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जब सिकंदर बख्त ने पूछा था- मोदी आपने हिंदी कैसे सीखी, मोरारजी देसाई नहीं सीख पाए

अक्षय कुमार के साथ इंटरव्यू में एक सवाल के दौरान पीएम मोदी ने बताया कि किस तरह उन्होंने गुजरात के एक छोटे से जिले में रहते हुए भी हिंदी सीख ली थी.

जब सिकंदर बख्त ने पूछा था- मोदी आपने हिंदी कैसे सीखी, मोरारजी देसाई नहीं सीख पाए

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार और राजनीतिक माहौल के बीच एक गैर राजनीतिक इंटरव्यू दिया. उनका ये इंटरव्यू लिया फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने. इसमें पीएम मोदी ने अपने जीवन से जुड़े कई अहम पलों के बारे में बात की. ऐसे ही एक सवाल के दौरान पीएम मोदी ने बताया कि किस तरह उन्होंने गुजरात के एक छोटे से जिले में रहते हुए भी हिंदी सीख ली थी. उन्होंने बताया कि उन्होंने रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते बेचते हिंदी सीखी. इससे जुड़ा उन्होंने एक किस्सा भी अक्षय कुमार से शेयर किया.

पीएम मोदी ने बताया, जब मैं चाय बेचता था, उस समय काफी कुछ सीखने का मौका मिला, लोगों को जानने का मौका मिला. मैं चाय बेचते था तो हिंदी में ही बात करता था, इससे लोग चौंकते थे. कई लोग राजनीति में भी चौंकते थे. बीजेपी के वरिष्ठ नेता  सिकंदर बख्त पूछते थे, मोदी तुम तो गुज्जु हो, तुमने इतनी अच्छी हिंदी कैसे सीख ली. मोररजी देसाई तो इतने साल दिल्ली में रहे, लेकिन इतनी अच्छी हिंदी नहीं सीख पाए.

पीएम मोदी ने बताया जिस स्टेशन पर वह चाय बेचते थे, वह काफी छोटा था, इसलिए वहां पर यात्री गाड़ियां कम रुकती थीं, लेकिन मालगाड़ी काफी गुजरती थीं. उनमें कई गाड़ियों में उनके स्टेशन से गाय भैंसें जाती थीं. उन्हें लेने वाले जो लोग होते थे, उन्हें चाय देना और उनसे बातचीत हिंदी में ही होती थी. इस तरह उन्होंने अपनी हिंदी भी अच्छी कर ली. 

ममता बनर्जी भेजती हैं कुर्ते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को खुलासा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो मुखर रूप से उनकी (मोदी की) आलोचक हैं, खुद कुर्तो का चयन कर हर साल उन्हें भेजती हैं. अभिनेता अक्षय कुमार के साथ बातचीत में मोदी ने कहा कि इस खुलासे से शायद लोकसभा चुनाव में उन्हें नुकसान पहुंचे. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना हर साल ढाका से उन्हें विशेष मिठाई भेजती थीं. "जब ममता दीदी को इसके बारे में पता चला, तो उन्होंने भी मुझे हर साल एक-दो मौकों पर बंगाली मिठाई भेजनी शुरू कर दी."

गुलाम नबी के साथ अच्छे संबंध
प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के साथ उनके अच्छे संबंध हैं. 'स्पष्ट और गैर-राजनीतिक' साक्षात्कार का प्रसारण लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान संपन्न होने के बाद हुआ. इसके प्रसारण के पहले अक्षय ने ट्विटर पर घोषणा की थी कि वह प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करेंगे, जिससे दर्शकों को मोदी के बारे में दिलचस्प बातें जानने में मदद मिलेगी.

गुजरात का मुख्यमंत्री रहते दान किए 21 लाख
अक्षय के इस सवाल पर कि क्या उन्होंने दिल्ली जाने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वेतन के तौर पर मिली पूरी राशि दान कर दी थी? मोदी ने कहा, "यह पूरा सच नहीं है. मैं ऐसा करना चाहता था, लेकिन मेरे अंदर काम करने वाले कुछ अधिकारियों की सलाह पर मैंने केवल 21 लाख रुपये का दान दिया. मैंने अधिकारियों को सचिवालय में जूनियर कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने के लिए कहा."

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने कभी गुस्सा महसूस किया है? मोदी ने कहा, "अगर मैंने कहा कि मुझे गुस्सा नहीं आता, तो लोगों को हैरानी होगी." उन्होंने कहा, "गुस्सा हर इंसान के जीवन का एक हिस्सा है. जब मैं लगभग 18-20 साल का था, तो मुझे बताया गया कि बुरी आदतें व्यक्तिगत विकास में बाधा हैं. मेरा गुस्सा एक ऐसी ही बुरी आदत थी. मैं लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहा. अब मैं प्रधानमंत्री हूं, लेकिन एक भी ऐसा मौका नहीं आया, जब मैंने किसी पर गुस्सा किया."

मेरी सख्त छवि का प्रचार गलत
मोदी ने नई दिल्ली में लोक कल्याण मार्ग स्थित आवाज पर अभिनेता से कहा, "मैं सख्त हूं, लेकिन मैं दूसरों को अपमानित करने में विश्वास नहीं करता. मैं लोगों को प्रोत्साहित करता हूं. मैं उनकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाता हूं.. मैं सिखाता भी हूं. मैं एक टीम बनाता हूं. मेरे अंदर गुस्सा हो सकता है, लेकिन मैं जाहिर नहीं करता." यह पूछे जाने पर कि क्या वह अपने परिवार के साथ नहीं रहना चाहते? मोदी ने कहा कि उन्होंने बहुत कम उम्र में अपना घर छोड़ दिया था और इसलिए उनका जीवन पूरी तरह से अपने परिवार से अलग हो गया. मोदी ने अपनी 'सख्त छवि' को भी गलत बताया.

उन्होंने कहा, "अगर कोई कहता है कि मैं लोगों को काम करने के लिए मजबूर करता हूं, तो उसने मुझे पूरी तरह से समझा नहीं है. यह सच है कि मेरे साथ जुड़े लोगों को अधिक काम करना पड़ता है, लेकिन मैं कभी किसी को मजबूर नहीं करता. मैं एक कार्य संस्कृति विकसित करता हूं, क्योंकि मैं भी बहुत मेहनत करता हूं."

कभी भी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री बनूंगा
मोदी ने कहा कि उन्होंने कभी भी प्रधानमंत्री बनने के बारे में नहीं सोचा था, क्योंकि उनकी पृष्ठभूमि में ऐसा कुछ नहीं था कि वह इस बारे में सोचते. उन्होंने कहा, "आम लोग ऐसे सपने नहीं देखते. इस तरह के विचार केवल उन लोगों के मन में आ सकते हैं, जो पृष्ठभूमि के साथ-साथ एक विशेष परिवार से ताल्लुक रखते हैं. लेकिन, मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि ऐसी थी, जहां कि अगर मुझे अच्छी नौकरी मिल जाती तो मेरी मां पड़ोस में गुड़ बांटती. हमने इससे परे कभी कुछ दूसरा नहीं सोचा. हमने अपने गांव के बाहर कुछ नहीं सोचा."

उन्होंने कहा, "यह सफर बस शुरू हो गया और देश ने मुझे स्वीकार कर लिया. जिम्मेदारियां भी मेरे ऊपर अपने आप आ गईं. मेरे व्यक्तिगत दृष्टिकोण के अनुसार, यह (प्रधानमंत्री बनना) अस्वाभाविक है, क्योंकि मेरा जीवन और दुनिया वर्तमान राजनीतिक माहौल में फिट नहीं बैठते हैं."

मोदी ने कहा, "मुझे हमेशा आश्चर्य होता है कि देश मुझसे कैसे प्यार करता है और मुझे ढेर सारा देता है." मोदी ने कहा कि एक समय उनका मानना था कि या तो वह संन्यासी बनेंगे या सेना में शामिल होंगे. आम का जिक्र करने पर मोदी पुरानी यादों में खो गए और उन्होंने बताया कि कैसे वह बचपन में आम का आनंद लेते थे. हालांकि, अब प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें सावधानी बरतनी पड़ती है और अपने आहार पर ध्यान देना पड़ता है. मोदी ने अक्षय से अपनी दिनचर्या, अपनी जिम्मेदारियों, और कम सोने के बारे में भी बात की.

input : IANS