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एक साल में GDP विकास दर में 3 फीसदी की गिरावट, ये रही प्रमुख वजह

NSO के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी 35.84 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में यह 34.14 लाख करोड़ रुपये थी, जो कि 5 फीसदी की वृद्धि दर है.

एक साल में GDP विकास दर में 3 फीसदी की गिरावट, ये रही प्रमुख वजह
2018-19 की पहली तिमाही में विकास दर 8 फीसदी थी. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: देश की आर्थिक विकास दर लगातार गिर रही है. वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में विकास दर ठीक एक तिमाही पहले के मुकाबले 0.8 फीसदी गिरकर 5 फीसदी पर पहुंच गई. पहली तिमाही में अनुमानित विकास दर 5.7 फीसदी थी. यह पिछले छह सालों के न्यूनतम स्तर पर है. वित्त वर्ष 2018-19 की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) में GDP ग्रोथ रेट 5.8 फीसदी था. रिपोर्ट के मुताबिक, विनिर्माण गतिविधियों (मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी) में तेज गिरावट के कारण देश के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की रफ्तार में इतनी ज्यादा गिरावट आई है. देश की विकास दर में महज एक साल की अवधि में 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. साल-दर-साल आधारित तुलना करें तो वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर 8 फीसदी थी, जो अब 5 फीसदी पर पहुंच चुकी है.

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी 35.84 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में यह 34.14 लाख करोड़ रुपये थी, जो कि 5 फीसदी की वृद्धि दर है. इन आंकड़ों में बताया गया कि वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में साल-दर-साल आधार पर सकल मूल्य वर्धित दर (ग्रॉस वैल्यू एडेड रेट) गिरकर 4.9 फीसदी रही, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 7.7 फीसदी थी. जीवीए में करों को शामिल किया जाता है, लेकिन सब्सिडी को शामिल नहीं किया जाता है.

NSO ने एक बयान में कहा, "वित्त वर्ष 2011-12 की आधार दरों के अनुसार समीक्षाधीन अवधि में जीवीए कुल 33.48 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जोकि वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में 31.90 लाख करोड़ रुपये था. इस प्रकार से इसमें 4.9 फीसदी की वृद्धि दर दर्ज की गई है." बयान में कहा गया, "जिन क्षेत्रों की वृद्धि दर समीक्षाधीन अवधि में 7 फीसदी से अधिक रही, उनमें 'बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य उपभोक्ता सेवाएं', 'व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और ब्राडकास्टिंग संबंधी सेवाएं' और 'सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाएं' रही."

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NSO की ताजा रिपोर्ट पर एक नजर दौड़ायें तो कृषि विकास दर 5.1 फीसदी से घटकर 2 फीसदी पर, माइनिंग सेक्टर में ग्रोथ रेट 0.4% से बढ़कर 2.7%, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ग्रोथ रेट 12.1% से घटकर 0.6%, इंडस्ट्री ग्रोथ रेट 9.8% से घटकर 2.7%, सर्विस सेक्टर ग्रोथ रेट 7.1% से घटकर 6.9% और कंस्ट्रक्शन सेक्टर ग्रोथ रेट 9.6% से घटकर 5.7% पर पहुंच गया है. तमाम सेक्टर की विकास दर में गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं हैं.

(इनपुट-आईएएनएस से भी)