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मुजफ्फरनगर लोकसभा: इंजीनियरिंग छोड़ अजीत सिंह साल 1986 में पहली बार पहुंचे थे राज्यसभा

लखनऊ से बीएससी करने के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए आईआईटी खड़गपुर चले गए. इसके बाद अमेरिका के इलिनाइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी से मास्टर ऑफ साइंस किया. साल 1980 में चौधरी चरण सिंह ने उन्हें लोकदल की कमान सौंप दी. यहीं से अजित सिंह ने राजनीति में कदम रखा. 

मुजफ्फरनगर लोकसभा: इंजीनियरिंग छोड़ अजीत सिंह साल 1986 में पहली बार पहुंचे थे राज्यसभा
राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रमुख अजित सिंह की फाइल फोटो.

नई दिल्ली: वेस्ट यूपी की सबसे चर्चित सीट मुजफ्फरनगर में इस बार जबरदस्त टक्कर बताई जा रही है. एग्जिट पोल के मुताबिक, यहां आरएलडी सुप्रीमो अजित सिंह और बीजेपी के संजीव बालियान में कांटे की टक्कर है. 2014 में बीजेपी यहां 16 साल बाद यहां बीजेपी का वनबास खत्म किया था. जाट नेता के नाम से राजनीति में प्रसिद्ध अजित सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन के साथ हाथ मिलाया है. 

1980 में लोकदल का संभाली कमाल
अजित सिंह वे राष्ट्रीय लोकदल के संस्थापक हैं. उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, लेकिन राजनीति उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली. अजित सिंह ने करीब 15 साल तक अमेरिका में ही नौकरी की. जब उनके पिता चौधरी चरण सिंह की तबियत खराब रहने लगी, तो वह भारत लौट आए. साल 1980 में चौधरी चरण सिंह ने उन्हें लोकदल की कमान सौंप दी. यहीं से अजित सिंह ने राजनीति में कदम रखा. 

अजीत सिंह की शिक्षा
लखनऊ से बीएससी करने के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए आईआईटी खड़गपुर चले गए. इसके बाद अमेरिका के इलिनाइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी से मास्टर ऑफ साइंस किया.

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ऐसा है राजनीतिक इतिहास 
अजित सिंह के राजनीतिक करियर की बात करें तो पहली बार वह 1986 में उत्तर प्रदेश से राज्य सभा में पहुंचे. इसके बाद 1987 में उन्हें लोकदल का अध्यक्ष बनाया गया. इसके बाद बागवत से पहली बार वह लोकसभा चुनाव 1988 में जीता था. इसके बाद 1998 में पहली बार उनकी इस सीट पर हार हुई. वह बीजेपी नेता सोमपाल शास्त्री से चुनाव हार गए थे. इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल बनाई. साल 1999 में वह चुनाव फिर जीते और साल 2009 तक लगातार जीतते रहे, लेकिन साल 2014 के चुनाव में वह बीजेपी के सत्यपाल हार गए. विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में वह उद्दयोग मंत्री रहे. इसके अलावा अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री रहे. साल 2001 में मनमोहन सिंह की सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री बनाए गए.