क्या वाम उदारवादियों को गांधीजी के कदमों में खामियां नजर नहीं आईं थीं? : अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्षी दलों को ‘‘बात-बात पर विरोध करने वाले’’ बताते हुए उन पर झूठ गढ़ने और एक निर्वाचित सरकार को कमजोर करके लोकतंत्र को बर्बाद करने का आरोप लगाया.

क्या वाम उदारवादियों को गांधीजी के कदमों में खामियां नजर नहीं आईं थीं? : अरुण जेटली
अरुण जेटली (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्षी दलों को ‘‘बात-बात पर विरोध करने वाले’’ बताते हुए उन पर झूठ गढ़ने और एक निर्वाचित सरकार को कमजोर करके लोकतंत्र को बर्बाद करने का आरोप लगाया. उन्होंने कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों का नाम लिए बगैर एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि सकारात्मक मानसिकता वाले लोगों और राष्ट्रीय शक्ति से राष्ट्र का निर्माण होता है ना कि ‘‘बात-बात पर विरोध करने वालों से.’’ सूत्रों के अनुसार, जेटली चिकित्सा जांच के लिए अमेरिका में हैं.

उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘‘बार-बार झूठ गढ़ने का कोई अफसोस नहीं होता. अगर वे देश के आम हित के खिलाफ चले जाते हैं तो वे तर्क भी गढ़ सकते हैं. वे भ्रष्टाचार के रूप में धर्मयुद्ध का स्वांग रच सकते हैं. अपनी सहूलियत के हिसाब से वे दोहरे मानदंड अपना सकते हैं.’’

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आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण और राफेल रक्षा सौदे समेत कई मुद्दों पर राजनीतिक दलों की निंदा का हवाला देते हुए जेटली ने कहा कि ‘‘बात-बात पर झूठ बोलने वालों’' का मानना है कि सरकार कुछ अच्छा नहीं कर सकती और इसलिए उसके हर काम में रोड़े अटकाए जाने चाहिए.

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उन्होंने कहा, ‘‘सकारात्मक मानसिकता वाले लोग और राष्ट्रीय शक्ति से राष्ट्र का निर्माण होता है ना कि ‘बात-बात पर विरोध करने वालों से. क्या वाम उदारवादियों को आजादी के संग्राम के दौरान गांधीजी द्वारा उठाए विभिन्न कदमों में खामियां नजर नहीं आईं थीं? संप्रभु निर्वाचित सरकार को कमजोर करके और निर्वाचन के अयोग्य को मजबूत करना केवल लोकतंत्र का विनाश है.’’

(इनपुट: एजेंसी भाषा से)