रुपये खर्च किए 1 करोड़ 52 लाख; चूहे मारे 5457, फिर भी रेलवे ने कहा- हम संतुष्ट हैं

मुंबई के पश्चिम रेलवे ने मुंबई डिविजन में चूहे के आतंक से मुक्ति पाने के लिए तकरीबन तीन साल में डेढ करोड रुपए खर्च किए. 

रुपये खर्च किए 1 करोड़ 52 लाख; चूहे मारे 5457, फिर भी रेलवे ने कहा- हम संतुष्ट हैं
.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुंबई: मुंबई के पश्चिम रेलवे ने मुंबई डिविजन में चूहे के आतंक से मुक्ति पाने के लिए तकरीबन तीन साल में डेढ करोड रुपए खर्च किए. पाँच साल में तकरीबन 5457 चूहों को मारने में कामयाब रहे, तो सेन्ट्रल रेलवे के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को चूहे से मुक्ति के लिए 6 लाख रुपए खर्च करने पड़े चूहों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए. किए गए खर्च से भले ही चूहों से स्टेशन पूरी तरह मुक्त हो या ना हों लेकिन चूहों के जरिए संवेदनशील तारों के काटने से सिग्नल में खराबी जैसे घटनाएं नहीं हुई है.‌

रेलवे स्टेशन, रेलवे यार्ड और ट्रेनों में चूहों के आतंक के परेशान रेल प्रशासन ने तीन साल में मोटी रकम खर्च कर डाली. पश्चिम रेलवे का मुंबई मंडल अकेले 1 करोड 52 लाख रुपए खर्च करके महज 5457 चूहे ही मार सकी. लेकिन मुंबई के चर्च गेट रेल परिसर में जहाँ चूहों की भरमार हुआ करती थी, अब भी यदा कदा चूहों की मौजूदगी देखी जा सकती है.

कैमरे में कैद होने से पहले भागने वाले चूहे दरअसल इलाके में केमिकल के छिड़काव से संख्या‌ में बेहदकम हो गए है. मुंबई मंडल ने एक चूहे पर तकरीबन 2785 रुपए के करीब खर्च किया, जबकि मुंबई महानगर पालिका ने इनामी प्रोग्राम में एक चूहे के लिए महज पाँच रुपए रखे गए थे.

सेन्ट्रल रेलवे की तरफ से छत्रपति शिवाजी स्टेशन को चूहों से मुक्ति के लिए तीन साल के लिए छह लाख रूपए के टेन्डर दिए गए है. रेल प्रशासन का मानना है कि इस प्रयास से चूहों को स्टेशन परिसर में अपना आतंक फैलाने से रोकने की वजह से सिग्नल और दूसरे महत्वपूर्ण उपकरणों के नुकसान से बचाया जा सका है.

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का लोकल रेलवे स्टेशन तकरीबन 1 लाख स्कावयर मीटर इलाका पुरी तरह से प्रभावित था. इसके छुटकारा पाने के लिए रेलवे ने पहले ट्रैक का कंक्रीटीकरण किया, इसके बाद आस पास के फुड स्टॉल को हटाकर प्लेटफार्म से दूर करने का काम किया. इसके बाद इन मूषक महाराज से निजात पाने के लिए केमिकल और धड़पकड़ कर स्टेशन परिसर से इनकी रवानगी की. 

पश्चिम रेलवे के जरिए खर्च किए पैसे को लेकर जरुर अचरज होता है कि केवल चूहों पर नियंत्रण करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए. ‌‌‌हालाकि रेलवे प्रशासन इससे संतुष्ट है, लेकिन इस मुसीबत से छुटकारा के लिए कुछ और ठोस उपाय की भी भविष्य में जरूरत हो सकती है.