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लेबनान: साक्षरता की ऊंची दर वाले इस देश के लिए विदेशी हमले और गृह युद्ध बन गए अभिशाप

लेबनान में हमेशा ही विभिन्य सम्प्रदाय के लोगों की लड़ाई का मैदान रहा है और यह इतिहास आज भी नहीं बदला है.    

लेबनान: साक्षरता की ऊंची दर वाले इस देश के लिए विदेशी हमले और गृह युद्ध बन गए अभिशाप
लेबनान में नई सरकार के खिलाफ असंतोष यहां के प्रदर्शनों में दिखाई देता है. (फोटो: IANS)

नई दिल्ली: भूमध्यसागर के तट और एशिया के पश्चिमी किनारे पर स्थित लेबनान अनेक सभ्यताओं का भागीदार रहा है. यहां के तटीय बंदरगाह इतिहास में हमेशा ही बड़े व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र रहे हैं. भले ही पश्चिम एशिया के इस देश में प्राकृतिक संसाधनों की कमी हो, इसके बावजूद यहां साक्षरता की दर बहुत ज्यादा है. दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों के संपर्क में रहने के बावजूद लेबनान पहले मोरोनाइट्स और ईसाइयों, फिर ईसाइयों और मुस्लिम शासकों, और उसके बाद शिया-सुन्नी संघर्ष की जमीन बन कर रह गया. पड़ोसियों और आंतरिक धार्मिक संघर्षों से उबरने में लगा लेबनान एक स्थायित्व की तलाश में है. 

21वीं सदी में लेबनान
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इजराइल और अरब पड़ोसियों के साथ से संघर्ष, फिलिस्तीनी शरणार्थी, आंतरिक गृहयुद्ध जैसी समस्याओं में उलझा रहा लेबनान 21वीं सदी में भी अपनी समस्याओं से उबरने की कोशिश में लगा है. 1991 में 15 साल पुराने गृहयुद्ध के खात्मे के बाद लेबनान पुनर्निर्माण की कोशिशों में लगा हुआ है. आज भी कई हथियार बंद संगठन, जिनमें शिया मुस्लिमों का हिजबुल्लाह प्रमुख रूप है, अब भी देश की मुख्य धारा से दूर हैं. पड़ोसियों के दखल से परेशान लेबनान अपनी सांस्कृतिक विविधता को साथ लेकर चलने में संघर्षरत है. 

इजराइल- सीरीया का दखल
लेबनान के इजराइल और सीरिया के बीच रिश्ते लंबे समय से ही तनावपूर्ण रहे थे. सीरिया के लेबनान के गृहयुद्ध में कूदने के बाद से समस्याएं बढ़ गई थीं. पहले फिलिस्तीनियों के लिए इजराइल ने लेबनान पर हमले किए. उसके बाद गृहयुद्ध में सीरीया का सीधा दखल हो गया. 1991 में यह गृहयुद्ध तो खत्म हो गया, लेकिन सीरिया का लेबनान में दखल खत्म नहीं हुआ. फिलिस्तीन-इजराइल संघर्ष ने भी हालात जटिल कर रखे थे. 2000 में इजराइल के लेबनान से हटने के बाद भी सीरीया ने लेबनान से हटने में दिल्चस्पी नहीं दिखाई. 

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2005-06 से बिगड़े हालात
2005 में लेबनान के प्रधानमंत्री रफीक हरीरी की हत्या ने लेबनान में सीरिया विरोधी भावनाएं गहरा दीं. तब सीरीया को सेना हटाने का ऐलान करना पड़ा. इजराइल ने भी लेबनान पर हमला जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र की शांति सेनाएं यहां आ गईं. 2011 के बाद सीरिया में बढ़ती हिंसा लेबनान में भी पहुंच गई. इसी के साथ ही हजारों शरणार्थियों ने लेबनान में शरण ली, जिनकी संख्या बढ़ती रही. इसने लेबनान की समस्याओं को और बढ़ा दिया.

ईरान की भूमिका
ईरान शिया बहुल देश है और दुनिया का एकमात्र देश है जहां शियाओं का एकछत्र राज्य है. ईरान की सऊदी अरब और सुन्नी बहुल देशों से खिलाफत रहती है. ईरान की इजराइल और अमेरिका तक से दुश्मनी है. माना जाता है कि पश्चिम एशिया में जहां-जहां शिया-सुन्नी संघर्ष है वहां शिया मुस्लिमों को ईरान का समर्थन मिलता है. लेबनान में हिजबुल्लाह संगठन को भी ईरान का खुला समर्थन है. 

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हिजबुल्लाह का है आज यहां गहरा असर
आईएस के खात्में के वातावरण और सीरिया में असद बशर की सरकार की वापसी के बीच लेबनान अपने लिए आज भी स्थाई समाधान की तलाश में है. हिजबुल्लाह के सरकार में शामिल रहने के बावजूद अमेरिकी विदेश माइक पोंपियो का कहना है कि यह सच्चाई नहीं झुठलाई नहीं जा सकती कि हिजबुल्लाह एक हिंसात्मक हथियारबंद साम्रादायिक संगठन है जिसने लेबनान के शिया लोगों को ‘बंधक‘ बनाया है और कि लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफीक हरीरी की हत्या में हिजबुल्लाह का हाथ है. इसके साथ ही सच यह भी है कि हिजबुल्लाह का लेबनान में प्रभावी दखल हो चुका है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 

  Hizbullah leader Sayyed Hassan Nasralla
लेबनान में हिजबुल्लाह नेता सयैद हुसैन नसरुल्ला का बहुत प्रभाव है. (फोटो: Reuters)

लेबनान के हालातों में वहां के भूगोल की भूमिका
लेबनान के पश्चिम में भूमध्य सागर, पूर्व और उत्तर में सीरिया, दक्षिण में इजाराइल सीमा लगती है. लेबनान की लंबाई ज्यादा है चौड़ाई कम. पूर्व के भूमध्य सागर के पास ही साइप्रस का द्वीप है जिससे लेबनान समुद्री सीमा साझा करता है. लेबनान यूरोप, वास्तव से भूमध्यसागर के रास्ते पूर्व से संपर्क में रहने वाले पश्चिमी देशों और एशिया के बीच का संपर्क स्थान रहा है. देश के बीचोंबीच समुद्र तट के समांतर लेबनान की पहाड़ियां हैं जिनकी ऊंचाई उत्तर से दक्षिण तक कम होती जाती है. ये पहाड़ियां सदियों से धार्मिक और राजनैतिक लोगों की शरणस्थली रहे हैं.

जलवायु की भी है विविधता
पहाड़ियों के पूर्व में बेक्का घाटी है जिसके पूर्व में सीरिया की सीमा पर भी पहाड़ियां उत्तर से दक्षिण की ओर जाती है. यहां मुख्यतः भूमध्यसागरीय जलवायु का प्रभाव है, लेकिन पहाड़ों पर सर्दियों में बर्फ भी गिरती है. मैदानी और तटीय क्षेत्रों में सर्दियों में बारिश होती है लेकिन गर्मी का मौसम शुष्क रहता है. लितानी और ओरोंतेस लेबनान की प्रमुख नदियां हैं. राजधानी बेरूत यहां का प्रमुख बंदरगाह है. उत्तरी तट पर स्थित त्रिपोली यहां की दूसरा बड़ा शहर है. 

लेबनान का संक्षिप्त इतिहास 
लेबनान के समुद्री तट पर बसे शहर दुनिया की बहुत सी प्राचीन सभ्यातओं के हिस्से रहे हैं. 1500 ईसापूर्व में यहां से फिनिसियन साम्राज्य का उदय हुआ था जो पूरे भूमध्यसागरीय क्षेत्र में फैल गया. जिसके प्रमुख शहर टायर था. 332 ईसापूर्व में सिकंदर ने इस क्षेत्र में अधिपत्य जमा लिया और टायर शहर को जला दिया. पहली सदी में लेबनान में ईसाई धर्म आया. इस दौरान लेबनान में रोमनों का तो प्रभाव रहा. सातवीं सदी से अरबों के अधिपत्य में आ गया. इसके बाद क्रूसेड अभियानों का सीधा असर लेबनान पर पड़ा. 14वीं सदी में ममलूकों का शासन रहा जिन्हें 16वीं सदी में ओटोमन तुर्कों ने हटाया. प्रथम विश्व युद्ध तक लेबनान ओटोमन साम्राज्य के अधीन रहा. 

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मुसीबत रही 20वीं सदी लेबनान के लिए
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लेबनान में भीषण सूखा पड़ा जिसमें लेबनान की आधी जनसंख्या मारी गई. एक आंकड़े के मुताबिक लगभग दो लाख लोग मारे गए थे. इस सूखा का प्रमुख कारण खराब फसलें और युद्ध के कारण लेबनान में खाद्य सामग्री न पहुंचना था. प्रथम विश्व युद्ध के बाद फ्रांस ने लेबनान पर कब्जा कर लिया. 1943 में लेबनान को आजादी मिली जिसके बाद 1958 से यहां गृहयुद्ध के हालात हो गए. अरब इजराइल युद्ध में लेबनान सीध शामिल नहीं हुआ, लेकिन फिलिस्तीन के यहां से इजराइल के खिलाफ लड़ने से लेबनान को इजाराइल से दुश्मनी झेलनी पड़ी. इजराइली सेना ने बार-बार यहां हमला कर प्रवेश किया. वहीं 1975 में शुरू हुए गृहयुद्ध में सीरीया ने फिलिस्तीनियों को खत्म करने के नाम पर यहां सीधे दखल दिया. अमेरिका ने भी यहां अपने सैनिक भेजे, लेकिन हालात काबू करने से पहले ही वे वापस चले गए. 

विभिन्न सम्प्रदाय के बीच रहा संघर्ष
लेबनान में बहुत से समुदाय के लोग सदियों से यहां रहते हैं. सबसे ज्यादा मुस्लिमों (लगभग 60%) में भी शिया, सुन्नी, ड्रूज, अलावाइट्स जैसे समुदाय बटें हुए हैं. करीब 39% लोग ईसाई हैं जिन्में मोरोनाइट, कैथोलिक, ग्रीक परंपरावादी, जैसे अन्य बहुत से पंथ शामिल हैं. इतने विभिन्न पंथों का आपस में सद्भाव कभी नहीं हो सका.  चौथी और पांचवी ईस्वी में मोरोन नाम के एक संत ने एकईश्वरवाद के पंथ लेबनान में प्रसार किया. उनके अनुयायियों ने, जो लेबनान के पहाड़ों पर रहते थे, अपने गुरू की विचार धारा को लेबनान के ईसाइयों में फैलाया. आज भी लेबनान में दो तरह के ईसाई रहते हैं एक परंपरागत (रोमन कैथोलिक) और दूसरे मोरोन. मोरोन परंपरा को मानने वाले उत्तर लेबनान में ज्यादा हैं. इसके अलावा मुस्लिमों का मशहूर शिया सुन्नी विवाद यहां भी गहरी पैठ बना चुका है. यहां की आधिकारिक भाषा अरबी के अलावा फ्रेंच, अंग्रेजी और अर्मेनियन भाषा भी बोली जाती है.

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मुक्त अर्थव्यस्था है लेबनान की
लेबनान में मुक्त अर्थव्यवस्था है जिसमें सरकार का दखल बहुत कम है. ज्यादातर जनसंख्या सेवाक्षेत्र में है. केवल 12% लोग ही कृषि में लगे हैं. जो यहां की जलवायु के मुताबिक रसीले फलों टमाटर, सब्जियों, आलू जैसी पैदावारों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं. उद्योगों की लेबनानी अर्थव्यवस्था में कम भूमिका है इनमें बैंकिग, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, सीमेंट, कपड़ा, फर्नीचर आदि शामिल हैं.  लेबनीज पाउंड यहां की मुद्रा है.