कश्मीर पर हर जगह से 'लतियाये' जाने के बाद भी चुप नहीं हो रहे हैं इमरान

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान अब इस्लामिक देशों के संगठन OIC के जरिए कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ साजिश रचने की कोशिशों में लगे हैं. कश्मीर को लेकर इमरान का स्यापा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है.

कश्मीर पर हर जगह से 'लतियाये' जाने के बाद भी चुप नहीं हो रहे हैं इमरान

नई दिल्ली: पाकिस्तान को एक तरफ अब पीओके पर उसका जबरन कब्जा छिन जाने का डर सता रहा है, जिसे लेकर वो सीमा पर पाक सैनिकों का जमावड़ा बढ़ा रहा है. दूसरी ओर जम्मू कश्मीर पर भारत को घेरने की मुहिम में अब भी जल रहा है. 

रस्सी जल गई लेकिन ऐंठन नहीं गई

अगस्त के बाद बीते 3-4 महीनों में इमरान ने पूरी दुनिया में हर कोशिश आजमा कर देख ली. लेकिन कहते हैं ना कि रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गई. उसी तर्ज पर अब इमरान, सऊदी अरब के साथ मिलकर कश्मीर पर भारत को घेरने की तैयारी में फिर से लगे हैं.

कश्मीर पर इमरान की OIC वाली साजिश

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक सऊदी अरब कश्मीर मुद्दे पर मुस्लिम देशों के सबसे बड़े संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के सदस्यों की बैठक बुलाने की योजना बना रहा है. पाक मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार इस मुतल्लिक OIC अपने सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक बुला सकता है.

दरअसल, गुरुवार को सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सउद ने पाक पीएम इमरान के साथ बैठक की. जिसमें पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, विदेश सचिव सोहेल महमूद, आईएसआई डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट फैज हमीद और दूसरे बड़े अधिकारी भी शामिल हुए. खबर है कि प्रिंस फैसल ने इस मुलाकात के दरम्यान इमरान को कश्मीर मुद्दे पर चर्चा करवाने का भरोसा दिया है.

बेपेंदी का लोटा हुआ पाक

इमरान की हालत बेपेंदी के लोटे की तरह है. कभी वो मलेशिया और तुर्की से हाथ मिलाते हैं और कभी मुस्लिमों की समस्याओं पर फोकस्ड मलेशिया के कुआलालंपुर समिट में भाग लेने से आखिरी वक्त में इनकार कर देते हैं.
सऊदी अरब ने ही पाकिस्तान को इस समिट में भाग लेने से रोका था और जिस इमरान ने इस समिट का खाका तैयार किया था, उन्होंने ही सऊदी के दबाव में इस समिट से किनारा कर लिया.

अब इसी का सिला देने, यानी सउदी की बात मानने का आभार जताने के लिए सऊदी के प्रिंस फैसल पाकिस्तान पहुंचे थे. जिस आभार के बदले अब इमरान, सउदी से अपना मतलब भुनाने की जुगाड़ करने लगे. और कश्मीर पर साथ देने की सौदेबाजी पर उतर आए. दरअसल, पाकिस्तान को गुलामों की तरह सउदी की बात इसलिए माननी पड़ी क्योंकि वो सऊदी की खैरात पर जिंदा है.

भारत के खिलाफ समर्थन जुटाना मुश्किल

दिलचस्प ये है कि सऊदी अरब और यूएई ने कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थन किया था जबकि मलेशिया और तुर्की मजबूती से पाकिस्तान के साथ खड़े नजर आए थे. पाकिस्तान ये भूल जाता है कि सऊदी की नजर में पाकिस्तान और हिन्दुस्तान का जगह बिल्कुल अलग-अलग है. जब कश्मीर मुद्दे पर सऊदी समेत कई मुस्लिम देशों से कूटनीतिक समर्थन नहीं मिला था, तो पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि हम कितना ही इस्लाम की बात कर लें. लेकिन, इन देशों के भारत से आर्थिक हित जुड़े हुए हैं इसलिए भारत के खिलाफ इनसे समर्थन जुटाना मुश्किल है.

दरअसल, भारत की मोदी सरकार ने अपना घर संभालते हुए जम्मू-कश्मीर पर जो फैसला किया. उसने पाकिस्तान के हुक्मरानों का और पाक आर्मी का भारत को चोट देने और कमज़ोर करने का बहुत बड़ा जरिया छीन लिया है, इसलिए इमरान की हालत चोट खाए सांप जैसी है. 

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जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान में अपना प्रभाव कम होने के डर से सऊदी ने अपने विदेश मंत्री को इस्लामाबाद के दौरे पर भेजा है. सऊदी के इस कूटनीतिक कोशिश को समझने की बजाए, इमरान इससे भी बच्चों जैसी हसरत पाल बैठे और इस मौके को भी कश्मीर के लिए भुनाने में लग गए. लेकिन उनका ये जुगाड़ कतई काम नहीं आने वाला है.

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