गुजरात: कम जुर्माने के बाद भी लोग नहीं मान रहे ट्रैफिक नियम, हेलमेट की जगह निकाला 'जुगाड़'

गुजरात सरकार (Gujarat Government) द्वारा 16 सितंबर से नए मोटर-व्हीकल एक्ट (New Motor Vehicle Act) को लागू किया गया. लेकिन, केंद्र-सरकार द्वारा जो कानून लाया गया था उसे उसी रूप में नहीं लागू कर जुर्माने (penalty) की रकम काफी कम रखी गई ताकि लोगों को कानून तोड़ने पर जुर्माना भरना भारी नहीं पड़े

गुजरात: कम जुर्माने के बाद भी लोग नहीं मान रहे ट्रैफिक नियम, हेलमेट की जगह निकाला 'जुगाड़'
कुछ लोगों ने हेलमेट की जगह अपने सर पर तपेला ही बांध लिया

अहमदाबाद: गुजरात सरकार (Gujarat Government) द्वारा 16 सितंबर से नए मोटर-व्हीकल एक्ट (New Motor Vehicle Act) को लागू किया गया. लेकिन, केंद्र-सरकार द्वारा जो कानून लाया गया था उसे उसी रूप में नहीं लागू कर जुर्माने (penalty) की रकम काफी कम रखी गई ताकि लोगों को कानून तोड़ने पर जुर्माना भरना भारी नहीं पड़े. गुजरात (Gujarat) पहला राज्य बना जिसने केंद्र द्वारा लाए गए मोटर-व्हीकल कानून में फेरबदल कर लागू किया और जुर्माने की रकम काफी कम कर दी. देखा गया है कि गुजरात में लोग ट्रैफिक नियमों (Traffic Rules) का बड़ी संख्या में उल्लंघन करते नजर आते हैं.

लोग ना चौराहे पर लगे ट्रैफिक सिग्नल (traffic signal) की परवाह करते हैं ना ही रॉन्ग साइड वाहन चलाने में जरा भी हिचकिचाते हैं. सीट बेल्ट (seat belt) लगाना, हेलमेट (helmet) पहनना या वाहन के सही पेपर रखना तो दूर की बात रही. गुजरात सरकार (Gujarat Government) द्वारा केंद्र सरकार के लाए गए मोटर-व्हीकल एक्ट के जुर्माने का 90 फीसदी तक जुर्माना (penalty) कम कर दिया गया उसके बाद भी यहां पर लोग नए ट्रैफिक नियमों (Traffic Rules) को लागू करने पर भारी विरोध करते नजर आ रहे हैं.

जैसे ही गुजरात सरकार (Gujarat Government) ने इस कानून को लागू किया कुछ लोग तुरंत ही इस कानून का विरोध करने सड़कों पर उतर आए और इसमें विपक्ष द्वारा भी ऐसे लोगों का जमकर साथ दिया जा रहा है. लेकिन सरकार ने इस कानून को लागू करने में अपने कदम पीछे नहीं हटाने की बात कही तब लोगों ने हेलमेट खरीदने, वाहनों के लिए PUC, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे जरुरी कागजात बनाने के लिए लाइन लगाना शुरू कर दिया और गुजरात (Gujarat) भर में वाहनों के कागजात बनाने और हेलमेट खरीदने के लिए लंबी-लंबी कतारें नजर आने लगीं. लेकिन, कुछ लोग इस कानून के लागू होने के बाद भी इस नए कानून को ठेंगा दिखाते नजर आए और सड़कों पर पहले जैसे ही दृश्य नजर आए. कोई मोटरसाइकिल पर ट्रिपल सीट लेकर चलता नजर आया तो कोई बिना हेलमेट (helmet) के दो-पहिया वाहन चलाता नजर आया. चार-पहिया वालों को सीटबेल्ट (seat belt) जैसे कोई बड़ा बंधन लग रहा था.

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कई लोग चौराहों तक बिना हेलमेट (helmet) के वाहन चलाते हुए नजर आए. लेकिन, जब ट्रैफिक पुलिस (Traffic Police) जवानों को देखा तो उल्टे पांव भागते नजर आए. कई ऐसे भी लोग थे जो कुछ खास दिमाग लगा रहे थे और दोपहिया वाहन को पुलिस को देखते ही हाथों से घसीटते नजर आए. कुछ हेलमेट नहीं पहनने के अजीबो-गरीब बहाने बनाते भी नजर आए. यहां तक तो ठीक था, लेकिन कुछ दिमागदार तो इनसे भी दो कदम आगे नजर आए और हेलमेट की जगह अपने सर पर तपेला ही बांध लिया, लगा कि हेलमेट (helmet) की खानापूर्ति हो गई और कानून का पालन कर लिया. अब इन्हें कौन समझाए कि कानून का पालन करने और अपनी खुद की सुरक्षा के लिए हेलमेट जरूरी है न कि खाना बनाने के लिए काम आने वाला तपेला.

लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए गुजरात सरकार (Gujarat Government) और पुलिस (Police) पूरी कोशिश कर रही है कि यह कानून आपको दण्डित करने या भारी जुर्माना (penalty) वसूल करने के लिए नहीं परन्तु आपकी सुरक्षा (security) के लिए सख्ती से लागू किया जा रहा है. अगर आपके पास आपकी सुरक्षा के सभी साधन साथ हैं और वाहन के सभी सही कागजात हैं तो इस कानून से डरने की कोई जरुरत नहीं है. लेकिन, जिसे विरोध ही करना हो तो उसे कौन समझाए कि यह लोगों की सुरक्षा और भलाई के लिए है. उन्हें तो बस अपनी विरोध की भूमिका अदा करनी है. इसी वजह से कुछ लोग इस कानून का विरोध करने के लिए झुण्ड में तपेले पहनकर साइकिल रैली (cycle rally) निकालते नजर आए और सरकार से इस नए कानून को वापस लेने की मांग करने लगे.

सरकार ने लोगों की समस्याओं को देखते हुए हेलमेट (helmet) पहनने के लिए एक महीने की सीमा बढ़ा दी है और PUC जैसे वाहनों के कागजात के लिए 15 दिन की सीमा बढ़ा दी है. लेकिन कुछ लोग अभी भी इस नए कानून के विरोध में लगे हैं. अगर गुजरात (Gujarat) राज्य की बात करें तो साल 2018 में रोड एक्सीडेंट (road accident) में 7974 लोगों की मौत (death) हो चुकी है जो कि ऑफिशियल आंकड़े हैं. लेकिन, कई एक्सीडेंट ऐसे हैं जिनका कोई डाटा नहीं है. गुजरात के अस्पतालों में हर 30 मिनिट में एक रोड एक्सीडेंट का केस आता है. यह आंकड़े काफी हैं यह बताने के लिए कि सिर्फ खुद की लापरवाही के कारण लोग इतनी बड़ी संख्या में बिना कारण अपनी जान गवां बैठते हैं. सिर्फ लोगों को यह समझने की जरुरत है कि जो ट्रैफिक कानून (Traffic Rules) लाया गया है वो सरकारी फरमान नहीं परन्तु हमारी सुरक्षा (security) के लिए बनाया गया है तो कई परिवार उजड़ने से बच जाएंगे.