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Lok Sabha Election result 2019: मोदी सरकार की जमकर बुराई करने वाली महबूबा की PDP को करारी शिकस्‍त, खाता खोलने को भी तरसी

लोकसभा चुनाव 2019 में महबूबा मुफ्ती न केवल खुद चुनाव हार गई, बल्कि उनकी पार्टी पीडीपी घाटी में एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी. वहीं, फारुख अब्‍दुल्‍ला की नेशनल कांफ्रेंस ने जम्‍मू और कश्‍मीर की सियासत में एक बार फिर वापसी की है.

Lok Sabha Election result 2019: मोदी सरकार की जमकर बुराई करने वाली महबूबा की PDP को करारी शिकस्‍त, खाता खोलने को भी तरसी
जम्‍मू और कश्‍मीर की इन तीनों सीटों पर विपक्ष की घेरेबंदी नाकाम रही और बीजेपी तीनों सीटों को भारी अंतर से जीतने में सफल रही. (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: जम्‍मू और कश्‍मीर में आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की कार्रवाई की खिलाफत करने वाली पीपुल्‍स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की मुखिया महबूबा मुफ्ती सियासी अखाड़े में चारों खाने चित्‍त हो गई हैं. घाटी में बालाकोट बनाम 35ए पर जुबानी जंग और पत्‍थरबाजों की मोहब्‍बत भी महबूबा मुफ्ती को संसद की दहलीज तक पहुंचाने में नाकाम रही. लोकसभा चुनाव 2019 में महबूबा मुफ्ती न केवल खुद चुनाव हार गई, बल्कि उनकी पार्टी पीडीपी घाटी में एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी.

वहीं, घाटी में सैन्‍य कार्रवाई, अलगाववाद और आतंकवाद के मुद्दे पर फारुख अब्‍दुल्‍ला की नेशनल कांफ्रेंस ने जम्‍मू और कश्‍मीर की सियासत में एक बार फिर वापसी की है. इस बार फारुख अब्‍दुल्‍ला न केवल खुद श्रीनगर से चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं, बल्कि उनकी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के उम्‍मीदवार अनंतनाग और बारामूला से चुनाव जीतकर संसद तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं. इसके विपरीत, बीजेपी ने लगभग इन्‍हीं मुद्दों के दूसरे पहलू पर जम्‍मू और कश्‍मीर की जम्‍मू, ऊधमपुर और लद्दाख सीट पर जीत दर्ज की है. 

जिन पत्‍थरबाजों के चलते गई सत्‍ता, चुनाव में वही हुए बेगाने 
जम्‍मू और कश्‍मीर विधानसभा के लिए 2014 में चुनाव के बाद पीडीपी ने बीजेपी के साथ मिलकर रियासत की सरकार बनाई थी. सरकार बनने के ठीक बाद, घाटी में फैले आतंकवाद को लगाम कसने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व वाली केंद्र सरकार ने कश्‍मीर में ऑपरेशन ऑल आउट चलाया था. गठबंधन के चलते रियासत की मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ऊपर से इस ऑपरेशन का साथ दे रहीं थीं, लेकिन भीतर से वह अर्धसैनिक बलों पर पत्‍थर फेंकने वालों के साथ खड़ी थी.

इन्‍हीं पत्‍थरबाजों से हमदर्दी के चलते महबूबा मुफ्ती को अपनी सरकार तक गंवानी पड़ी. सरकार जाने के बाद पत्‍थरबाजों से हमदर्दी को महबूबा मुफ्ती ने न केवल अपना सियासी हथियार बनाया, बल्कि ऑपरेशन ऑल आउट में मारे गए आतंकियों के घर जाकर उन्‍होंने अलगाववाद का समर्थन करने वालों लोगों का भरोसा जीतना चाहा. हालांकि यह बात दीगर है कि महबूबा मुफ्ती की यह सियासी चाल काम नहीं आई और लोकसभा चुनाव 2019 में उन्‍हें घाटी की तीनों सीटों से हाथ धोना पड़ा.

महबूबा मुफ्ती को भरोसा था कि पत्‍थरबाजों और आतंकियों से हमदर्दी की सियासत उन्‍हें संसद तक पहुंचाएगी, लेकिन मतदान के दौरान वहीं पत्‍थरबाज बेगाने बन नेशनल कांफ्रेंस के साथ आ खड़े हुए. जिसका नतीजा लोकसभा चुनाव परिणाम 2019 में साफ नजर आ गया.

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जम्‍मू और कश्‍मीर में विपक्ष का एक भी नहीं आया काम
जम्‍मू और कश्‍मीर की छह संसदीय सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस ने दोहरी रणनीति बनाई थी. पहली रणनीति में उन तीन संसदीय सीटों को शामिल किया गया था, जिसमें बीजेपी का असर बेहद सीमित है. इन तीनों सीटों में श्रीनगर, बारामूला और अनंतनाग शामिल हैं. इन सीटों पर चूंकि बीजेपी की चुनौती नहीं थी, लिहाजा नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और इंडियन नेशनल कांग्रेस आपस में प्रतिद्वंदी की तरह चुनाव लड़ रही थी. पीडीपी जहां इन तीनों सीटों पर अपना प्रभुत्‍व कामय रखने के लिए चुनाव लड़ रही थी, वहीं नेशनल कांफ्रेंस अपनी खोई हुई चुनावी विरासत को एक बार फिर पाना चाहती थी.

वहीं, जम्‍मू और कश्‍मीर की बाकी बची तीन सीटों के लिए इन राजनैतिक पार्टियों ने अपनी अलग रणनीति बनाई थी. चूंकि लोकसभा चुनाव 2014 में जम्‍मू, ऊधमपुर और लद्दाख से बीजेपी ने जीत दर्ज की थी, लिहाजा पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस ने इन तीनों सीटों पर कांग्रेस को आगे कर अपना उम्‍मीदवार न खड़ा करने का फैसला किया था. पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस किसी भी कीमत में इन तीनों सीटों पर बीजेपी को जीतता नहीं देखना चाहती थी. हालांकि यह बात अलग है कि तीनों सीटों पर विपक्ष का यह अनूठा गठबंधन काम नहीं आया और बीजेपी ने सभी राजनैतिक समीकरणों को ध्‍वस्‍त कर अपनी जीत सुनिश्चित करने में सफल रही. 

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BJP से दोस्‍ती और दुश्‍मनी को खेल महबूबा का पड़ा भारी
जम्‍मू और कश्‍मीर की सत्‍ता का हासिल करने के लिए पीडीपी की महबूबा मुफ्ती ने पहले बीजेपी से दोस्‍ती की, फिर घाटी में अमन के दुश्‍मनों का साथ देने के लिए बीजेपी से दुश्‍मनी कर ली. महबूबा मुफ्ती का यही दोस्‍ती और दुश्‍मनी का खेल महबूबा मुफ्ती के लिए भारी पड़ गया. इस चुनाव में महबूबा खुद अनंतनाग से चुनाव लड़ रही थी. बीते लोकसभा चुनाव 2014 में इसी सीट से महबूबा मुफ्ती ने भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की थी. उन्‍हें भरोसा था कि घाटी की जनता उसकी बातों में फंसकर एक बार फिर उनको वोट देगी.

लेकिन, ऐसा नहीं हुआ. महबूबा मुफ्ती के‍ सियासी कदमों और अवसरवादिता को देखते हुए लोगों ने उनको नकारने का फैसला कर लिया. महबूबा मुफ्ती लोकसभा चुनाव परिणाम 2019 में तीसरे पायदान पर रहीं. उनको नेशनल कांफ्रेंस के हसनैन मसूदी ने 9830 वोटों के अंतर से शिकस्‍त दी. इस सीट पर दूसरे पायदान पर कांग्रेस के गुलाम अहमद मीर रहे. वहीं, बारामूला सीट पर नेशनल कांफ्रेंस के मोहम्‍मद अकबर लोन ने पीडीपी के अब्‍दुल कयूम वानी को करीब 80 हजार वोटों के अंतर से शिकस्‍त दी.

श्रीनगर सीट पर नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्‍दुल्‍ला ने पीडीपी के आगा सैयद मोहसिन को करीब 70 हजार वोटों से सियासी पटखनी दी. इस चुनाव में पीडीपी अपनी सियासी जमीन बचाने में नाकामयाब रही और नेशनल कांफ्रेंस ने अपनी खोई राजनैतिक विरासत को दोबारा हासिल कर लिया. 

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केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह ने दर्ज की 3.52 लाख वोटों के अंतर से जीत
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले जिस तरह विपक्ष ने जम्‍मू कश्‍मीर की तीन सीटों पर घेरेबंदी की थी, उसे देखकर  कहा जाने लगा था कि इस बार बीजेपी के लिए सीट जीतना नामु‍मकिन सा है. कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह को शिकस्‍त देने के लिए राजपरिवार का सहारा लिया. कांग्रेस ने राजा कर्ण सिंह के बेटे विक्रमादित्‍य सिंह को अपना उम्‍मीदवार बनाया. वहीं जम्‍मू से बीजेपी के जुगल किशोर शर्मा के खिलाफ कांग्रेस ने रमन भल्‍ला को अपना उम्‍मीदवार बनाया.

इसी तरह, लद्दाख में बीजेपी के नए प्रत्‍याशी जमयांग छेरिंग के खिलाफ रिगज़िन स्पलबार को अपना उम्‍मीदवार बनाया. जम्‍मू और कश्‍मीर की इन तीनों सीटों पर विपक्ष की घेरेबंदी नाकाम रही और बीजेपी तीनों सीटों को भारी अंतर से जीतने में सफल रही.