close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जापान: परमाणु हमले के बाद बिना संसाधनों के बना एशिया का विकसित देश

जापान की संस्कृति और नजरिया वहां के लोगों को दुनिया से बहुत ही ज्यादा अलग कर देता है. खाद्य और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की बिना ही खुद को विकसित देश की श्रेणी में ले जाने की उपलब्धि ही जापान के लोगों के लिए सम्मान का खास भाव पैदा कर देती है. 

जापान: परमाणु हमले के बाद बिना संसाधनों के बना एशिया का विकसित देश
जापानी सम्राट ने हाल ही में अपनी गद्दी छोड़ने का मन बनाया है जिससे जापान पूरी तरह से लोकतांत्रिक देश हो जाएगा. (फोटो: Reuters)

नई दिल्ली: द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु बमों के गिरने के बाद भी जापान ने जिस तरह से तरक्की कर खुद को अपने ही बलबूते पर खड़ा किया, वह दुनिया भर में एक मिसाल है. सूर्योदय का देश कहा जाना वाला जापान दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. पूर्वी एशिया में स्थित जापान अपनी खास संस्कृति के लिए जाना जाता है. यह जापान के लोगों की कार्य संस्कृति का नतीजा है कि अर्थव्यवस्था में समस्याएं होने के बाद भी दुनिया मानती है कि जापान के लोग खुद अपनी मेहनत से उससे उबर जाएंगे. 

जापान की भौगोलिक स्थिति- रूस और अमेरिका के बीच
जापान की भौगौलिक स्थिति उसे दुनिया का सबसे अलग देश बनाती है. जापान में कुल 6000 द्वीप हैं, लेकिन चार सबसे बड़े द्वीपों को ही दुनिया में ज्यादा जाना जाता है. 377,864 वर्ग किलोमीटर (145,894 वर्ग मील) में फैला जापान के उत्तर में  होक्काइदो, इसके दक्षिण में होंशु जापान का सबसे बड़ा द्वीप है. उसके बाद शिकोकु चारों में से सबसे छोटा और दक्षिण में क्युशू स्थित है. पूर्व में प्रशांत महासागर और पश्चिम में जापान सागार ( जिसे पूर्व सागर भी कहा जाता है) इसी से रूस उत्तर और दक्षिण कोरिया के तट हैं. इसके अलावा जापान चीन, फिलीपींस, अमेरिका, ताइवान से भी अपनी समुद्री सीमाएं साझा करता है. 

यह भी पढ़ें: दक्षिण कोरिया: जापान-चीन जैसी ताकतों के बीच दुनिया में बना सबसे तेज तरक्की करने वाला देशज्वालामुखी और भूकंप यहां आम बात है

जापान के हर बड़े द्वीप के मध्य में पर्वतों की श्रृंखला उसे पूर्व और पश्चिम हिस्से के दो भागों में बांटती है यहां का माउंट फीजी दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वतों में से एक है. होंशु द्वीप की शिनानो नदी सबसे बड़ी नदी है जो कि 367 किलोमीटर लंबी है. इसी द्वीप की टोन नदी का अपवाह सबसे ज्यादा है जो कि राजधानी टोक्यो का प्रमुख जलस्रोत है. यहां 108 सक्रिय ज्वालामुखी हैं. इसकी वजह इसके द्वीपों का पैसिफिक रिंग ऑफ फायर पर होना है. इसी कारण यहां भूकंप आना सामान्य बात है. जापान के लोगों को भूकंप आने पर कैसे प्रतिक्रिया करनी चाहिए, इस बात की ट्रेनिंग तक दी जाती है. 

घट रही है जापान की आबादी
2016 तक जापान की आबादी 12 करोड़ 69 लाख थी जो कि बताया जाता है कि अब घट रही है. जापान में बुजुर्गों की संख्या बहुत ज्यादा है. इसके बावजूद जापान दुनिया के सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाला देश है इसका मतलब है कि यह सबसे ज्यादा घनी आबादी वाले देशों में एक है. यहां के 90% से ज्यादा लोग शहरों में रहते हैं. अकेले राजधानी टोक्यो में ही एक करोड़ तीस लाख लोग रहते हैं. यहां की भाषा जापानी है. शिंतो और बौद्ध धर्म यहां सबसे ज्यादा माने जाते हैं. 

Japan Flag
जापान  (फोटो: Reuters)

जापान की अर्थव्यवस्था का राज
 ज्यादातर वनों और पहाड़ों से घिरे जापान में खेती के लिए हालात अनुकूल नहीं हैं. ज्यादातर आबादी तटीय इलाकों में रहती है. मछली यहां के भोजन का प्रमुख अंग है. यहां तक कि मछलियों का आयात तक करना पड़ता है. इसके अलावा यहां प्राकृतिक स्रोत भी कोई बहुत ज्यादा नहीं हैं. ऐसे में एक सवाल यही कौंधता है कि आखिर फिर जापान ने इतनी तरक्की कर कैसे ली. इसका राज जापान की मेहनतकश आबादी में छिपा है. द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु हमले के बाद टूटकर बिखर से गए जापान ने तकनीकी को अपना हथियार बनाया और इलेक्ट्रोनिक्स के क्षेत्र में अमेरिका रूस जैसे देशों तक को पीछे छोड़ दिया. जापान के कैमरों का आज भी कोई सानी नहीं है. कम्प्यूटर युग से पहले जापानी रेडियो दुनिया भर में पसंद किए जाते थे. परिवहन के मामले में जापान की बुलेट ट्रेन दुनिया की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन मानी जाती हैं. यहां की मुद्रा येन है. 

बहुत मेहनती लोग हैं यहां के
जापानियों की खूबी यहां के लोगों का मेहनतकश होना है. यहां तक कि जब यहां लोग हड़ताल करते हैं तो वे ओवरटाइम कर लेते हैं जिससे उनकी फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ जाए और मालिक को नुकसान हो जाए. इसके अलावा जापानी लोग समय की बहुत ज्यादा कद्र करते हैं. यहां की रेलगाड़ियां तक वक्त की पाबंदी के लिए मशहूर हैं. 

क्या कहता है जापान का इतिहास 
जापान में प्रागैतिहासिक काल से मानव बसाहट के प्रमाण मिलते हैं. जापान के इतिहास के बारे में सबसे पहले पहली सदी के चीनी साहित्य में जिक्र मिलता है. शुरू से ही यहां की जातियां एक सम्राट के अधीन रहा करती थीं. यहां चीन और कोरिया से ही बौद्ध धर्म आया लेकिन शिंतो धर्म भी कायम रहा. इसके अलावा सांस्कृतिक आदान प्रदान में सबसे प्रमुख लिखने की कला भी चीन से ही जापान आई. 8वीं सदी में नारा शासनकाल में जापान का एकीकरण हुआ. इस दौरान साहित्य का विकास हुआ और स्थापत्य कला भी पनपी. सदी के अंत में हेइयान सभ्यता का प्रभुत्व 12वीं सदी तक रहा. इस दौर में जापान की अपनी संस्कृति का विकास हुआ जिसमें कला और साहित्य ( गद्य और पद्य) दोनों ने आकार लिया. 

यह भी पढ़ें: उत्तर कोरिया: ‘परमाणु ताकत’ वाला देश जिससे शांति वार्ता राह होती जा रही है कठिन

समुराई और झेन का जन्म
12वीं सदी के अंत तक जापान में योद्धाओं के वर्ग समुराई का जन्म हुआ जिससे जापान में सामंती युग की शुरुआत हुई जो शोगुन के अंतर्गत रहा जिसे सम्राट नियुक्त करते थे. इनके शासन को शोगुनेट कहा जाता था जो अगली सात सदियों तक चला. इस दौरान कामाकुरा शोगुनेट उल्लेखनीय रहा जो कि 12वीं सदी के 8वें दशक तक चला. इसी समय में चीन से बौद्ध धर्म का झेन मत जापान में आया. इसके बाद मोरोमाची शोगुनेट (14वीं से 16वीं सदी तक) में झेन सम्प्रदाय फला फूला. कहा जाता है कि झेन संप्रदाय शिंतो और बौद्ध धर्म का मिला जुला स्वरूप था. 15वीं सदी के अंत से 17वीं सदी की शुरुआत तक जापान में सैन्य संघर्ष का समय, जिसे सेंगोकु काल कहा जाता है, आया. इसी दौरान पुर्तगालियों और स्पेनिशों ने यहां सास्कृतिक आदान प्रदान किया. 

250 सौ साल तक दुनिया से कटा रहा जापान
17वीं सदी की शुरुआत में तोकुगावा शोगुनेट के काल से ही जापान अगली ढाई सदी (एडो काल) तक सकोकु नीति के तहत दुनिया से कटा रहा. 19वीं सदी में अमेरिका ने जापान से संधि की जिसके बाद जापान दुनिया के लिए खुल सका. अब जापान की दूसरे देशों के साथ भी संधियां होने लगी जिससे दूसरे देशों का भी जापान से संपर्क शुरू हुआ. 

20वीं सदी में हुई जापान की तरक्की
19वीं सदी के अंत में जापान की शक्ति बढ़ने लगी. पहले चीन और फिर रूस को हराने के बाद जापान ने ताइवान, कोरिया, और रूस के सखालिन प्रायद्वीप के दक्षिणी भाग पर कब्जा कर लिया. 20वीं सदी का आरंभ में जापान का पश्चिमीकरण हुआ और तेजी से आर्थिक विकास भी. प्रथम विश्व युद्ध में जापान ने मित्र राष्ट्रों की तरफ से भाग लिया. युद्ध के बाद अस्थिरता के दौर भी आया लेकिन जापान की ताकत कम नहीं हुई बल्कि उसकी विस्तारवादी नीति बढ़ी और जब उसने चीन के मंचूरिया पर कब्जा कर लिया. इसके बाद जापान ने लीग ऑफ नेशन्स भी छोड़ दी. 

Osaka Japan
ओसाका का बाजार. (फोटो: Reuters)

द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की त्रासदी
द्वितीय विश्व युद्ध में जापान जर्मनी और इटली के साथ रहा. इस युद्ध से पहले ही जापान का चीन से युद्ध शुरू हो गया था. पर्ल हार्बर पर जापान के हमले ने अमेरिका को द्वितीय विश्व युद्ध में खींच लिया. अंततः जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरने से जापान ने बिना शर्त समर्पण कर दिया. द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद जापान में नया संविधान और नए लोकतंत्र की शुरुआत हुई. 

शीतयुद्ध और उसके बाद का जापान
शीतयुद्ध के दौरान जापान ने जल्दी ही तरक्की की राह पकड़ ली. इस दौरान उसने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का रुतबा हासिल कर लिया. 1990 के दशक में आई आर्थिक मंदी ने जापान को बड़ा झटका दे दिया. 21वीं सदी में जापान की अर्थव्यवस्था कुछ संभलती दिखी. 2011 में यहां आए भूकंप की वजह से जापान को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ जिसमें फुकुशिमा परमाणु संयंत्र हादसा ने दुनिया को हिला दिया था.  

यह भी पढ़ें: रूस: कभी भारत का पक्का दोस्त था यह देश, अब चीन-पाकिस्तान से बढ़ रही हैं नजदीकियां
 
जापान की शासन व्यवस्था
जापान में संवैधानिक राजशाही है, लेकिन यहां की सम्राट कि शक्तियां सीमित हैं. जापान के सम्राट यहां की एकता और गौरव का प्रतीक हैं. 1947 के बाद से यहां संसदीय लोकतंत्र की स्थापना हुई. देश का प्रमुख होने के नाते सम्राट यहां के प्रधानमंत्री को नियुक्त करते हैं जो सरकार का नेता होता है. यहां की संसद को नेशनल डाइट (जापानी में कोक्काई) कहा जाता है इसके दो भाग हैं 465 सीटों वाली लोकसभा को शुगइन कहा जाता है जिसे हर चार साल में चुना जाता है. वहीं 242 सदस्यों वाले उच्च सदन को सांगइन कहा जाता है जिसके सदस्य छह साल के लिए चुने जाते हैं. 

आज का जापान- अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटाने को प्रतिबद्ध
21वीं सदी में तरक्की की राह पर लौटी जापान की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ सालों से संघर्ष कर रही है. देश की बागडोर फिलहाल प्रधानमंत्री शिजो आबे के हाथ में हैं जो साल 2012 से सत्ता में हैं. जापान और उसके लोग पिछले कई सालों से अपने देशी की नीतियां बदलने चाह रहे हैं जिसमें युद्ध को लेकर जापान का नजरिया प्रमुख है. हाल ही में चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं ने जापान को चिंतित किया है. जापान अपना रक्षा खर्च भी बढ़ा रहा है. अमेरिका के लिए चीन की बढ़ती विस्तारवादी नीति उसे जापान के करीब लाती है जिससे अमेरिका और जापान के बीच संबंध मजबूत होते दिखे हैं.

Japan PM Shijo Abe
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे 2012 से देश अपने पद पर बने हुए हैं. (फोटो: Reuters)

एक दूसरे के लिए अहम बाजार हैं जापान-अमेरिका
जापान के लिए अमेरिका एक बड़ा बाजार है. शिंजो आबे की सरकार एकतरफ पड़ोसियों से संबंध मधुर बनाने के लिए प्रयासरत है जो एक समय जापान के अधीन थे. इनमें दक्षिण कोरिया सबसे प्रमुख है. जापान में टोएटा, होंडा, कैनन, निसान, सोनी, मित्सुबिशी, पैनासोनिक, यूनीक्लो, लेक्सस, माजदा, और सुजूकी कंपनी के उत्पाद बहुत मशहूर हैं. इसके अलावा व्यापारिक प्रबंधन जापान का दुनिया भरे के प्रबंधकों का आकर्षित करता है.