अलग रह रहे दंपत्ति को साथ रहने का आदेश देने के कोर्ट के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
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अलग रह रहे दंपत्ति को साथ रहने का आदेश देने के कोर्ट के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

लॉ स्टूडेंट्स ने व्यक्ति के निजता के अधिकार के तहत इस व्यवस्था को चुनौती दी है.

लॉ स्टूडेंट्स की ओर से दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली : अलग रह रहे दंपत्ति को एक साथ रहने का आदेश देने के कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्रों की ओर से दी दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि अगर पति पत्नी का अलग रहना तलाक का आधार हो सकता है लेकिन किसी को साथ रहने को मजबूर नहीं किया जा सकता. लॉ स्टूडेंट्स ने व्यक्ति के निजता के अधिकार के तहत इस व्यवस्था को चुनौती दी है.

याचिका में कहा गया है कि व्यविचार से संबंधित कानून को खारिज़ करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शादी करने के बाद महिला का निजता और गरिमा का अधिकार खत्म नही होता ऐसे में किसी को भी साथ रहने के लिए बाध्य माही कोय जा सकता. 

सुनवाई के लिए तैयार है सुप्रीम कोर्ट
लॉ स्टूडेंट्स की ओर से दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार है. कोर्ट ने इस मामले पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने को है. उल्लेखनीय है कि हिंदू/स्पेशल मैरिज एक्ट में जज को रेस्टीट्यूशन ऑफ कॉन्ज्यूगल राइट्स का आदेश का अधिकार है.

क्या कहता है हिंदू मैरिज एक्ट
हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 9 और स्पेशल मैरिज एक्ट के सेक्शन 22 के तहत पति या पत्नी रेस्टीट्यूशन ऑफ कॉन्ज्यूगल राइट्स के तहत कोर्ट में घसीट सकता है.

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