हरियाणा में JJP बनी किंग मेकर, दुष्यंत चौटाला बोले, 'सत्ता की चाबी हमारे हाथ में'
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हरियाणा में JJP बनी किंग मेकर, दुष्यंत चौटाला बोले, 'सत्ता की चाबी हमारे हाथ में'

दुष्यंत चौटाला ने दावा किया कि न तो कांग्रेस और न ही बीजेपी 40 का आंकड़ा पार कर पाएगी. 

हरियाणा में JJP बनी किंग मेकर, दुष्यंत चौटाला बोले, 'सत्ता की चाबी हमारे हाथ में'

चंडीगढ़: हरियाणा (Haryana elections result 2019) में 90 सीटों के रुझान आ चुके हैं. गुरुवार सुबह 8 वोटों की गिनती शुरू होते ही यह साफ हो गया था इस बार 11 महीने पहले बनी जननायक जनता पार्टी (JJP) सरकार के गठन में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी. जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाल (Dushyant Chautala) ने भी कह दिया है कि सत्ता की चाबी हमारे हाथ में होगी. 

दुष्यंत चौटाला ने दावा किया कि न तो कांग्रेस (congress) और न ही बीजेपी 40 का आंकड़ा पार कर पाएगी. उन्होंने बीजेपी (BJP) पर तंज कसते हुए भी कहा कि 75 पार का नारा तो फेल गया. बता दें बीजेपी ने दावा किया था कि इस बार बीजेपी हरियाणा में 75 से ज्यादा सीटें जीतेंगी.

बता दें जेजेपी फिलहाल 11 सीटों पर आगे चल रही है और यह तय है कि सरकार बनाने के लिए कांग्रेस या बीजेपी को जेजेपी के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. 

दुष्यंत ने साफ कर दिया है कि किसे समर्थन देना है इसे फैसला जल्दबाजी में नहीं किया जाएगा. वहीं सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में शुक्रवार जेजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी जिसमें तय किया जाएगा कि पार्टी कांग्रेस या बीजेपी में किसके साथ जाएगी. 

बता दें जेजेपी के प्रमुख पूर्व उप-प्रधानमंत्री देवीलाल के पोते अजय चौटाला हैं. उनका अपने पिता और चार बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे ओम प्रकाश चौटाला और भाई अभय चौटाला के साथ मनमुटाव हो गया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई.

जेजेपी ने विधानसभा चुनावों में सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ा है. इसके संस्थापक अजय चौटाला अपने पिता के साथ उनके 10 साल के कार्यकाल के दौरान एक शिक्षक भर्ती घोटाले में दोषी पाए जाने के बाद जेल में हैं. इनेलो के 19 विधायकों में से 4 जेजेपी में शामिल हो गए थे.

चुनाव में दुष्यंत ने किया पार्टी का नेतृत्व
अलग पार्टी बनने के बाद अमेरिका में कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक दुष्यंत चौटाला (31) जेल में बंद अपने पिता की अनुपस्थिति में पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं.

अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने पारिवारिक संबंधों को गंभीर बनाने के लिए अपने चाचा अभय सिंह चौटाला पर निशाना साधते हुए लोगों से भावनात्मक समर्थन हासिल करने की कोशिश भी की.

 

 

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