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जोधपुर में शीतला माता मंदिर का ओखली बनी वैज्ञानिकों के लिए पहेली

पाली के भाटून्द गांव में स्थित शीतला माता का ये मन्दिर लोगों की आस्था का केंद्र है. इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु शीतला माता से मन्नत मांगने आते हैं.

जोधपुर में शीतला माता मंदिर का ओखली बनी वैज्ञानिकों के लिए पहेली
मंदिर का आधा फुट गहरी ओखली वैज्ञानिकों के लिए किसी पहले से कम नहीं है.

सुभास रोहिसवाल/पाली: जोधपुर के पाली जिले की बाली तहसील के भाटून्द गांव में स्थित शीतला माता के मन्दिर में करीब आधा फुट गहरी ओखली वैज्ञानिकों के लिए भी पहेली बना हुआ है. खास बात यह है कि इसमें कितना भो लाखो लीटर पानी भरा जता लेकिन ओखली भरती नहीं. आज भी मंदिर में शीतला माता की पूजा कर ओखली में पानी गांव की महिलाओं द्वारा सैकड़ों घड़े पानी डाला जा रहा है. मान्यता है कि ये पानी बाबरा नाम का राक्षस पिता है इसके पीछे भी कहानी है.

पाली के भाटून्द गांव में स्थित शीतला माता का ये मन्दिर लोगों की आस्था का केंद्र है. इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु शीतला माता से मन्नत मांगने आते हैं. ये मंदिर इससे भी ज्यादा खास वजहों से चर्चा में है, वो है शीतला माता के प्रतिमा के सामने बना आधा फुट गहरा रहस्यमयी ओखली.

मंदिर का आधा फुट गहरी ओखली ना केवल आम लोगों बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी ये किसी पहले से कम नहीं है. कहा जाता है कि इस छोटी से ओखली में लाखों लीटर पानी समा जाता है. मन्दिर में स्थापित इस घड़े में पानी डालने के लिए साल में दो बार रस्म निभाई जाती है. हर साल शीतला सप्तमी और जेष्ठ महीने की पूर्णिमा को यहां मेला लगता है. मेले में आने वाले श्रद्धालु सैकड़ों कलश पानी इसमें उड़ेल देते हैं. मेला खत्म होने के बाद पुजारी कच्चे दूध से ओखली पूजा करते हैं, फिर ढक्कन लगा दिया जाता है, लेकिन पानी आखिर जाता कहां है, इस बारे में किसी के पास माकूल जवाब नहीं है.

सवाल ये हैं, कि प्रतिमा के सामने मौजूद इस ओखली का रहस्या क्या है? क्या ओखली का पानी पाइन के जरिए कहीं और जाता है? ये ऐसे तमाम सवाल है, जिसका जवाब आना अभी बाकी है.

लोकमान्यतों के मुताबिक ओखली का कनेक्शन एक राक्षस से हैं, जिसका वध शीतला माता ने करीब हजार साल पहले किया था. कहानी के मुताबिक करीब हजार साल पहले इस इलाके में बाबरा नामक राक्षस रहता था. जब भी गांव में कोई शादी होती बाबरा राक्षस आता और दूल्हे को मार डालता था. तब शीतला माता ने इस राक्षस से लोगों को मुक्ति दिलाई थी. कहा जाता हैं, कि मौत के वक्त बाबरा राक्षस ने शराब पीने की ईचछा जताई, लेकिन शीतला माता ने शराब की जगह राक्षस को पानी पिलाय़ा. तभी से ये परंपरा चली आ रही है.

पाली के शीतला मंदिर में बने इस छोटे से रहस्यमयी ओखली को लेकर इलाके के लोग भले ही लोक मान्यताओं के मुताबिक राक्षस से जोड़ रहे हैं, लेकिन इसका पानी आखिर जाता है ? इस रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है.