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डियर जिंदगी: बच्‍चे को 'न' कहना!

बच्‍चे जितने प्रेम, स्‍नेह से न सुनेंगे. उसे ग्रहण करेंगे, जीवन में संघर्ष की धूप का सामना भी उतनी ही आसानी से कर पाएंगे.

Feb 19, 2019, 08:55 AM IST

Dear Zindagi: जिंदगी का फूल संघर्ष की धूप के बिना नहीं खिलता

असुविधा, दुख, परेशानी जीवन का हिस्‍सा हैं. इनसे भागना संभव नहीं. जीवन इनके साथ है. इनके बिना नहीं. इसलिए, इनका हिस्‍सा बनकर जीना है. जिंदगी का फूल संघर्ष की धूप के बिना नहीं खिलता, इसे हमें बहुत अच्‍छी तरह समझना, बच्‍चों को समझाना है. इसके तनाव, निराशा के भाव से सहजता से निपटा जा सकता है!

Feb 18, 2019, 06:45 PM IST

डियर जिंदगी: बच्‍चों के बिना घर!

बच्‍चों के पढ़ाई के लिए बाहर जाते ही माता-पिता में खालीपन देखा जा रहा है. जैसे किसी ने उनकी मुस्‍कान गिरवी रख दी हो कि खुश रहना मना है.

Feb 15, 2019, 08:52 AM IST

डियर जिंदगी: दुख को संभालना सीखिए. जिंदा रहिए!

बेटियां पराया धन होती हैं! उनके कन्‍यादान से कर्तव्‍य पूरा हुआ जैसे वाक्‍य जब तक समाज के विमर्श में रहेंगे, लड़कियों, शादीशुदा महिलाओं की आत्‍महत्‍या की दर को कम कर पाना आसान नहीं होगा. युवकों को असल में शिक्षित, आधुनिक नारी के अनुकूल बनाने का काम जब तक पूरा नहीं होगा, आत्‍महत्‍या को रोकना संभव नहीं होगा!

Feb 12, 2019, 12:35 PM IST

डियर जिंदगी: प्रेम कीजिए, खूब कीजिए. लेकिन अपनी कीमत पर नहीं

प्रेम सहज, स्‍वाभाविक भावना है! लेकिन अगर इसमें पाइथागोरस प्रमेय की तरह दिमाग लगाया जाए, तो जिंदगी सुनामी की चपेट में आ जाती है. खतरों से सावधान करने वाली चेतावनी सुनाई ही नहीं देती!

Feb 6, 2019, 10:35 PM IST

डियर जिंदगी: बच्‍चों के साथ 'जंगल' की तरह व्‍यवहार करना है, 'सर्कस' की तरह नहीं

बच्‍चों को अपने जैसा नहीं बनाना. बात अजीब लग सकती है! बेतुकी लग सकती है. लेकिन जब हम एक पटरी पर चलने के अभ्‍यस्‍त हो जाते हैं तो अक्‍सर ऐसा ही होता है. माता-पिता का सबसे बड़ा संकट बच्‍चों पर नियंत्रण को लेकर है. हम बच्‍चों को आसमां में उड़ाने की बात तो करते हैं लेकिन ऐसा करते हुए उनकी दिशा पर अपना अधिकार रखते हैं! हम भूल जाते हैं कि बच्‍चे हमसे हैं, लेकिन हमारे लिए नहीं हैं!

Jan 31, 2019, 05:10 PM IST

Dear जिंदगी: मन को पीपल के पत्ते की तरह हल्का रखना है

Dear Zindagi: Forgive and forget, only then can we live in peace. Watch the video to know more.

Jan 26, 2019, 09:10 PM IST

Dear जिंदगी: सुसाइड के भंवर से बचे बच्‍चे की चिट्ठी!

परीक्षा का दौर आरंभ हो चुका है. प्री-बोर्ड के माध्‍यम से बोर्ड की तैयारी की बात से सहमत होना मुश्किल है. यह ऐसा है, जैसे तनाव से पहले तनाव देकर उसकी तैयारी कराना! कुछ दिन पहले हमारे मेहमान अपने दसवीं कक्षा के बच्‍चों के साथ आए. बच्‍चों के साथ मुझे संवाद का अवसर मिला. थोड़ा आश्‍चर्य हुआ कि एक सुचिंतित, सुलझे हुए दंपति के बच्‍चों पर भी तनाव के बादल मंडरा रहे थे. बच्‍चों के चेहरे पर परीक्षा का तनाव महसूस किया जा सकता था. यह दंपति न तो बच्‍चों से किसी तरह की अनावश्‍यक अपेक्षा रखते हैं, न ही उन पर कोई दबाव डालते हैं, उसके बाद भी बच्‍चों के मन पर तनाव की छाया चिंतित करने वाली है

Jan 22, 2019, 08:25 PM IST

Dear ज़िंदगी: "बच्‍चे को स्‍कूल में मिलने वाले नंबर उसकी सफलता, असफलता का सही पैमाना नहीं हैं"

युवा, बच्‍चे जिन चीज़ों से सबसे अधिक परेशान दिखते हैं, उनमें अतीत, आगे का डर और हमारी सीमाएं (खुद के बारे में बनाई गई धारणा) प्रमुख हैं. इस बात को बार-बार दोहराने की जरूरत है कि बच्‍चे को स्‍कूल में मिलने वाले अंक उसकी सफलता, असफलता का सही पैमाना नहीं हैं. स्‍कूल के प्रदर्शन को पैमाना बनाने का सबसे खराब परिणाम यह है कि केवल कुछ बच्‍चे ही होशियार साबित होते हैं. हर साल स्‍कूल से निकलने वाले बच्‍चों में अधिकांश बच्‍चे इस मनोदशा के साथ निकलते हैं कि वह तो पढ़ने में कमजोर थे! ठीक नहीं थे. बहुत अच्‍छे नहीं थे! यह किसी एक स्‍कूल की बात नहीं . हर साल लाखों स्‍कूलों के बच्‍चे इस मानसिक स्थिति से गुजरते हैं. स्‍कूल बच्‍चे की दुनिया बनाने, उसमें रंग भरने की जगह बच्‍चे को अपने सपनों में रंगने की कोशिश में लगे रहते हैं! इस प्रक्रिया में कला, संगीत, खेल में रुचि रखने वाले बच्‍चे निरंतर पिछड़ते रहते हैं.

Jan 18, 2019, 03:15 PM IST

Dear जिंदगी: “सही सोच का अर्थ ये नहीं कि आपका चुनाव भी सही हो”

कई बार ऐसा होता है, जब एक ही चीज़ पर मतभेद होते हुए भी बाद में हमें लगता है कि इस पर ‘दोनों’ सही हैं. कोई गलत नहीं है. मंजिल एक है, लेकिन रास्‍ते अलग. एक-दूसरे के लिए ‘जगह’ निकाल पाना इतना मुश्किल भी नहीं. मतभेद के साथ सम्‍मान की कला जिंदगी के सुख का सबसे बड़ा आधार है. ‘डियर जिंदगी’ को मिल रही प्रतिक्रिया में इन दिनों जीवन के उस पड़ाव का जिक्र ज्‍यादा हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि जब दोनों सही हों, तो क्‍या करना चाहिए! रिश्‍तों में दरार तभी नहीं आती, जब रास्‍ते अलग हों, उस समय भी आती है, जब रास्‍ते एक हों.

Jan 17, 2019, 01:10 PM IST

डियर जिंदगी: दोनों का सही होना!

एक-दूसरे के लिए ‘जगह’ निकाल पाना इतना मुश्किल भी नहीं. मतभेद के साथ सम्‍मान की कला जिंदगी के सुख का सबसे बड़ा आधार है.

Jan 15, 2019, 09:11 AM IST

डियर जिंदगी : बच्‍चों की गारंटी कौन लेगा!

बच्‍चों के जन्‍म लेते ही हम किसी बड़े स्‍कूल की तलाश में जुट जाते हैं. उसके बाद प्रवेश होते ही मानते हैं कि हमारा काम पूरा हुआ.

Jan 11, 2019, 10:05 AM IST

डियर जिंदगी: स्‍वयं को दूसरे की सजा कब तक!

जिंदगी में सब कुछ नियंत्रण में होना संभव नहीं. हमें हर चीज के लिए दूसरों को दोष देने, खुद को कोसते रहने की जगह नई ‘कोपल’ की तरह मुश्किलों के बाद भी खिलने की कोशिश करनी चाहिए.  

Jan 8, 2019, 08:47 AM IST

डियर जिंदगी: असफल बच्‍चे के साथ!

बच्‍चों की परवरिश में अपेक्षा जितनी कम होगी, वह अपने नैसर्गिक गुण के उतने अधिक नजदीक होंगे. तनाव, डिप्रेशन उन्‍हें कम से कम छू पाएंगे!

Jan 4, 2019, 10:17 AM IST

डियर जिंदगी: आपने मां को मेरे पास क्‍यों भेजा!

यह ‘डियर जिंदगी’ उन पड़ोसियों के लिए है, जो संवेदना की सूखती नदी, परिवार तक सि‍मटती चिंता के बीच एक ऐसी दुनिया के सूत्रधार हैं, जिसमें सबके लिए आशा, सुख, सरोकार है.

Dec 18, 2018, 07:57 AM IST

डियर जिंदगी: बच्‍चों को रास्‍ता नहीं , पगडंडी बनाने में मदद करें!

हम बच्‍चों के अंतर्ज्ञान , सहजबोध पर यकीन करने की जगह अपने मन की सुनने में कहीं अधिक यकीन रखते हैं. इसी वजह से बच्‍चों के निर्णय में घालमेल करते हैं.

Dec 17, 2018, 08:19 AM IST

डियर जिंदगी: ‘गंभीर’ परवरिश !

हम परवरिश कैसे करते हैं ! अपनी परवरिश के आधार पर. जैसी सब कर रहे हैं. उनके जैसे. जो भी हमें याद है, जो मेरी समझ है, उसके आधार पर!

Dec 14, 2018, 08:07 AM IST

डियर जिंदगी : काश! माफ कर दिया होता...

माफी न मिलना तो आपके बस में नहीं है, लेकिन माफ करना तो आपका अधिकार है! इससे खुद को वंचित मत रखिए!

Dec 12, 2018, 08:52 AM IST

डियर जिंदगी: शुक्रिया 2.0 !

बॉलीवुड जिस तरह की चीजें रचता है, उसमें ऐसी रचना की गुंजाइश नहीं होती. तीनों ‘खान’, अमिताभ बच्‍चन में ऐसा ‘लोहा’ नहीं है, जिस पर पांच सौ करोड़ का दांव वह भी पर्यावरण पर आधारित कथा के लिए लगाया जा सके! 

Dec 10, 2018, 08:07 AM IST

डियर जिंदगी: पापा की चिट्ठी!

हम बच्‍चों को उतनी आजादी भी नहीं दे रहे जो हमें अपने माता-पिता से विरासत में मिली थी. हमारी अपेक्षा का बोझ उनके कोमल मन को हर दिन कठोर, रूखा बना रहा है!

Dec 4, 2018, 08:04 AM IST