ZEE जानकारी: डिप्रेशन को मात देकर जिंदगी बनाएं खुशहाल, अपनाएं ये तरीका

 सिर्फ Facebook पर आभासी दोस्त नहीं..बल्कि असल जिंदगी में असली दोस्त बनाइए..परिवार के साथ समय बिताइए और Meditation और Exercise करके..

ZEE जानकारी: डिप्रेशन को मात देकर जिंदगी बनाएं खुशहाल, अपनाएं ये तरीका

मशहूर शायर. शहरयार के एक मशहूर फिल्मी गीत की कुछ पंक्तियां हैं. जिसमें वो कहते हैं

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है

इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है .

ये गीत. वर्ष 1978 में आई हिंदी फिल्म गमन का है. लेकिन इसके शब्द आज के भारत पर ज्यादा फिट बैठते हैं. भारत की एक बड़ी आबादी सीने में जलन यानी क्रोध और आंखों में तूफान. यानी असंतोष लेकर घूम रही है. और देश का लगभग हर इंसान परेशान सा दिखने लगा है. इस परेशानी की वजह सिर्फ इतनी है कि हम संपन्न तो हो गए हैं. लेकिन संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं. हमारे काम करने की गति तो बढ़ रही है..लेकिन इसी गति की वजह से लोग समय से पहले चुक रहे हैं . अगर आप भी जीवन के सफर में चुक जाने से बचना चाहते हैं तो आज आपको इसके समाधानों पर भी गौर करना चाहिए .

पहला समाधान तो यही है कि अपनी मानसिक समस्या को नज़रअंदाज़ मत कीजिए . इसके बारे में बात कीजिए और जितना जल्दी हो सके..इसका इलाज कराइए . दूसरा समाधान ये है कि हमें मानसिक रोगों को शारीरक समस्याओं से अलग मानकर देखना. बंद करना होगा. ये पूरी तरह से एक बीमारी है और जब तक कोई व्यक्ति या उसका परिवार इस बीमारी को स्वीकार नहीं करता. तो इसका इलाज भी नहीं हो सकता है.

तीसरी बात ये है कि आपको Burn-Out जैसी समस्याओं से बचने के लिए काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन साधना होगा. इसलिए काम के वक्त आप काम करें. और घर जाकर पूरा समय खुद को या फिर अपने परिवार को दें.

और चौथी अहम बात ये है कि अकेलेपन की समस्या को पहचानना सीखें. आज के दौर में हम दिन भर लोगों से घिरे रहते हैं..लेकिन फिर भी एक बड़ी आबादी अकेलेपन का शिकार हो रही है. ये अकेलापन ना सिर्फ आपको डिप्रेशन का शिकार बनाता है..बल्कि ये आपको दिल से जुड़ी बीमारियां भी दे सकता है. और इसकी वजह से आपकी समय से पहले मौत भी हो सकती है. वैज्ञानिक अकेलेपन को धूम्रपान जितना ही खतरनाक मानते हैं .

इसलिए सिर्फ Facebook पर आभासी दोस्त नहीं..बल्कि असल जिंदगी में असली दोस्त बनाइए..परिवार के साथ समय बिताइए और Meditation और Exercise करके..खुद को खुश रखिए .लेकिन यहां आपको अकेले रहने और एकांत में रहने का फर्क भी समझना होगा . अकेलापन वो होता है जब आप किसी दूसरे की याद में खोए रहते हैं यानी उसे Miss करते हैं...जबकि एकांत में रहने का मतलब है..अपने साथ वक्त बिताना और अपने ऊपर काम करना . अकेलापन..पीड़ादायी अनुभव है और एकांत में रहना बहुत सुखदायी और आनंद से भरा हुआ अनुभव है .

और आखिर में आपको एक वीडियो के ज़रिए ये समझना चाहिए कि आप अपने आसपास किसी Depressed, यानी अवसाद-ग्रस्त व्यक्ति की पहचान कैसे कर सकते हैं . आप ये वीडियो देखिए फिर हम आपको बताएंगे कि आप डिप्रेशन और Anxiety से पीड़ित व्यक्ति की मदद कैसे कर सकते हैं .

अब आप इस वीडियो का दूसरा हिस्सा देखिए..इससे आप ये जान पाएंगे कि डिप्रेशन झेल रहे दूसरे लोगों को आपके कुछ शब्द कैसे राहत दे सकते हैं .लेकिन कुल मिलाकर बात ये है कि दूसरों को खुशी देने से पहले..आपको अपनी खुशी पर विचार करना होगा . क्योंकि जो व्यक्ति खुद को खुश नहीं रख सकता..वो व्यक्ति जब दूसरों को खुशियां देने का प्रयास करता है..तो उस प्रयास में मजबूरी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है . और मजबूरियां असली खुशियों से दूरियां बढ़ा देती हैं .