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तिरुपति बालाजी मंदिर में भक्तों का तांता, बुधवार को हजारों भक्तों ने किए दर्शन

जानकारी के मुताबिक बुधवार को 78,667 श्रद्धालुओं ने भगवान तिरुपति बालाजी के दर्शन किए. अन्य श्रद्धालुओं की बात करें तो अभी भी हजारों भक्त दर्शन के लिए कतार में खड़े हैं. 

तिरुपति बालाजी मंदिर में भक्तों का तांता, बुधवार को हजारों भक्तों ने किए दर्शन
सभी श्रद्धालु 25 कम्पार्टमेंट 'क्यू कॉम्प्लेक्स' में दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.

नई दिल्ली: तिरुमला पर्वत पर स्थित भगवान तिरुपति बालाजी मंदिर की महत्ता के बारे में कौन नहीं जानता. हर साल करोड़ों की संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस साल भी यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं का तातां लगा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि यह स्थान भारत के सबसे अधिक तीर्थयात्रियों के आकर्षण का केंद्र है. तिरुपति बाला जी मंदिर दुनिया के सबसे धनवान और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है.

जानकारी के मुताबिक बुधवार को 78,667 श्रद्धालुओं ने भगवान तिरुपति बालाजी के दर्शन किए. अन्य श्रद्धालुओं की बात करें तो अभी भी हजारों भक्त दर्शन के लिए कतार में खड़े हैं. सभी श्रद्धालु 25 कम्पार्टमेंट 'क्यू कॉम्प्लेक्स' में दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. मंदिर में गुरुवार को सर्वदर्शन का औसत समय 16 घंटे है. बता दें कि प्रभु वेंकटेश्वर या बालाजी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि प्रभु विष्णु ने कुछ समय के लिए स्वामी पुष्करणी नामक तालाब के किनारे निवास किया था.

बता दें, बुधवार को तिरुपति बालाजी मंदिर में चढ़ावे के रूप में 4 करोड़ 35 लाख रुपये का चढ़ावा आया. दरअसल, सार्वजनिक अवकाश के कारण मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है. मंदिर में रोज भक्तों की भीड़ बढ़ने की वजह से वीआईपी व्यक्ति का किसी अन्य के लिए अनुमोदन स्वीकार नहीं किया जा रहा है. दर्शन के लिए वीआईपी व्यक्ति को ही अनुमति दी जा रही है.

गौरलतब है कि इस प्राचीन मंदिर में गरीबों के साथ साथ बड़े-बड़े कारोबारी, फिल्मी सितारे और राजनेता दर्शन के लिए पहुंचते हैं. हर साल लाखों लोग तिरुमला की पहाड़ियों पर बालाजी के दर्शन करने आते हैं. तिरुपति के इतने प्रचलित होने के पीछे कई कथाएं और मान्यताएं हैं. इस मंदिर से कई सारी मान्यताएं जुड़ी हैं.

माना जाता है कि तिरुपति बालाजी इस मंदिर में अपनी पत्नी पद्मावती के साथ रहते हैं. तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है. कहा जाता है कि इसी छड़ी से बालाजी की बाल रूप में पिटाई हुई थी, जिसके चलते उनकी ठोड़ी पर चोट आई थी. यह भी माना जाता है कि बालरूप में एक बार बालाजी की ठोड़ी से रक्त आया था. इसके बाद से ही बालाजी की प्रतिमा की ठोड़ी पर चंदन लगाने का चलन शुरू हुआ था.