CAA: पठान के बाद चोपड़ा भी जामिया के छात्रों के समर्थन में उतरे, कहा- आंख में आंसू हैं

इरफान पठान और आकाश चोपड़ा ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठीचार्च को लेकर चिंता जताई है. 

CAA: पठान के बाद चोपड़ा भी जामिया के छात्रों के समर्थन में उतरे, कहा- आंख में आंसू हैं

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का विरोध कर रहे जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी (Jamia Millia Islamia University) के छात्रों पर पुलिस की लाठीचार्ज से कई पूर्व क्रिकेटर चिंतित हैं. पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान (Irfan Pathan) ने छात्रों पर पुलिस लाठीचार्च को लेकर चिंता जताई है. पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा (Aakash Chopra) ने भी पठान का साथ दिया है. ये छात्र नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Act) के खिलाफ रविवार शाम प्रदर्शन कर रहे थे. 

पूर्व आलराउंडर इरफान पठान ने ट्वीट किया, ‘राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का खेल हमेशा चलता रहेगा. लेकिन मैं और हमारा देश जामिया के छात्रों के लिए चिंतित है.’ 35 वर्षीय इरफान पठान इस समय जम्मू कश्मीर क्रिकेट टीम के मेंटॉर व कोच हैं. वे भारत के लिए 120 वनडे, 29 टेस्ट और 24 टी20 इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं. 

यह भी पढ़ें: CAA: जामिया के छात्रों के समर्थन में आए इरफान पठान, कहा- हमारा देश लिए चिंतित है...

42 वर्षीय आकाश चोपड़ा ने लिखा, ‘पूरे देश में शिक्षण संस्थानों से उठकर आ रही तस्वीरों से आहत हूं. आंखों में आंसू हैं. वे हममें से एक हैं. ये बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं. ताकत के दम पर आवाज को दबा कर हम भारत को महान नहीं बना सकते. इससे आप सिर्फ उन्हें भारत के खिलाफ कर देंगे.’ पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा देश के लिए 10 टेस्ट मैच खेले हैं. 

virat

सीएए (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने जामिया परिसर में प्रवेश किया. सराय जुलनिया मथुरा रोड पर स्थित इस परिसर में जब हालात ज्यादा गंभीर हो गए तो पुलिस ने परिसर में आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में डीटीसी बस को जला दिया गया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया. दिल्ली पुलिस ने हालांकि विश्वविद्यालय परिसर में घुसने की बात को नकारा है. 

यह भी देखें: VIDEO: धोनी ने शेयर किया साक्षी का वीडियो, कहा- देखकर भी नहीं पढ़ पा रही हो तो...

दक्षिण पूर्वी दिल्ली के पुलिस कमिश्नर चिन्मय बिस्वाल ने भी कहा है कि विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को मात्र पीछे किया गया और पुलिस ने किसी तरह की फायरिंग नहीं की. उन्होंने कहा कि जब पुलिस वालों ने देखा कि उन पर पत्थरबाजी की जा रही है तो उन्होंने ऐसा करने वालों को पहचानने और उन्हें पकड़ने की कोशिश की.