शिवसेना की जगह भाजपा को मिल सकता है नया सहयोगी

महाराष्ट्र में शिवसेना का साथ छूटना भाजपा के लिए बड़ा झटका था. 25 साल पुराने साथी का हाथ छुड़ाना दुखद तो था. लेकिन भाजपा ने अब इस झटके से उबरने की तैयारी कुछ इस तरह की है. 

शिवसेना की जगह भाजपा को मिल सकता है नया सहयोगी

नई दिल्लीः महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के साथ ही भाजपा-शिवसेना में दरार पड़ गई थी. इससे यह तो साफ हो गया था कि अब एनडीए का एक सहयोगी घटक कम हो गया है. इसकी औपचारिक घोषणा के साथ यह तय हो गया है. इसी के साथ एनडीए में खाली हुई सीट को लेकर भी कयास लगने लगे हैं. दरअसल कयास तो इस बात के हैं कि झारखंड चुनाव के बाद और बजट सत्र से पहले-पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार किया जा सकता है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ इसे एक इशारे के तौर पर देख रहे हैं जो कि यह बता रहा है कि एनडीए अब शिवसेना को पूरी तरह से किनारे रखकर उसकी भरपाई में अन्य सहयोगी दल पर विचार कर रही है.

तो क्या यह सहयोगी जदयू बनेगी
जदयू के सूत्रों का कहना है कि इस नए संबंध की पहल भाजपा की ओर से ही की गई है. दरअसल भाजपा का कहना था कि सरकार में शामिल न होने के कारण बिहार में दोनों दलों का गठबंधन कायम रहने पर संदेह जताया जा रहा है.  चूंकि अगले साल ही बिहार में विधानसभा चुनाव है. ऐसे में यहां भी संतुलन बनाना जरूरी है. दूसरी तरफ शिवसेना के अलग हो जाने के बाद जदयू को उम्मीद है कि उसे केंद्रीय मंत्रिमंडल में अहम पद मिल सकता है. इसलिए उसने भी इस मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होने के लिए हामी भर दी है.

इसके साथ ही जदयू ने किसी तरह के अलगाव का संदेह दूर करने के लिए संसद में नागरिकता कानून के बिल के समर्थन में दोनों सदनों में वोट किया.

...लेकिन वाईएसआरसीपी भी है लाइन में
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपने विस्तार के लिए वाईएसआरसीपी से भी बातचीत का सिलसिला शुरू कर दिया है. भाजपाई सूत्रों का कहना है कि वाईएसआर कांग्रेस भी जल्द ही राजग में शामिल हो सकती है. वाईएसआरसीपी ने भी दोनों ही सदनों में नागरिकता बिल का समर्थन किया था. सूत्रों का कहना है कि पहले वाईएसआरसपी को राजग में शामिल किया जाएगा, इसके बाद उसे सरकार में जगह दी जाएगी. राजग में शामिल करने की पहल इस ओर का स्पष्ट इशारा है कि भाजपा ने प्रबल सहयोगी दल के तौर पर दूसरे कंधे और मजबूत हाथ तलाश लिए हैं. 

वाईएसआर कांग्रेस का शामिल होना बड़ी बात क्यों
दरअसल आंध्र प्रदेश में हुए चुनाव के दौरान वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की थी. पार्टी को 175 में 151 सीटें हासिल हुई थीं. इस बड़ी जीत के बाद पार्टी के नेता जगन मोहन रेड्डी का कद काफी बढ़ गया था. उस दौरान सत्तारुढ़ टीडीपी ने 110 सीटें जीतने का दावा किया था, लेकिन दावे के आसपास भी नहीं फटक पाई थी. इधर, शिवसेना लंबे समय से राजग का हिस्सा रही है और कट्टर हिंदुत्ववादी विचारधारा के कारण प्रमुख सहयोगी घटक दल के तौर पर खड़ी रही है.

महाराष्ट्र सरकार के गठन के दौरान शिवसेना का जो रवैया रहा उससे उसकी पहचान भी गई, साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि बाला साहेब का दिया ऊंचा कद और मजबूत हाथ शिवसेना के वर्तमान नेतृत्व के पास नहीं है. लिहाजा खुद में कमजोर संगठन को साथ लेकर बहुत दूर तक नहीं चला जा सकता है. वाईएसआरसीपी इस बड़े खांचे में बेहतर तरीके से फिट बैठ रही है, लिहाजा मंत्रिमंडल के विस्तार में उसके हाथ अहम मंत्रालय आ सकते हैं. साथ ही राजग का संतुलन भी बना रहेगा.

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बीजद के एनडीए में आने के संकेत काफी दिनों से हैं
ओडिशा की बड़ी पार्टी बीजद की ओर से एनडीए में शामिल होने के संकेत 2019 के लोकसभा चुनाव से मिल रहे हैं. उस दौरान जब महागठबंधन तैयार हो रहा था तो उससे बीजद ने खुद को अलग कर लिया था. बीजेडी के अमर पटनायक ने कहा था कि हम शायद ऐसी पार्टी या किसी ऐसे गठबंधन का समर्थन करेंगे, जो केंद्र में सरकार बनाता है और ओडिशा के कुछ अनसुलझे और लंबे समय से लंबित मुद्दों को निपटाने के लिए सहमत है. उनका इशारा एनडीए की ओर था.

इसी के साथ माना जा रहा था कि सरकार बनाने के साथ भाजपा को बीजद का साथ भी मिल जाएगा. हालांकि ऐसा न होने के बाद भी बीजद, संसद में भाजपा के लिए समर्थित पार्टी रही है. कयास हैं कि इस बार मंत्रिमंडल का विस्तार हो और राजग का कुनबा बढ़े तो बीजद उसका हिस्सा हो सकती है.

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