शहीद दिवस पर रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह की कहानी

आजादी की लड़ाई के दौरान कई फ्रीडम फाइटर ऐसे भी हुए जिन्होंने अपना सर्वस्व देश के लिए न्यौछावर कर दिया. उन्हीं पुरोधाओं में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह का नाम भी आता है, जिन्हे आज ही के दिन अंग्रेजी सरकार ने फांसी की सजा सुनाई थी.   

शहीद दिवस पर रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह की कहानी

नई दिल्ली: देश की आजादी की लड़ाई में कई दिन शहीद दिवस के रूप में याद किए जाते हैं. एक तो 23 मार्च का दिन जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा दी गई थी. दूसरा तब जब रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान और रोशन सिंह को तीन अलग-अलग जगहों पर फांसी दी गई थी. आजादी की लड़ाई में कई दिन ऐसे आए जब अंग्रेजी हुकूमत के दांत खट्टे हो गए. काकोरी में सरकारी खजाने की लूट कांड उनमें से एक था. 

काकोरी कांड के लिए जब फांसी पर लटकाए गए क्रांतिकारी

कई लोग इसके लिए  हिरासत में लिए गए. इस काकोरी कांड में भारत से विदेश ले जा रही सरकारी संपत्तियों को बीच में ही लूट लिया गया था. इसमें हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के कई क्रांतिकारी नेता शामिल थे.

तकरीबन 40 लोगों को इस केस से जुड़े होने के कारण गिरफ्तार किया गया था. जबकि काकोरी कांड में सिर्फ 10 लोग ही शामिल थे. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान और रोशन सिंह में उन्हीं लोगों में से थे जिन्हें काकोरी कांड के लिए साल 1927 में  आज ही के दिन फांसी के फंदे पर लटका दिया गया. 

हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के अध्यक्ष थे बिस्मिल

तकरीबन 18 महीने तक चले केस के बाद गिरफ्तार किए गए भारतीय क्रांतिकारी जो मुख्य रूप से हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन से ही थे, उन्हें सजा दी गई थी.

हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन एक गरम दल के नेता जो खास कर आजादी की लड़ाई को हक मान कर लड़ते थे, उनका क्रांतिकारी समूह था. इस समूह में चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे तमाम नेता शामिल थे. रामप्रसाद बिस्मिल हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के अध्यक्ष थे. 

तीनों को अलग-अलग जगहों पर दी गई फांसी

काकोरी कांड को अंजाम देने वाले मुख्य योजनाकर्ता रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में फांसी चढ़ाया गया तो वहीं अशफाकउल्ला खान को फैजाबाद की जेल में और रोशन सिंह को इलाहाबाद के नैनी जेल में. हालांकि, फांसी चढ़ाए जाने से पहले तीनों को एक साथ रखा गया था. अशफाकउल्ला खान बिस्मिल की रचनाओं के बहुत बड़े प्रशंसक थे. वे खुद भी रचनाएं लिखते और गाते थे.

फांसी से पहले अशफाकउल्ला खान ने कही थी यह बात

जब उन तीनों को फांसी की सजा सुना दी गई थी तो अशफाकउल्ला खान ने लिखा कि बिस्मिल हिंदू हैं, वे पुनर्जन्म की बात करते हैं लेकिन मैं तो मुस्लिम हूं. मेरे धर्म में पुनर्जन्म जैसा कुछ नहीं होता. मैं इस बात से परेशान हूं कि देश के लिए जीने-मरने का मौका बिस्मिल को बार-बार मिलेगा और मुझे सिर्फ एक बार.