जब सामाजिक कार्यकर्ता पोट्टी श्रीरामलू का हुआ निधन और भाषाई आधार पर बंट गया पूरा देश...

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) के नतीजे एक बार फिर जातीय और भाषाई समीकरण पर निर्भर हो सकते हैं. भारतीय राजनीति में जातीय और भाषाई समीकरण शुरू से ही हावी रहे है. 1951 में राज्‍यों के पुनर्गठन के दौरान भी भाषाई समीकरण बेहद हावी रहा है.

जब सामाजिक कार्यकर्ता पोट्टी श्रीरामलू का हुआ निधन और भाषाई आधार पर बंट गया पूरा देश...

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