगी की गाड़ी आतंकी फिर से बेपटरी करने की फिराक में हैं.

घाटी में दहशत फैलाने का मंसूबा

घाटी में दहशत फैलाने के अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए आतंकी जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानि सेब के कारोबार को बरबाद कर देना चाहते हैं. लिहाजा वो लगातार सेब के किसानों, व्यापारियों और इसकी ढुलाई करने वाले ट्रक ड्राइवरों को निशाना बना रहे हैं. यूरोपियन यूनियन के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के जम्मू-कश्मीर दौरे से एक दिन पहले आतंकियों ने अनंतनाग जिले में सेब की ढुलाई में लगे एक और ट्रक डाइवर की हत्या कर दी.

ट्रक ड्राइवर ऊधमपुर जिले के कटरा का रहने वाला था. बिजबेहड़ा के कनीलवान एरिया में आतंकवादियों ने इस वारदात को अंजाम दिया. मृतक जम्मू कश्मीर के रियासी जिले का ही रहने वाला था.

एक हफ्ते में सेब की ढुलाई में लगे ट्रक ड्राइवरों पर ये चौथा हमला है. इससे पहले शोपियां में तीन हमले हुए थे.

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने ये दावा किया है कि ये सबकुछ पाकिस्तान के इशारे पर किया जा रहा है. उनहोंने कहा कि 'जो ट्रक ड्राइवरों पर हमला किया है. मैनें पहले भी कहा है कि यहां जो ट्रकर्स आते हैं. वो यहां की इकॉनमी बहुत बड़ी हॉर्टीकल्चर उसके ऊपर डिपेंडेंट है और दूसरा टूरिज्म के ऊपर डिपेंडेंट है. आतंकवादी पाकिस्तान के इशारे पर इस काम में लगे हुए हैं कि किसी ना किसी तरीके से यहां पर दोनों को चोट पहुंचाई जाए.'

ट्रक ड्राइवर को बनाया जा रहा निशाना

घाटी में आतंकी लगातार सेब ढुलाई के काम में लगे ट्रक ड्राइवरों को निशाना बना रहे हैं. अनंतनाग में हुई वारदात से पहले भी ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है. पिछले 2 हफ्ते में आतंकवादी कश्मीर में 4 ट्रक ड्राइवरों, पंजाब के एक कारोबारी और एक प्रवासी मजदूर की हत्या कर चुके हैं.

बीती 24 अक्टूबर को आतंकियों ने दो ट्रक ड्राइवरों की शोपियां में गोली मारकर हत्या की थी. दोनों राजस्थान और हरियाणा से सेब की खेप लाने कश्मीर गए थे.

उससे पहले 16 अक्टूबर को पंजाब के सेब कारोबारी चरणजीत सिंह आतंकियों के हमले में मारे गए थे, जबकि एक अन्य कारोबारी जख्मी हो गया था.

उससे पहले 14 अक्टूबर को राजस्थान के भरतपुर का एक ड्राइवर घाटी में ही आतंकियों के हमले का शिकार हुआ था.

घाटी में पोस्टपेड मोबाइल सेवा से प्रतिबंध हटने के बाद सेब की ढुलाई का काम शुरू हुआ है. ऐसे में माना जा रहा है कि सेब की ढुलाई से जुड़े लोगों पर हमले कर आतंकवादी डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के बाद सुरक्षा कारणों से लगाई गई पाबंदियों की वजह से पिछले तीन महीने के दौरान कश्मीर घाटी में व्यापारियों को दस हजार करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है. ऐसे में आतंकी सेब के कारोबार से जुड़े लोगों को निशाना बनाकर यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं.

ग्रेनेड अटैक से भी दहशत फैलाने की कोशिश

आतंकी ना सिर्फ सेब व्यापार से जुड़े लोगों को निशाना बना रहे हैं बल्कि आम कश्मीरियों पर भी हमला कर दहशत फैलाने की मुहिम में जुटे हैं. इसी कड़ी में सोमवार को सोपोर में एक बस स्टैंड पर आतंकियों ने ग्रेनेड फेंका. इस हमले में 19 लोग घायल हो गए. इसमें से छह की हालत गंभीर बनी हुई है. कुछ घायलों को श्रीनगर के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. अन्य घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है. सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और आतंकवादियों को गिरफ्तार करने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है.

पिछले दो महीने से जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद काफी पाबंदियां लगी हुई थीं लेकिन बीते दिनों में पाबंदियों को कम किया गया है. जिसके बाद घाटी में हलचल बढ़ी है, सेब के व्यापारी आने-जाने लगे हैं, टूरिस्टों का भी आना शुरू हो गया है. यही कारण है कि आतंकी जम्मू-कश्मीर में फिर से सामान्य हो रहे हालातों से परेशान हैं और अब वो घाटी के सामान्य हो चुके हालातों को बिगाड़ने की कोशिश में जुट गए हैं.