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राजनाथ सिंह ने रक्षा खरीद प्रक्रिया की समीक्षा के लिए बनाई समिति, 'मेक इन इंडिया' होगा और मजबूत

यह समिति प्रक्रियाओं को संशोधित करेगी और निर्धारित लक्ष्य के साथ प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करेगी. इस समिति को अपनी सिफारिशें पेश करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है.

राजनाथ सिंह ने रक्षा खरीद प्रक्रिया की समीक्षा के लिए बनाई समिति, 'मेक इन इंडिया' होगा और मजबूत
देश के मौजूदा रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: देश के मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'मेक इन इंडिया' को और मजबूत करने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया की समीक्षा के लिए एक समिति को मंजूरी दी है. जानकारी के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) 2016 और रक्षा अधिप्राप्ति नियमावली (DPM) 2009 की समीक्षा के लिए महानिदेशक (अधिग्रहण) की अध्यक्षता में एक समिति के गठन को मंजूरी दी है. यह समिति प्रक्रियाओं को संशोधित करेगी और निर्धारित लक्ष्य के साथ प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करेगी. इस समिति को अपनी सिफारिशें पेश करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है.

'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूत करेगी यह समिति
बताया जा रहा है कि DPP 2016 और DPM 2009 ही इस तरह के संशोधन के कारण रहे हैं. प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने से सामान के अधिग्रहण से लेकर लाइफ साइकल सपोर्ट तक निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित होगा और सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल मजबूत होगी. महानिदेशक (अधिग्रहण) के अलावा 11 अन्य सदस्य भी इस इस उच्च-स्तरीय समिति का हिस्सा होंगे. जानकारी के मुताबिक समिति के अन्य सदस्य संयुक्त सचिव/मेजर जनरल समकक्ष के पद से नीचे के नहीं होंगे.

समिति के संदर्भ में ये बिंदु शामिल हैं
- DPP 2016 और DPM 2009 में दी गई प्रक्रियाओं को संशोधित करना, ताकि प्रक्रियात्मक अड़चनों और जल्दबाजी में रक्षा अधिग्रहण को हटाया जा सके.
- उपकरणों के लिए लाइफ साइकल सपोर्ट को अनुकूलित करने के लिए DPP 2016 और DPM 2009 में प्रावधानों को पंक्तिबद्ध और मानकीकृत करना.
- भारतीय उद्योग की अधिक भागीदारी की सुविधा और मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार विकसित करने के लिए नीति और प्रक्रियाओं को सरल बनाना.
- जहां भी लागू हो, नई अवधारणाओं को शामिल करना, जैसे कि लाइफ साइकल लागत, लाइफ साइकल सपोर्ट, परफॉर्मेंस आधारित लॉजिस्टिक्स, आईसीटी, लीज कॉन्ट्रैक्टिंग, कोडिफिकेशन और मानकीकरण.
- भारतीय स्टार्ट-अप को बढ़ावा देना और अनुसंधान एवं विकास के प्रावधान शामिल करना
- कोई अन्य पहलू जो अधिग्रहण प्रक्रिया को परिष्कृत करने में सहायक हो और 'मेक इन इंडिया' पहल का समर्थन करने में योगदान दे
- समिति को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है