Chinmay Mishra

गांधी पुण्यतिथि: गांधी को समझने का काल

गांधी पुण्यतिथि: गांधी को समझने का काल

चाहता हूं मेरे देश का लगभग बे पढ़ा-लिखा आदमी मिटाये इस परिस्थिति को बढ़कर और होगा वह गांधी को समझने से उसके रहने और करने के ढंग को  अपनाने से 

अगर गांधी को ढंग से समझते तो घाना में उनकी प्रतिमा न हटाते

अगर गांधी को ढंग से समझते तो घाना में उनकी प्रतिमा न हटाते

भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने अपनी घाना यात्रा के दौरान 14 जून, 2016 को घाना विश्वविद्यालय के लीगोन परिसर में महात्मा गांधी की एक प्रतिमा का अनावरण किया था.

गांधी@150: गांधी जी का राम मंदिर उनके मन में ही था

गांधी@150: गांधी जी का राम मंदिर उनके मन में ही था

हिंद स्वराज में गांधी प्रश्न पूछते हैं, ‘‘पर मैं तो, अब जो सवाल उठाया है, उसका जवाब सुनने को अधीर हो रहा हूं.

गांधी@150: बड़े कमाल की थी पत्रकार गांधी की शख्सियत

गांधी@150: बड़े कमाल की थी पत्रकार गांधी की शख्सियत

“भाषण स्वातंत्र्य, सभा सम्मलेन की स्वतंत्रता और मुद्रण स्वातंत्र्य इन तीनों अधिकारों की पुनः स्थापना लगभग पूर्ण स्वराज्य के सामान है.”

गांधी के विरोध की एक ही वजह है कि वे सबके हैं किसी एक के नहीं

गांधी के विरोध की एक ही वजह है कि वे सबके हैं किसी एक के नहीं

‘‘इस बात से बड़ी और कोई उपलब्धि नहीं है कि लोग हमारी अच्छाई तक को हिकारत की नजर से देखें और हम तब भी विचतिल न हों. -मरकस ओरेलियस

उपवासों की नाकामी के दौर में गांधी के उपवास दर्शन को समझना जरूरी है

उपवासों की नाकामी के दौर में गांधी के उपवास दर्शन को समझना जरूरी है

प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी सानंद) की अविरल गंगा की मांग को लेकर चल रहे अनशन के 111वें दिन मृत्यु हो गई.

#Gandhi150: गांधी जी को संसदीय लोकतंत्र तो चाहिए था, लेकिन सत्य और अहिंसा की कीमत पर नहीं

#Gandhi150: गांधी जी को संसदीय लोकतंत्र तो चाहिए था, लेकिन सत्य और अहिंसा की कीमत पर नहीं

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही देश भर में अगले वर्ष मई में होने वाले आम चुनावों की तैयारी और रणनीति बनने-बिगड़ने का दौर प्रारंभ हो गया है.

#Gandhi150: बीसवीं सदी के दो ही अविष्कार हैं महात्मा गाँधी और परमाणु बम

#Gandhi150: बीसवीं सदी के दो ही अविष्कार हैं महात्मा गाँधी और परमाणु बम

व्यक्ति कितना व्यापक हो सकता है, कितना सर्वज्ञ हो सकता है और इस सबके रहते कितना अकेला भी हो सकता है, इसका सर्वश्रेष्ठ या कहें तो एकमात्र उदाहरण

धारा 377 के खत्म होने से हर अल्पसंख्यक तबके को मिली मौलिक अधिकारों की गारंटी

धारा 377 के खत्म होने से हर अल्पसंख्यक तबके को मिली मौलिक अधिकारों की गारंटी

‘‘दासता का सबसे बुरा रूप ग्लानि की दासता है, क्योंकि तब लोग अपने में विश्वास खोकर निराशा की जंजीरों में जकड़ जाते हैं.’’ 

पाताल में समाती नैतिकता

पाताल में समाती नैतिकता

सोचा था, अब कुछ समय तक भारत के बुनकरों, छपाइगरों और तमाम शिल्पकारों की स्थितियों, उनकी आर्थिक बर्बादी को लेकर लिखूंगा! किसानों की बदहाली पर बातचीत करेंगे!