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अगर PM मोदी का लहराया परचम, ये नेता सोचेंगे- 'सही टाइम पर जली दिमाग की बत्ती, वरना...'

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok sabha elections 2019) में आज रिजल्ट (Lok sabha election results 2019) आ जाएगा. करीब 12 एक्जिट पोल (EXIT POLL) के अनुमान में बीजेपी नीत एनडीए दोबारा से सत्ता में आती दिख रही है. अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए (NDA) जीतता है तो इसके दो प्रमुख घटक दलों के नेताओं के लिए यही कहा जाएगा कि उन्होंने सही समय पर सही फैसला लिया.

अगर PM मोदी का लहराया परचम, ये नेता सोचेंगे- 'सही टाइम पर जली दिमाग की बत्ती, वरना...'
Lok sabha election results 2019 : इस बार एनडीए के नेताओं ने काफी एकजुटता दिखाई है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok sabha elections 2019) में आज रिजल्ट (Lok sabha election results 2019) आ जाएगा. करीब 12 एक्जिट पोल (EXIT POLL) के अनुमान में बीजेपी नीत एनडीए दोबारा से सत्ता में आती दिख रही है. अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए (NDA) जीतता है तो इसके दो प्रमुख घटक दलों के नेताओं के लिए यही कहा जाएगा कि उन्होंने सही समय पर सही फैसला लिया.

उद्धव ठाकरे: पूरे पांच साल तक शिवसेना केंद्र और महाराष्ट्र सरकार में हिस्सेदार रही, लेकिन खुले तौर से बीजेपी पर हमला करना बंद नहीं किया. कई ऐसे मौके आए जब शिवसेना और बीजेपी के नेताओं के बीच काफी तल्ख रिश्ते हो गए. लोकसभा चुनाव (Lok sabha Chunav) से एक साल पहले ही शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने ऐलान कर दिया था कि उनकी पार्टी बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेगी. पालघर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में दोनों दलों ने पूरे दमखम से एक दूसरे के खिलाफ लड़े. 

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अयोध्या पहुंचे और राम मंदिर निर्माण में देरी पर बीजेपी की सरकार पर काफी हमले किए. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे नरम पड़ गए. अमित शाह के साथ मुलाकात के बाद दोनों दलों ने एक बार फिर से साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया. राजनीति के जानकार मानते हैं कि शिवसेना ने जनता का मूड भांपकर एनडीए में बने रहने का फैसला किया. ऐसे में अगर पीएम मोदी की अगुवाई में एनडीए जीतता है तो शिवसेना के नेता यही कहेंगे कि समय रहते उन्होंने सही फैसला लिया था.

रामविलास पासवान: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok sabha elections 2019) को लेकर बिहार में जब एनडीए के नेताओं के बीच सीटों के बंटवारे की बात आई तो रामविलास पासवान की पार्टी लोकजनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने आंखें दिखानी शुरू कर दी थी. लोजपा सांसद और रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने पत्रकारों से बातचीत में यहां तक कह दिया था कि अगर उन्हें गठबंधन में सम्मान नहीं मिला तो उनकी पार्टी कोई और फैसला लेने पर विचार कर सकती है. हालांकि अमित शाह लोजपा के नेताओं को समझाने में सफल रहे. 

रामविलास को राज्यसभा सीट के साथ लोकसभा की सम्मानजनक सीटें दे दी गईं. अगर खुदा ना खास्ते रामविलास पासवान एनडीए से अलग हो जाते तो शायद उन्हें पछतावा होता. यहां आपको बता दें कि रामविलास पासवान राजनीति के सबसे अच्छे मौसम वैज्ञानिक माने जाते हैं. लंबे राजनीतिक सफर में केवल 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जिस गठबधंन का साथ दिया वह हार गई थी, वरना वह हर सरकारों में मंत्री पद पाते रहे हैं.

लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे के समय एनडीए के शिवसेना और लोजपा ही दो ऐसे घटक दल थे जिन्होंने सबसे ज्यादा खींचतान दिखाई थी. हालांकि समय रहते इन्होंने एनडीए में बने रहने का फैसला लिया. अगर चुनाव रिजल्ट (Chunav result 2019) एनडीए के पक्ष में आता है तो इन दोनों दलों के नेता खासे खुश होंगे.