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जानिए क्या है आंखों का कैंसर? स्मार्टफोन की मदद से कैसे होता है डिटेक्ट

अगर आखों की पुतली या उसके आस पास सफेद रंग का कुछ रिफ्लैक्शन दिखता है तो ये 'रैटिनोब्लासटोमा" के लक्षण हो सकते हैं.

जानिए क्या है आंखों का कैंसर? स्मार्टफोन की मदद से कैसे होता है डिटेक्ट
21 साल के शिवम 'रैटिनोब्लासटोमा' के शिकार रहे हैं सही समय पर पता लगने से शिवम की जान तो बच गई, लेकिन उसने अपनी एक आंख हमेशा के लिए खो दी. (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः आए दिन कैंसर पर हो रही रिसर्च में तरह तरह के कैंसर सामने आ रहे हैं, इसमें कई तो जानलेवा साबित होते हैं और कई ऐसे भी हैं जिनका सही समय पर इलाज कराने से मरीज की जान बचाई जा सकती है. इन्हीं में से एक है 'रैटिनोब्लासटोमा'. ये एक खास तरह का आंखों का कैंसर है जो 6 महीने से लेकर 6 साल तक के बच्चों में पाया जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक ये हर 15000 में एक बच्चे में पाया जाता है. ये एक रेयर तरह का कैंसर है जिसकी वजह से लोगों को इसके बारे में बहुत कम जानकारी होती है. लेकिन सही समय पर इलाज न होने पर ये ट्यूमर का रुप लेकर शरीर के बाकी हिस्सों में फैल जाता है और अन्य कैंसर की तरह ये भी खतरनाक साबित हो सकता है.

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राहत की बात ये है कि इसके लक्षण बाकी कैंसर के मुकाबले जल्दी सामने आ जाते हैं और इसका पता मामूली स्मार्टफोन के कैमरे से लगाया जा सकता है. इसके लिए डिम लाईट में कैमरे की फ्लैश लाईट ऑन करके बच्चे की आंखो का तस्वीर लेनी होती है, फोटो इतनी नज़दीक से लेनी होती है कि बच्चे की आंख की पुतली साफ नजर आनी चाहिए. आम तौर पर आंखो की पुतली काली होती है, लेकिन अगर आखों की पुतली या उसके आस पास सफेद रंग का कुछ रिफ्लैक्शन दिखता है तो ये 'रैटिनोब्लासटोमा" के लक्षण हो सकते हैं. ऐसे में बच्चे को खास तौर पर आंखों के डॉक्टर के पास ले जाना जरुरी है. 

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इस जानलेवा बीमारी के बारे में लोगों के बीच जागरुकता फैलाने का जिम्मा जानकी देवी कॉलेज के छात्रों ने लिया है. इन छात्रों ने हेल्थ सेंटर्स के साथ मिलकर घर घर जाकर, पोस्टरों और डेमो के जरिए लोगों के बीच 'रैटिनोब्लासटोमा' की जागरुकता का अभियान चलाया है. जानकी देवी कॉलेज में एचडीएफई डिपार्टमेंट की प्रोफेसर, निर्मला मुरलीधर की मानें तो ''रैटिनोब्लासटोमा" के बारे में जागरुकता फैलाना इसलिए भी जरुरी था क्योंकि न सिर्फ आम लोग बल्की कई डॉक्टर भी इस बिमारी के बारे में नहीं जानते.

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21 साल के शिवम 'रैटिनोब्लासटोमा' के शिकार रहे हैं सही समय पर पता लगने से शिवम की जान तो बच गई, लेकिन उसने अपनी एक आंख हमेशा के लिए खो दी. शिवम बताते हैं कि 1 साल की उमर में उनके माता पिता ने देखा कि वो बहुत ज्यादा सोते हैं और उठने पर ज्यादातर रोते रहते हैं. साथ ही उनकी एक आंख लाइट पड़ने पर सफेद चमकती थी. आस पास के डॉक्टरों ने कुछ दवाई तो दी, लेकिन किसी ने इस कैंसर के बारे में उनको नहीं बताया.' रैटिनोब्लासटोमा के बारे में उन्हे तब पता चला जब तकलीफ बढ़ने पर ऐम्स में दिखाया गया.