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पहले मां को खोया, फिर पेट पालने के लिए 12 साल की बच्ची पहुंच गई जेल, गुनाह जानकर रो पड़ेंगे आप

बालिका के बाल सुधार गृह जाने के बाद उसके आठ वर्षीय भाई और छह वर्षीय बहन मायूस हैं. बालिका सहित इन भाई बहनों के सिर से मां का साया भी उठ चुका है.

पहले मां को खोया, फिर पेट पालने के लिए 12 साल की बच्ची पहुंच गई जेल, गुनाह जानकर रो पड़ेंगे आप
.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

सागर: टिकीटोरिया मंदिर में हुई चोरी के मामले में पुलिस ने बारह वर्षीय बालिका को गिरफ्तार कर किशोर न्यायालय में पेश किया. जहां से उसे बाल सुधार गृह शहडोल में भेज दिया गया. बालिका ने महज दस किलो गेंहू खरीदने के लिए मंदिर की दानपेटी से ढाई सौ रूपए निकाले थे. बालिका के बाल सुधार गृह जाने के बाद उसके आठ वर्षीय भाई और छह वर्षीय बहन मायूस हैं. बालिका सहित इन भाई बहनों के सिर से मां का साया भी उठ चुका है. ऐसे में बहन की आंखों में ही ममता दिखती थी.

रहली नगर की बाहरी सीमा स्थित साढ़े चार सौ फीट उंची पहाड़ी पर विगत शनिवार को दान पेटी से रुपये निकाले जाने का मामला सामने आने पर मंदिर प्रबंधन की रिपोर्ट पर पुलिस थाने में चोरी का मामला दर्ज कराया गया था. मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे के आधार पर पुलिस ने बारह वर्षीय किशोरी से पूछताछ की.

किशोरी ने दान पेटी से रुपये निकाले जाना कबूल किया. जब बालिका के पिता ने किशोरी का स्कूल बेग देखा तो इसमें सत्तर रुपये निकले और किशोरी ने एक सौ अस्सी के दस किलो गेहूं घर में लाए गए थे. किशोरी ने अपने पिता को बताया था कि मंदिर की पेटी से मैंने सौ रुपये का एक नोट तथा एक सौ पचास रूप्ए के सिक्के निकाले थे.

वो भी इसलिए कि किशोरी गेहूं पिसाने गई थी. आटा चक्की पर उसके दस किलो गेहूं गुम हो गए. घर मे पिता गुस्सा न हो तो उसने गेहूं या आटा चक्की पर ही रखे होने की बात कहकर टाल दी लेकिन दूसरे दिन गेहूं खरीदने के लिए पैसे जुटाने की सोची और बिना चप्पल के पैदल ही मंदिर पहुंच गई. जहां पर उसने मौका देखकर मंदिर की दानपेटी से कुल ढाई सौ रूपए निकाल लिए. जिसमें से 180 रूप्ए के गेहूं खरीदकर बाकी 70 रूपए स्कूल बैग में रख लिए. 

यह है परिवार की हालत
कक्षा सातवीं में पढ़ने वाली बारह वर्षीय किशोरी पर भले ही परिवार के भरण पोषण का जिम्मा न हो लेकिन चार सदस्यीय परिवार के भोजन बनाने का जिम्मा तीन साल से है. दरअसल तीन साल पहले प्रसव के दौरान किशोरी की मां का निधन हो गया था. जिसके बाद से पिता के उपर खाना बनाने का जिम्मा आ गया.

आठ वर्षीय भाई और छह वर्षीय बहिन किशोरी से ही खाने को मांगते हैं. किशोरी के पिता बताते हैं कि सब्जी मै बनाता हूं उससे अभी ठीक से रोटी बनाते तो नहीं बनती लेकिन खाने लायक रोटी बना देती है. गरीब परिवार की किशोरी जिस प्रकार के मकान में रहती है उससे अच्छी जगह तो मवेशियों के रहने की होती है.

जिसमें किशोरी अपने भाई बहन और पिता के साथ हंसती खेलती रहती थी लेकिन अचानक आई परिस्थिति के कारण छोटे भाई बहन मां समान बड़ी बहन दूर होने से दोनों मायूस हैं. हालांकि किशोरी की इस प्रकार की परिस्थिति सामने से आने से कई लोगों ने मदद की बात कही है.