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मुंबईः पांचवे दिन भी जारी रही बेस्ट बसों की हड़ताल, परिवार के साथ सड़क पर कर्मचारी

फंड़ की कमी मे परेशान बेस्ट को राहत मिले इसके साथ ही बेस्ट कर्मियों की मांग है कि विभाग में नए कर्मचारियों की भर्ती की जाए और उनका वेतन बढा़या जाए.

मुंबईः पांचवे दिन भी जारी रही बेस्ट बसों की हड़ताल, परिवार के साथ सड़क पर कर्मचारी
फाइल फोटो

मुंबई: मुंबई में शनिवार को भी बेस्ट बस कर्मियों की हड़ताल भी जारी रही. जिसके चलते मुंबई में यात्रियों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली बेस्ट बसों के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पूरी मुंबई अस्त-व्यस्त है. बता दें बेस्ट के कर्मचारियो की मांग है कि बेस्ट के बजट को बीएमसी के बजट मे शामिल किया जाए, जिससे उनके फंड़ की कमी मे परेशान बेस्ट को राहत मिले इसके साथ ही बेस्ट कर्मियों की मांग है कि विभाग में नए कर्मचारियों की भर्ती की जाए और उनका वेतन बढा़या जाए.

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बता दें मुंबई में बेस्ट कर्मियों की हड़ताल के चलते लाखों यात्रियों को ऑटोरिक्शा, टैक्सी का सहारा लेना पड़ रहा है. वहीं इतनी बड़ी संख्या में सेवा में लगाई गई निजी बसें यात्रियों को सेवा देने के लिए पर्याप्त नहीं साबित हो रही है. बेस्ट बसों की हड़ताल को देखते हुए अब लोगों की नजरें हड़ताल के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय में डाली गई याचिका पर केंद्रित है. बता दें बीएमसी शिव सेना शासित है. शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महापौर विश्वनाथ महादेश्वर, बीएमसी आयुक्त अजय मेहता और बेस्ट के महाप्रबंधक सुरेंद्र कुमार की उपस्थिति में बेस्ट के यूनियन नेताओं से कई चरणों में बात की, लेकिन इसके बाद भी हड़ताल खत्म नहीं हो पाई.

बेस्ट के पास हैं 33 हजार कर्मचारी
बेस्ट के कर्मचारियों की संख्या 33 हजार बताई जाती है जो बेस्ट की मांग से कही ज्यादा हैं. ऐसे में कमाई से ज्यादा खर्च हैं. इसके साथ ही बेस्ट के कर्मचारियों की काम को लेकर अन प्रोफेशनल होना यानि काम कम राजनीति ज्यादा है. बेस्ट के अधिकारियों का कहना है कि 10-15 प्रतिशत बेस्ट के कर्मचारी रोजाना काम पर ही नहीं आते ऐसे में आप समझ सकते हैं बेस्ट के कर्मचारी अपने काम को लेकर कितने गंभीर हैं.

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बेस्ट को लेकर कई सारे राजनीतिक फैसले किए गए जैसे, स्टूडेट के लिए आधा टिकट, बुजुर्गो के लिए कम दाम मे टिकट, महिलाओं के लिए अलग सेवा. ये सब ऐसे निर्णय थे जो बदहाली मे चल रहे बेस्ट को और बदहाल बनाने का काम किया. इसके साथ कुछ और भी कारण है जैसे कुछ इलाको में टैक्सी वालो ने लोकल सेवा देनी शूरु कर दी जैसे एक टैक्सी मे एक साथ 4 लोगों को बैठना और सभी से 10-15 रुपये लेना. क्योंकि टैक्सी या आटो जल्दी भरते है इसलिए लोगो को बेस्ट की जहग उसे तरजीह देना शूरु कर दिया. इसके अलावा बेस्ट की बसे अगर जाम में ज्यादा देर तक फंसी होती है जबकि टैक्सी या आटो जल्द निकल जाते है ये भी एक कारण है लोगो ने बेस्ट की जहग टैक्सी या आटो को चुना.