RISAT-2B: भारत ने अंतरिक्ष में छोड़ा ताकतवर रडार इमेजिंग निगरानी सैटलाइट, आतंकी नहीं कर पाएंगे घुसपैठ

RISAT-2B सैटेलाइट का इस्तेमाल किसी भी तरह के मौसम में टोही गतिविधियों, रणनीतिक निगरानियों और आपदा प्रबंधन में आसानी से किया जा सकेगा. रीसैट-2बी सैटेलाइट के साथ इसरो ने आकाशगंगा में सिंथेटिक अपर्चर रडार (सार) इमेजर भेजा गया है.

RISAT-2B: भारत ने अंतरिक्ष में छोड़ा ताकतवर रडार इमेजिंग निगरानी सैटलाइट, आतंकी नहीं कर पाएंगे घुसपैठ
फोटो साभार : ANI

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार (22 मई) को सुबह साढ़े 5 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से रडार इमेजिंग अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट यानी RISAT-2B को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है. इस सैटेलाइट के लॉन्च होने से भारत की खुफिया क्षमताएं और भी ज्यादा मजबूत होंगी. 615 किलोग्राम का यह सैटेलाइट आकाश में भारत की खुफिया क्षमताओं को दोगुना करने में कारगर साबित होगा. 

सिंथेटिक अपर्चर रडार (सार) इमेजर भी भेजा गया
RISAT-2B सैटेलाइट का इस्तेमाल किसी भी तरह के मौसम में टोही गतिविधियों, रणनीतिक निगरानियों और आपदा प्रबंधन में आसानी से किया जा सकेगा. रीसैट-2बी सैटेलाइट के साथ इसरो ने आकाशगंगा में सिंथेटिक अपर्चर रडार (सार) इमेजर भेजा गया है. इस सार से रीसैट-2बी सैटेलाइट की संचार सेवाएं निरंतर बनी रहेगी और ये वैज्ञानिकों को भारत की खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने में सक्षम होगा.

प्राकृतिक आपदाओं में करेगा मदद
इस सैटेलाइट की सबसे बड़ी खूबी यही माना जा रहा है कि यह प्राकृतिक आपदाओं में मदद करेगा. इस सैटेलाइट के जरिए अंतरिक्ष से जमीन पर 3 फीट की ऊंचाई तक की उम्दा तस्वीरें ली जा सकती हैं. बता दें कि 26/11 मुंबई हमले के बाद इस सीरीज के सैटेलाइट को सीमाओं की निगरानी और घुसपैठ रोकने के लिए विकसित किया गया था. 26/11 मुंबई हमले के बाद भारत नहीं चाहता की ऐसी कोई भी गलती हो, जिससे देश के नागरिकों की सुरक्षा खतरे में आए. 

आतंकी घुसपैठ को रोकने के साथ-साथ यह सैटेलाइट देश के नागरिकों की सुरक्षा के हित में काफी सहायक होगा. इसरो प्रमुख के शिवन ने मिशन को ‘‘बहुत बहुत महत्वपूर्ण’’ बताया लेकिन खुलकर जानकारी नहीं दी.

इससे पहले 1 अप्रैल को इसरो ने भारतीय रॉकेट पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस उपग्रह, एमिसैट का प्रक्षेपण किया था. एमीसैट उपग्रह का उद्देश्य विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम को मापना है. पीएसएलवी का भारत के दो अहम मिशनों 2008 में ‘‘चंद्रयान’’ और 2013 में मंगल ऑर्बिटर में इस्तेमाल किया गया था. यह जून 2017 तक 39 लगातार सफल प्रक्षेपणों के लिए इसरो का सबसे भरोसेमंद और बहु उपयोगी प्रक्षेपण यान है. 

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