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Vande Mataram News

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वंदे मातरम: नंदीग्राम में किसको सलाम, किसको राम-राम? | रथ से परिवर्तन का प्रण, West Bengal में महारण | West Bengal Elections 2021 | Mamata Banerjee भक्तिकाल के सूफी संत कबीर ने सालो पहले कह दिया था 'घट बिन कहूं ना देखिये राम रहा भरपूर..जिन जाना तिन पास है दूर कहा उन दूर' अर्थात कोई भी शरीर राम से शून्य नहीं है, सभी शरीर में ईश्वर पूर्ण रुप से विद्यमान है, जो ज्ञानी है उसके पास ही ईश्वर है, जो उन्हें दूर मानता है भगवान उससे बहुत दूर है. आज ऐसा ही हाल West Bengal की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee का है, Mamata Banerjee भगवान राम से दूरी बना रही है, जहां भी कहीं Jai Shree Ram के नारे गूंजते हैं वो आग बबूला हो जाती है, लेकिन अब पूरे Bengal में Jai Shree Ram की गूंज है. विधानसभा से लेकर नंदीग्राम तक आखिर कहां-कहां जय श्रीराम के नारों से बैर रखेंगी Mamata Banerjee.
Feb 6,2021, 0:00 AM IST
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आज दिल्ली में एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का नारा 'जय जवान और जय किसान' को दोहराने का एक शानदार मौका था, जब राजपथ पर जवान देश की ताकत को पेश करते, किसान अपनी परेड से लोकतंत्र की आवाज़ बुलंद कर रहे होते, लेकिन हुआ अलग, किसान नेताओं ने जिस किसान परेड का वादा किया था वो अराजक परेड बन गया. किसानों के नाम पर दिल्ली में द्रोह की तस्वीरें खड़ी की गईं और पूरे गणतंत्र का अपमान किया गया. किसानों के कंधों का इस्तेमाल कर के दिल्ली को युद्ध का मैदान बना दिया गया, गणतंत्र से गद्दारी की गई और जिस मां की हम वंदना करते हैं, जिन्हें नमन करते हैं उनकी शान में ये बहुत बड़ी गुस्ताखी की गई.
Jan 26,2021, 23:18 PM IST
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वंदे मातरम | राम के नाम से ममता को बैर क्यों? | मतुआ पर 'ममता' से 'दीदी' जीतेंगी बंगाल | Latest News | West Bengal | West Bengal Elections #VandeMataram #WestBengal #MamataBanerjee राष्ट्र नायक Subhas Chandra Bose की जयंती पर Victoria Memorial में जो हुआ वो सारे देश ने देखा. PM Narendra Modi के मंच पर आईं Mamata दीदी तब आग बबूला हो गईं जब सामने मौजूद भीड़ से Jai Shree Ram का उद्घोष हुआ, लेकिन West Bengal की चुनावी जंग में राम के नाम पर बड़ा संग्राम शुरु हो गया है और अब विरोधी दल दावे कर रहे हैं, असंख्य राम भक्तों की आस्था पर आघात का जवाब West Bengal की जनता Mamata दीदी को चुनाव में देगी. बंग की जंग में Mamata Banerjee का एक औऱ दांव जिसमें दीदी ने मतुआ समाज पर फिर से ममता दिखाई है और बंगाल में 'दीदी' ने खोल डाली लालच वाली 'लॉटरी' क्योंकि दीदी जानती है बंगाल की सियासत में 'मतुआ' समाज के लोग काफी दम खम रखते है.
Jan 24,2021, 23:54 PM IST
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Netaji Subhas Chandra Bose की मातृभूमि पर PM Narendra Modi और Mamata दीदी एक साथ नेताजी की जयंती मना रहे थे. Kolkata में Mamata Banerjee के मंच पर पहुंचते ही 'जय श्री राम' के नारे लगे जिससे Mamata Banerjee आग बबूला हो गईं. ममता बनर्जी पर जैसे ज्वालामुखी के शोले गिर गए. ऐसा लगा उनके कानों में किसी ने पिघलता लोहा डाल दिया. विक्टोरिया मेमोरियल में जय श्री राम का उद्घोष क्या हुआ ममता बनर्जी की एलर्जी एक बार फिर सामने आ गई. ममता बनर्जी को श्रीराम का नाम क्यों नहीं पसंद है? जिन श्री राम को पूरी दुनिया आदर्श मानती है, जिनके नाम से हिन्दुस्तान की आन-बान और शान बढ़ जाती है. जिनके उद्घोष से मानव शरीर में ऊर्जा बढ़ जाती है, उम्मीद बढ़ जाती है, उस उद्घोष से ममता बनर्जी के तन-बदन में आग क्यों लग जाती है?
Jan 23,2021, 22:45 PM IST
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West Bengal ने हर बार देश के लिए मोर्चा लिया है. आज़ादी से पहले भी और आज़ादी के बाद भी लेकिन सियासत का रंग ये है की बंगाल में अगर चुनाव जीतना है तो किसी के भी कंधे का इस्तेमाल सियासी गोली चलाने के लिए किया जाता है. बंग की जंग में सियासी लड़ाई के चलते सीमा पर तैनात बोफोर्स के जवानों पर आरोप लगा दिया जाता है कि वो पैसे लेकर घुसपैठ कराते है. BSF के जवानों को सियासी मोहरा क्यों बनाया जा रहा है? ----- ममता दीदी की पार्टी जैसे दलदल बन गई है, हर कोई इससे निकलने की फिराक में है और अगर किसी का सहारा मिलता है या हिम्मत मिलती है तो वे बाहर निकल आते हैं. ममता के एक मंत्री ने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है, बागी सुर सुने जा रहे हैं और एक ने बागी रुख दिखाया तो उसे पार्टी से निकाल दिया.
Jan 23,2021, 0:00 AM IST
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वंदे मातरम: West Bengal में गद्दार कौन? | West Bengal Elections 2021 | Mamata Banerjee #VandeMataram #WestBengalElections #MamataBanerjee आज बंगाल में नारे लग रहे हैं, 'देश के गद्दारों को गोली मारो' इस नारे कि सियासी मतलब जो भी हों लेकिन ये माहौल खराब करते है. आखिर ये नारे आए कहां से, इसकी बुनियाद क्या है, क्या वाकई कोई गद्दार है. -------------------- सियासत में कुर्सी की जंग में मुसलमानों का मुस्तकबिल यही है की उन्हें हर बार इस्तेमाल किया जाता है. चंद रहनुमा खड़े होते हैं और मुसलमानों को ख्वाब दिखाते हैं, उनके नाम पर सियासी जंग लड़ते हैं, अपने महल खड़ा करते हैं और भूल जाते हैं कि उन मुसलमानों के लिए कुछ करना भी है. फुरफुरा शरीफ के पीरज़ादा अब मज़हबी तकरीरें भी सियासी ज़रूरतों के हिसाब से करेंगे क्योंकि उन्होंने नई पार्टी जो बना ली है
Jan 22,2021, 0:09 AM IST
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Jan 20,2021, 23:54 PM IST
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डराकर लोगों से वोट हासिल करना, डराकर लोगों को विकास से दूर रखना, डराकर लोगों पर हुकूमत करना और डराकर लोगों की लगाम अपने हाथ में रखना, West Bengal के 70 साल की सियासत की यही बुनियाद रही. एक समय West Bengal उद्योगों, सिनेमा, संस्कार और रोज़गार के लिए देश का सबसे बड़ा केंद्र था लेकिन पहले Congress ने, फिर वामदलों ने और उसके बाद Mamata Banerjee की TMC ने दहशत के वो बीज बोए जिससे बंगाल कंगाल हो चला. दहशत की वही सियासत Mamata Banerjee को उस हद पर लेकर आई है जहां वो BJP को मात देने के लिए 'माओवादी' कार्ड खेल रही हैं और अपने डर को छिपाकर लोगों में डर पैदाकर के वोट हासिल करने की जुगत में हैं. भगवा से ये वो भय है जो आनेवाले दिनों में ममता की हार तय कर सकता है. पीशी और भाइपो के लिए आज के समय में बंगाल में सबसे बड़ा फीयर फैक्टर है बीजेपी और शायद इसीलिए ऐसे बेतुके बयान सामने आ रहे है. एक तरफ BJP के बढ़ते क़द का भय है तो दूसरी तरफ Mamata Banerjee के नेता ऐसे बयान देते हैं जो TMC के मूल चरित्र को सामने पेश करती है, सवाल है कि दीदी के दल में आखिर कितने छिछोरे हैं. पहले माता सीता का अपमान अब देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के खिलाफ ममता के मानुष के बोल, क्या नारी सम्मान पर प्रहार ही TMC का संस्कार है.
Jan 19,2021, 23:36 PM IST
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साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने लोकसभा चुनाव लड़ा तो उस वक़्त बीजेपी का वो सपना साकार होने की ओर बढ़ा जो वो पिछले 68 सालों से देख रही थी. पश्चिम बंगाल में सियासी ज़मीन का तैयार होना. इससे पहले बीजेपी बंगाल की सियासी चर्चा में भी शामिल नहीं होती थी लेकिन 2014 के बाद जो हुआ उसने विरोधी दलों को डरा दिया. बीजेपी के बढ़ते क़द का ही ये प्रभाव है. शिवसेना को जिस पार्टी से कोई मतलब नहीं उस पर एक पूरा लेख लिख देती है और सियासत की लैला को कमल का भंवरा कहने लगते हैं. AIMIM को बीजेपी से लिंक करने की पुरज़ोर कोशिश होती है, क्योंकि मज़हब के दो ध्रुवों पर सियासत कर रही पार्टियां एक दूसरे के वोटों को तो प्रभाविक करती ही हैं, और इसमें जिनका नुकसान होता है वो चिढ़ते हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो दूर बैठे तमाशा देखते हैं और आग में घी डालते रहते हैं. बंगाल में जब वामपंथी विचारधारा को चोट पहुंची तो हिंदू दक्षिणपंथी विचारधारा ने एक बार जड़ें मज़बूत की और बंगाल अपनी मूल विचारधारा की डोर पकड़ने लगा. इससे मुस्लिम तुष्टिकरण की सियासत करनेवाली सत्तारूढ़ टीएमसी का दरख़्त हिलने लगा और यही वजह है कि आज कट्टरपंथी सोच को चुनौती देनेवाली नुसरत जहां जैसी सांसद नफ़रत की सियासत के लिए मजबूर हो गईं और बंगाल में हिंदू मुस्लिम करने लगीं. बंगाल की फिज़ा सिर्फ सियासी नफ़रतों से ही ज़हरीली नहीं हो रही बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश प्रायोजित कुछ संगठन भी इस आग को भड़काने की पूरी कोशिश में जुट चुके हैं और कोशिश है कि सियासी समर में बंगाल में रक्तपात को अंजाम दिया जाए.
Jan 17,2021, 6:09 AM IST
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