बंगाल की वह सीट जो ममता की सियासत, TMC के आंतरिक तानेबाने को कर सकती है प्रभावित

राज्य के विपक्षी दलों ने दावा किया कि इस सीट के परिणाम को खुद तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के पक्ष में या विरोध में ‘जनता का फैसला’ माना जाएगा.

बंगाल की वह सीट जो ममता की सियासत, TMC के आंतरिक तानेबाने को कर सकती है प्रभावित

डायमंड हार्बर (पश्चिम बंगाल): तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव वाली डायमंड हार्बर सीट पर इस बार (lok sabha elections 2019) पार्टी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी फिर सांसद बनने की जुगत में लगे हैं. इस सीट का परिणाम पार्टी के आंतरिक तानेबाने और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर असर डाल सकता है. राज्य के विपक्षी दलों ने दावा किया कि इस सीट के परिणाम को खुद तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के पक्ष में या विरोध में ‘जनता का फैसला’ माना जाएगा.

2009 से तृणमूल का कब्‍जा
दक्षिण 24 परगना जिले में हुगली नदी के किनारे स्थित यह लोकसभा क्षेत्र 60 के दशक से वाम का गढ़ था लेकिन बदलाव की बयार के साथ प्रदेश में आई तृणमूल कांग्रेस ने 2009 में इस सीट को कम्युनिस्टों से छीन लिया और पार्टी के सोमेन मित्रा ने चार बार के वामपंथी सांसद समिक लाहिरी को शिकस्त दी. बाद में मित्रा ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी और 2014 में कांग्रेस में शामिल हो गये. अब वह प्रदेश इकाई के अध्यक्ष हैं.

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तृणमूल युवक कांग्रेस के अध्यक्ष अभिषेक बनर्जी को राजनीति में पदार्पण के तीन साल बाद ही 2014 में इस सीट से टिकट दिया गया और 40 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर उन्होंने जीत हासिल की. तब से अभिषेक का कद पार्टी में बढ़ता जा रहा है और उन्हें पार्टी में ममता के बाद नंबर दो माना जाता है. इससे विपक्षियों के साथ ही पार्टी के कुछ दिग्गज नेता भी खुश नहीं लगते जो पार्टी के भीतर अलग-थलग महसूस करते हैं. ऐसे ही एक नेता मुकुल रॉय हैं जिनका ग्राफ अभिषेक के उत्थान के साथ नीचे आ रहा था. उन्होंने 2017 में पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया.

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पार्टी का आंतरिक घमासान
अब स्थिति पांच साल पहले से अलग है. डायमंड हार्बर पर मुख्यमंत्री के भतीजे को भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है. पार्टी का आंतरिक घमासान भी सामने आ रहा है. तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने नाम नहीं जाहिर होने की शर्त पर कहा कि अभिषेक बनर्जी की जीत तो पहले से पक्की है लेकिन पार्टी के सामने चिंता की बात है जीत का अंतर.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डायमंड हार्बर में प्रचार के दौरान कहा था कि इस चुनाव में अभिषेक की हार होगी और नतीजे आने के बाद उनका दफ्तर बंद हो जाएगा. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि ये चुनाव साबित करेंगे कि अभिषेक बनर्जी वास्तविक नेता हैं या नहीं. उनकी जीत ममता की जीत और उनकी हार ममता की हार होगी.

भाजपा ने इस सीट से नीलांजन रॉय को उतारा है जिन पर पश्चिम बंगाल के फाल्टा में एक घर में कथित तौर पर एक बच्ची के यौन शोषण के लिए पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने इस आरोप को तृणमूल कांग्रेस की उनकी छवि बिगाड़ने की साजिश करार देते हुए कहा, ‘‘इस इलाके में लोग तृणमूल कांग्रेस से परेशान हो गये हैं. वे इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को हराकर उन्हें सबक सिखाएंगे.’’

(इनपुट: एजेंसी भाषा)