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शिवसेना ने सामना में लिखा, 'कुलभूषण जाधव को छुड़ाओ, यही पुरुषार्थ होगा'

'अभिनंदन की सही-सलामत वापसी हो गई इसकी खुशी है. लेकिन कुलभूषण जाधव को छुड़वाकर सही-सलामत मातृभूमि में लाना ही सरकार का असली पुरुषार्थ होगा. यदि मोदी और शाह ने ठान लिया तो क्या मुश्किल है?'

शिवसेना ने सामना में लिखा, 'कुलभूषण जाधव को छुड़ाओ, यही पुरुषार्थ होगा'

मुंबईः शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है कि पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए भारतीय कुलभूषण जाधव को लाने के लिए बल प्रयोग करना पड़े तो उसमें भी पीछे ना हटने की बात कही हैं. सामना में लिखा हैं, 'हमारी सरकार जाधव के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है. लेकिन ‘लातों के भूत बातों से नहीं मानते’, पाकिस्तान के बारे में यही सच है. पुलवामा हमले के बाद हिंदुस्तानी वायुसेना ने पाकिस्तान में घुसकर वहां के आतंकी ठिकानों पर हमले किए. हमारी वायुसेना का वीर अभिनंदन पाकिस्तानियों के हाथ लग गया लेकिन अंतर्राष्ट्रीय दबाव के परिणाम और मोदी सरकार के डर के कारण पाकिस्तानियों ने अभिनंदन को छोड़ दिया. ऐसा भाग्य कुलभूषण जाधव और उनके परिवार को भी क्यों न मिले?'

लेख में आगे लिखा है, 'जाधव भारतीय नौसेना के निवृत्त अधिकारी हैं. उन्होंने देशसेवा की है और हिंदुस्तान के बेटे के रूप में ही पाकिस्तान उन्हें पकड़कर एक प्रकार की ज्यादती कर रहा है. अभिनंदन की सही-सलामत वापसी हो गई इसकी खुशी है. लेकिन कुलभूषण जाधव को छुड़वाकर सही-सलामत मातृभूमि में लाना ही सरकार का असली पुरुषार्थ होगा. यदि मोदी और शाह ने ठान लिया तो क्या मुश्किल है? जाधव की मुक्ति के लिए हमें बलप्रयोग करना पड़ेगा, हम इतना ही कह सकते हैं.'

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शिवसेना ने लिखा है, 'धारा-137 के अनुसार जाधव को पाकिस्तानी सेना की अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द करने की मांग ‘हेग’ न्यायालय ने खारिज कर दी. जाधव को तुरंत छोड़ दिया जाए और सुरक्षित रूप से हिंदुस्तान भेजे जाने की मांग भी स्वीकार नहीं हुई. हेग न्यायालय ने एक संतुलित निर्णय देने का प्रयास किया लेकिन क्या पाकिस्तानी इस निर्णय को मानेंगे? पाकिस्तान में नागरी कानून का शासन नहीं है. वहां एक तो सेना का कानून चलता है या आतंकवादियों का हम करें सो कानून चलता है. पाकिस्तान की दृष्टि से कुलभूषण जाधव शत्रु राष्ट्र हिंदुस्तान के ‘एजेंट’ हैं और पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने आए थे.'

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लेख में आगे लिखा है, 'जाधव पर लगाए गए ये आरोप पाकिस्तान के लिए आसान हैं. आज तक जाधव की तरह कई लोगों को हिंदुस्तान का ‘जासूस’ साबित करके सजा सुनाई गई है. सरबजीत प्रकरण तो जगजाहिर है. जाधव का मामला सामने आया है लेकिन जाधव की तरह कई लोग पाकिस्तान की जेलों में सड़ रहे हैं और कितने लोगों को मारा जा चुका है ये कहा नहीं जा सकता.

पाकिस्तान में कोई कानून न होने के कारण वहां सीधे-सीधे मानवाधिकार का उल्लंघन होता रहता है. सेना के मार्शल लॉ और आतंकवादियों के इस्लाम लॉ के कारण पाकिस्तान नर्क बन चुका है. उस नर्क से कुलभूषण जाधव को हिंदुस्तान वैसे बाहर निकालेगा?'

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शिवसेना का कहना है, 'जाधव ये कोई कसाब या हाफिज सईद नहीं है. हाफिज को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया जा चुका है. यह यूनो की सुरक्षा परिषद का निर्णय है. वहीं जाधव को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ा है और आतंकवादी घोषित किया है, ये फर्क है. पाकिस्तान की सेना अपने ही देश के प्रधानमंत्री को फांसी पर लटका देती है. बेनजीर भुट्टो की भी हत्या कर दी गई. हत्या, अपहरण और लूटमार पाकिस्तानी सेना का धंधा है. अगर जाधव को छोड़ने के लिए पाकिस्तानी सेना फिरौती मांगे तो भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए.'