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अंतिम अपडेट: बुधवार दिसम्बर 18, 2019 - 01:43 PM IST

नई दिल्ली: उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद-सीलमपुर इलाके में मंगलवार को हुई हिंसा के बाद आज वहां माहौल पूरी तरह से शांत है. सीलमपुर में हिंसा फैलाने के आरोप में पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया है. जबकि कुछ लोगों की तलाश अभी भी जारी है. इस पूरे मामले में अब तक तीन एफआईआर भी दर्ज हुए हैं. जफराबाद में फिलहाल दिल्ली पुलिस की दो कंपनियां एहतियात के तौर पर तैनात हैं. जरूत पड़ने पर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी. फोर्स को रिजर्व में रखा गया है. उधर सीलमपुर में पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला है. इन इलाकों में फिलहाल शांतिपूर्ण महौल है. 

इसके अलावा निर्भया केस (Nirbhaya Gang Rape Case) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी अक्षय (Akshay) की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है. तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं. अब दोपहर दो बजे पटियाला हाउस कोर्ट में दोषियों को जल्‍द फांसी देने की याचिका पर सुनवाई होगी. पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका निर्भया के माता-पिता ने दायर की है.

नागरिकता संशोधन एक्ट को लेकर दिल्ली में कई इलाकों में होने वाले हिंसक प्रदर्शन पर सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने विपक्ष पर निशाना साधा है. केजरीवाल ने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए विपक्षी दल के लोग दिल्ली का माहौल खराब करने में लगे हैं. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि दिल्ली में पिछले विधानसभा चुनावों में भी त्रिलोक पुरी और बवाना में ऐसी हिंसा करवाई गई थी.

18 दिसम्बर 2019, 13:46 बजे

रेपिस्‍ट पैदा नहीं होते, समाज द्वारा बनाए जाते हैं- दोषी अक्षय के वकील की बेतुकी दलील

जस्टिस भानुमति- आप ठोस व कानूनी तथ्य रखें और बताए कि हमारे फैसले में क्या कमी थी और क्यों हमें पुनर्विचार करना चाहिए?

अक्षय ठाकुर के वकील एपी सिंह- इस केस में फांसी के बाद एक मां को तो शांति मिलेगी लेकिन चार अन्‍य माएं अपने बेटों को खो देंगी. ये बदला है. वास्‍तविक गुनहगार तो समाज और शिक्षा की कमी है. बलात्‍कारी पैदा नहीं होते, समाज द्वारा बनाए जाते हैं.

18 दिसम्बर 2019, 13:43 बजे

निर्भया के हत्‍यारे अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

निर्भया केस (Nirbhaya Gang Rape Case) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी अक्षय (Akshay) की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है. तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं.

18 दिसम्बर 2019, 12:01 बजे

दोषी अक्षय के वकील की दलील- दिल्‍ली में वायु प्रदूषण-पानी की गुणवत्‍ता बेहद खराब, ऐसे में फांसी की सजा क्‍यों?

निर्भया गैंगरेप केस में दोषी अक्षय सिंह की पुनर्विचार याचिका पर जस्टिस आर भानुमति की अगुआई वाली वाली 3 सदस्यीय बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान वकील एपी सिंह ने दलीलें रखीं. वकील ने वेद पुराण, त्रेता युग और कलयुग से लेकर दिल्‍ली में वायु प्रदूषण तक का जिक्र अपनी दलीलों में किया. वकील ने कहा कि दिल्‍ली में वायु प्रदूषण और पानी की गुणवत्‍ता बेहद खराब है, ऐसे में फांसी की सजा क्‍यों? कोर्ट मामले में दोपहर एक बजे अपना फैसला सुनाएगा.

18 दिसम्बर 2019, 11:59 बजे

नागरिकता संशोधन कानून पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, केंद्र सरकार को नोटिस जारी

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship amended act) पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट में आज नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship amended act) के खिलाफ दायर 59 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून पर केंद्र सरकार से जनवरी के दूसरे सप्ताह तक जवाब देने को कहा है. इस केस की अगली सुनवाई अब 22 जनवरी को होगी.

18 दिसम्बर 2019, 11:56 बजे

निर्भया के दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई खत्‍म, दोपहर 1 बजे आएगा फैसला

निर्भया केस (Nirbhaya Gang Rape Case) में दोषी अक्षय (Akshay) की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जस्टिस आर भानुमति की अगुआई वाली वाली 3 सदस्यीय बेंच सुनवाई खत्‍म हो गई. आज दोपहर एक बजे फैसला सुनाया जाएगा. 

18 दिसम्बर 2019, 10:17 बजे

जाफराबाद-सीलमपुर इलाके में शांति का माहौल, पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च

नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Act) को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद-सीलमपुर और ब्रजपुरी इलाकों में मंगलवार को फैली हिंसा मामले में अब तक तीन FIR दर्ज हो चुकी हैं. एक जाफराबाद, एक सीलमपुर और एक ब्रजपुरी में. जफराबाद में फिलहाल दिल्ली पुलिस की दो कंपनियां एहतियात के तौर पर तैनात हैं. जरूत पड़ने पर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी. फोर्स को रिजर्व में रखा गया है. उधर सीलमपुर में पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला है.

18 दिसम्बर 2019, 10:15 बजे

नागरिकता संशोधन कानून का भारत के मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है: इमाम बुखारी

नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर दिल्ली समेत देश के कई शहरों में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों पर जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने बड़ी बात कही है. इमाम बुखारी ने कहा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक का इस देश में रह रहे मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है. इमाम बुखारी ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को भी सलाह दी है प्रदर्शन नियंत्रण में होना चाहिए.

18 दिसम्बर 2019, 10:14 बजे

दिल्ली: प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए कई रास्ते बंद, कई सड़कों पर लगा लंबा जाम

नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Act) को लेकर दिल्ली के जामिया नगर, जाफराबाद, सीलमपुर और दरिया गंज में हुए हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस (Delhi Traffic Police) ने आज भी कई रास्तों को बंद कर दिया है. जिसके चलते बुधवार दिल्ली और नोएडा के बीच की कई सड़कों पर लंबा जाम देखने को मिल रहा है. 

18 दिसम्बर 2019, 09:17 बजे

जामिया हिंसा मामले में 2 थानों में दर्ज FIR में 10 लोगों को बनाया गया आरोपी

नागरिकता संशोधन एक्ट (Citizenship Amendment Act) के विरोध में रविवार (15 दिसंबर) को हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की है. एक एफआईआर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी (NFC) थाने में दर्ज की गई है जबकि दूसरी एफआईआर जामिया (Jamia) थाने में दर्ज हुई है. इन दोनों में दर्ज की गई अलग अलग एफआईआर में कुल 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. जामिया वाली एफआईआर में 6 लोगों के नाम है जबकि एनएफसी वाली एफआईआर में 6 लोगों को आरोपी बनाया गया है. 

18 दिसम्बर 2019, 09:15 बजे

यूपी में धारा 144 लागू, पुलिस की अपील- सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के आसपास और जाफराबद-सीलमपुर में हुए हिंसक प्रदर्शनों की आग उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है. यहां अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, लखनऊ के नदवा कॉलेज से एक के बाद एक हिंसक प्रदर्शनों की खबरें आईं. इसके बाद से एहतियात के तौर पर पूरे प्रदेश में धारा 144 लागू कर दी गई है. प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से शांति और सैहार्द बनाए रखने की अपील की है. 

18 दिसम्बर 2019, 09:14 बजे

Analysis: लोकतंत्र में कोई भी चीज़ छीन कर नहीं ली जा सकती...आज़ादी भी नहीं

पिछले तीन दिनों से नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के विरोध में हो रही हिंसा की तस्वीरें इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे देश में कुछ लोग संविधान की रक्षा के नाम पर संविधान की ही धज्जियां उड़ा रहे हैं. लेकिन इन सारे प्रमाणों के बावजूद हमारे देश के कुछ लोग हैं जो इन तस्वीरों को सच मानने के लिए तैयार ही नहीं है. ऐसे ही लोगों की पैरवी करने वालों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है.