प्रियंका के आरोप पर स्मृति ईरानी का पलटवार, कहा- मैं एक्टर रही हूं, वो नाटक न करें

प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि अमेठी लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को नीचा दिखाने के लिये यहां लोगों को जूते बांटकर अमेठी का अपमान किया है. 

प्रियंका के आरोप पर स्मृति ईरानी का पलटवार, कहा- मैं एक्टर रही हूं, वो नाटक न करें
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि स्मृति जनता से झूठ कह रही हैं कि राहुल अमेठी नहीं आते.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) का सियासी रण अपने चरम पर है. इस दौरान नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति का दौर भी चल निकला है. इसी कड़ी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर अमेठी में जूते बांटने का आरोप लगाया. इस पर पलटवार करते हुए अमेठी से प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने कहा कि एक्टर मैं रह चुकी हूं तो प्रियंका एक्टिंग न करें तो बेहतर है. जहां तक बात उन गरीब नागरिकों की है जिनके पहनने को जूता नही था तो कृपा कर अगर उनमें (प्रियंका गांधी) थोड़ी भी शर्म हो तो खुद जाकर देख लें कि सच क्या है.

 

 

इससे पहले प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को कहा कि अमेठी लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को नीचा दिखाने के लिये यहां लोगों को जूते बांटकर अमेठी का अपमान किया है. प्रियंका ने अमेठी में एक नुक्कड़ सभा में कहा कि स्मृति जनता से झूठ कह रही हैं कि राहुल अमेठी नहीं आते. यहां के लोगों को सच्चाई पता है. जनता यह भी जानती है कि किसके दिल में अमेठी है और किसके दिल में नहीं.

 

 

प्रियंका ने कहा कि स्मृति ईरानी ने लोगों को जूते बांटे, यह कहने के लिए कि अमेठी के लोगों के पास जूते भी नहीं हैं पहनने के लिए. वह सोच रही हैं कि ऐसा करके वह राहुल जी का अपमान कर रही हैं. सच तो यह है कि वह अमेठी का अपमान कर रही हैं. अमेठी और रायबरेली की जनता ने कभी किसी से भीख नहीं मांगी.' प्रियंका ने कहा 'आप इनको सिखाइये कि अमेठी और रायबरेली के लोग अपना सम्मान करते हैं, किसी के सामने भीख नहीं मांगते. भीख मांगना है तो वो लोग खुद आपसे वोटों की भीख मांगें.'

स्मृति ईरानी ने हाल में अमेठी के गौरीगंज क्षेत्र में एक जनसभा में कथित तौर पर कहा था कि बरौलिया गांव के प्रधान जब उनसे मिलने के लिये दिल्ली गए थे तो उनके पैरों में ठीक से चप्पल भी नहीं थी. ‘तब मैंने उसकी व्यवस्था करायी थी और गांव के विकास के लिये 16 करोड़ रुपये दिलवाये थे.’