आखिर पाकिस्‍तान क्‍यों दे रहा है अपने राष्‍ट्रीय पशु के शिकार की विदेशियों को इजाजत?

पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रीय पशु मारखोर के अचानक सुर्खियों में आने की वजह यह है कि एक अमेरिकी शख्‍स ने मारखोर के शिकार के लिए पाकिस्‍तान को रिकॉर्ड कीमत अदा की है. कीमत भी 1,10,000 डॉलर. यानि भारतीय मुद्रा के हिसाब से 78,77,650 रुपये. 

आखिर पाकिस्‍तान क्‍यों दे रहा है अपने राष्‍ट्रीय पशु के शिकार की विदेशियों को इजाजत?
फोटो साभारः सोशल मीडिया

नई दिल्‍ली: पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रीय पशु मारखोर जोकि जंगली प्रजाति का बकरा है, फिलहाल दुनियाभर में चर्चा में हैं. इसके अचानक सुर्खियों में आने की वजह यह है कि एक अमेरिकी शख्‍स ने मारखोर के शिकार के लिए पाकिस्‍तान को रिकॉर्ड कीमत अदा की है. कीमत भी 1,10,000 डॉलर. यानि भारतीय मुद्रा के हिसाब से 78,77,650 रुपये. अब सवाल यह है कि आखिर पाकिस्‍तान लंबे बालों और बड़े व घुमावदार सींगों वाले अपने राष्‍ट्रीय पशु के शिकार की इजाजत क्‍यों दे रहा है.

तो आइये जानते हैं इस बारे में कुछ अहम जानकारियां...

पाकिस्तान में सुरक्षित प्रजाति है मारखोर
दरअसल, पाकिस्तान में मारखोर को सुरक्षित प्रजाति के अंतर्गत रखा गया है. लिहाजा इसके शिकार की अनुमति नहीं है. पाकिस्‍तानी सरकार इसके शिकार की अनुमति ट्रॉफी हंटिग कार्यक्रमों में ही देती है. ट्रॉफी हंटिग कार्यक्रम 2018-19 में अब तक पाक और विदेश के शिकारियों ने 50 जंगली जानवरों का शिकार किया है. पिछले महीने ही इस शिकार प्रोग्राम में दो अमेरिकियों ने सर्वोच्च प्रजाति के एस्टोर मारखोर के शिकार के लिए 1,10,000 और 1,00,000 डॉलर की कीमत बतौर परमिट शुल्क अदा की.

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शिकार से मिली रकम स्‍थानीय लोगों को बांट दी जाती है
परमिट शुल्क से पाकिस्‍तान सरकार को जो भी पैसा मिलता है, स्थानीय प्रशासन उसका 80 फीसदी हिस्‍सा स्थानीय प्रजातियों को दे देता है, जबकि बाकी की राशि को प्रशासन द्वारा जानवरों के रखरखाव के लिए खर्च किया जाता है. स्थानीय लोगों को भी यह रकम जानवरों की रक्षा के लिए दी जाती है. साथ ही उन्हें जानवरों का शिकार न करने के लिए भी कहा जाता है. पाकिस्तान के अधिकारियों का यह भी तर्क है कि ट्रॉफी हंटिग कार्यक्रमों के कारण उनके यहां मारखोर के शिकार में कमी आई है और उनकी संख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ी है.

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यह है मारखोर नाम के पीछे की वजह
मारखोर पाकिस्तान, अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के अलावा भारत में कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है. ‘मारखोर’ का फारसी में अर्थ होता है– “सांप को मारकर खाने वाला पहाड़ी जानवर’. हालांकि यह बकरी प्रजाति से ताल्‍लुक रखता है. जीव विज्ञानियों का कहना है कि हालांकि इसे सांप को मारकर खाते हुए नहीं देखा गया है. उनका मत है कि इसका ‘मारखोर’ नाम इसके घुमावदार बड़े-बड़े सींगों के कारण पड़ा हो सकता है, क्योंकि दिखने में वे ‘मार’ अर्थात ‘सांप’ की तरह ही दिखते हैं.