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Vijay Agarwal

सिविल सेवकों का जनसेवक बनने का बढ़ता रुझान

सिविल सेवकों का जनसेवक बनने का बढ़ता रुझान

चुनाव के मौसम में राजनेताओं द्वारा दल-बदल करने की सूचनाएं तो हमेशा से मिलती रहीं हैं, लेकिन इस बार के चुनाव की एक विशेषता यह रही कि बहुत से वरिष्ठ अधिकारी और वे भी विशेषकर ऑल इंडिया सर्विसेस के ऑफि

चार्टर सिटी नहीं, 'कस्बा सिटी'

चार्टर सिटी नहीं, 'कस्बा सिटी'

पिछले दिनों जैसे ही ‘मोहल्ला अस्सी’ फिल्म का आखिरी दृश्य आंखों के सामने आया, वैसे ही अर्थशास्त्र के नोबल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री पॉल होमर की अचानक ही याद आ गई.

हिमांशु जोशी: ऐसे भी किसी के मन को भला क्या छूना...

हिमांशु जोशी: ऐसे भी किसी के मन को भला क्या छूना...

यह सन् 1977 के दिनों की बात है, जब मैं हिन्दी साहित्य में एम.ए. कर रहा था. मुझे लगभग हर महीने अपनी दुकान की खरीदी के लिए कलकत्ता (कोलकाता) जाना पड़ता था.

सेलिब्रिटी! जरा इस पर भी सोचें

सेलिब्रिटी! जरा इस पर भी सोचें

‘सेलिब्रिटी’ (हिन्दी के ‘लोकप्रिय’ या ‘प्रसिद्ध’ शब्द इसकी तर्ज पर खरे नहीं उतरते) बनना जितना मुश्किल है, उससे अधिक मुश्किल तो बनने के बाद जिंदगी को जी पाना है.

फिल्म उद्योग की “ऑक्सीजन” फिल्में

फिल्म उद्योग की “ऑक्सीजन” फिल्में

पिछले दिनों रिलीज हुईं दो फिल्मों को लेकर हिन्दी फिल्म एवं फिल्मी दर्शकों के बारे में कुछ अच्छे निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं. इन फिल्मों में एक है, ‘बधाई हो’ तथा दूसरी है, ‘ठग्स ऑफ हिन्दुस्तान’.

'मंटो' के बहाने आज की कुछ बातें

'मंटो' के बहाने आज की कुछ बातें

पिछले लगभग दस सालों से हिन्दी फिल्मों के चरित्र में एक जबर्दस्त बदलाव देखने को मिल रहा है.

#Gandhi150: वर्तमान के आकाश पर जगमगाता भविष्य का सुनहरा तारा

#Gandhi150: वर्तमान के आकाश पर जगमगाता भविष्य का सुनहरा तारा

मैं अपनी बात की शुरुआत एक थोड़े से विवादास्पद और शायद कुछ-कुछ अतिश्योतिपूर्ण वक्तव्य से करना चाहूंगा.

आरक्षण पर एक आदर्शवादी इंतजार!

आरक्षण पर एक आदर्शवादी इंतजार!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अभी दिल्ली में तीन दिनों के एक अत्‍यंत महत्वपूर्ण विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया था.

खुलते हुए समाज की एक बानगी

खुलते हुए समाज की एक बानगी

'सैनिटरी नेपकिन पर जीएसटी जीरो', यह और कुछ इसी खबर वाले अन्य तरह के शीर्षकों को 22 जुलाई के अ

गोपालदास नीरज... मुरझा गया गीतों का कमल

गोपालदास नीरज... मुरझा गया गीतों का कमल

यह मेरा सौभाग्य रहा है कि गोपालदास नीरज को मुझे सालभर पहले ही सुनने का मौका तब मिला, जब वे भोपाल में एक कार्यक