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#ZeeMahaExitPoll: इंडिया टुडे-एक्सिस का दावा, असम में बीजेपी कर सकती है क्लीन स्वीप

सातवें चरण का मतदान पूरा होने के साथ ही लोगों की दिलचस्‍पी सीटों के एग्जिट पोल को लेकर बढ़ गई है. पूरे देश में इस वक्‍त की सबसे बड़ी सियासी चर्चा यही है कि किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी.   

#ZeeMahaExitPoll: इंडिया टुडे-एक्सिस का दावा, असम में बीजेपी कर सकती है क्लीन स्वीप

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) के सातवें और अंतिम चरण का मतदान रविवार (19 मई) को समाप्त हो गया. इस चुनाव में लोकसभा की 543 में से 542 सीटों पर मतदान के बाद चुनावी नतीजे 23 मई को आएंगे. वहीं, नतीजों से पहले एग्जिट पोल (Exit Poll Results 2019) आना शुरू हो गए हैं. शुरुआती रुझानों में इंडिया टुडे-एक्सिस ने असम में बीजेपी को 12-14 सीटें जीतने का दावा किया है. जबकि कांग्रेस को 0-2 सीटें का अनुमान है. उधर आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट(Aiudf) को एक भी सीट नहीं मिलती दिख रही है.

असम के जरिए बीजेपी का पूर्वोत्तर में जीत का द्वार खुला था. 2014 के लोकसभा चुनाव में असम की 14 संसदीय सीटों में से बीजेपी को 7 सीटें मिली. जबकि कांग्रेस को 3, बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIDUF को 3 और निर्दलीय को एक सीट पर जीत मिली थी. लेकिन अब 2019 के लोकसभा चुनावों में किस कितनी सीटें मिलेंगी यह आगे देखने वाली बात होगी.

देश के उत्तर-पूर्व (North-east) में स्थित राज्य असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP)की सरकार है. यहां से लोकसभा चुनाव 2014 (loksabha election 2014) के दौरान राज्य की 14 संसदीय सीटों में से बीजेपी ने 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके अलावा कांग्रेस (Congress) के खाते में 3 जबकि आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट(Aiudf)ने 4 सीटें जीती थी. 

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आपको बता दें कि, 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी लहर के प्रभाव के कारण असम के लोगों ने बीजेपी नीत गठबंधन को 7 सीटें दी थी. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी-आसु (Aasu) के बीच चल रहा विवाद, बीजेपी के नेताओं से उनकी नाराजगी का राज्य के चुनाव परिणाम पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है.

इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान नेशनल वोर्टस रजिस्टर, नागरिकता के कानून में बदलाव (amedment in citizenship bill) के अलावा असम अकार्ड (Assam Accord) को लागू करना एक बड़ा मुद्दा है. पिछले आम चुनावों में अपनी पैठ बनाने के बाद बीजेपी ने वहां असेंबली में अपनी सरकार बनाई.

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हालांकि नागरिकता संशोधन बिल को लेकर केंद्र व राज्य सरकार को यहां खासा विरोध झेलना पड़ा. बिल पर अध्यादेश को टालकर बीजेपी ने लोकल की नाराजगी दूर करने की कोशिश की, वहीं असम गण परिषद व बोडो पीपुल्स फ्रंट से हाथ मिलाकर अपनी जमीन बचाने की कवायद में जुटती दिखाई दी.

बीजेपी ने राज्य की कुल 14 लोकसभा सीटों में 10 सीटें अपने लिए रख, तीन सीटें एजीपी व एक सीट बीपीएफ को दी है. एजीपी को उसने तीन सीटें इसलिए दीं कि पिछले 15 साल में एजीपी अधिकतम 2 सीटें 2004 में जीती थी. एजीपी को साथ लेकर जहां बीजेपी लोकल अस्मिता से जुड़ने की कोशिश करती दिख रही है, वहीं बीपीएफ को साथ लेकर उसने प्रदेश में मौजूद बोडो ट्राइब तक पहुंचने का प्रयास किया है. कोकराझाड़ बोडो वर्चस्व सीट है.