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Dayashankar Mishra

Digital Editor . डिप्रेशन और आत्‍महत्‍या के विरुद्ध भारत में अपनी तरह की पहली #Digital सीरीज #Dearजिंदगी के लेखक

डियर जिंदगी: सबको बदलने की जिद!

डियर जिंदगी: सबको बदलने की जिद!

दूसरों को अक्‍सर हम अपने जैसा देखना चाहते हैं . वैसा देखना चाहते हैं , जैसा हमें प्रिय है. अगर वह हमारी सोच के पैमाने जैसे हैं, तो ठीक, नहीं तो हम चाहते हैं कि वह हमारी सोच जैसे हो जाएं.

डियर जिंदगी: ओ! सुख कल आना…

डियर जिंदगी: ओ! सुख कल आना…

जब हम छोटे होते हैं, तो प्रसन्‍नता स्‍वभाव का स्‍थाई भाव होती है. सुख स्‍वत: मिजाज में शामिल होता है. यह सोचकर खुश नहीं होते कि यह ‘खुश’ होने की चीज है कि नहीं.

डियर जिंदगी: कड़वे पल को संभालना!

डियर जिंदगी: कड़वे पल को संभालना!

कौन है, जिसे जीवन में कभी कड़वे घूंट नहीं पीने पड़े. कभी, जिंदगी की कड़वी सच्‍चाई से दो-चार नहीं होना पड़ा. कभी ऐसा नहीं लगा कि काश! यह नहीं सुनना पड़ता. काश!

डियर जिंदगी: यकीन रखें, यह भी गुजर जाएगा…

डियर जिंदगी: यकीन रखें, यह भी गुजर जाएगा…

‘डियर जिंदगी’ आरंभ हुए कुछ महीने ही बीते थे. फेसबुक मैसेंजर पर उनका संदेश मिला, ‘मैं इस जिंदगी से तंग आ चुकी हूं. नई शुरुआत करना चाहती हूं, लेकिन हिम्‍मत नहीं जुटा पाती.

डियर जिंदगी: मित्रता की नई ‘महफिल’!

डियर जिंदगी: मित्रता की नई ‘महफिल’!

राजस्‍थान के झुंझुनूं से रंजीत तिवाड़ी लिखते हैं, ‘सरकारी नौकरी करने वाले बेटे के फेसबुक पर पांच हजार से अधिक दोस्‍त हैं. असल जिंदगी में मुश्किल से पांच.

डियर जिंदगी: आदतों की गुलामी!

डियर जिंदगी: आदतों की गुलामी!

कुछ लोग जिनमें क्षमता है, अपनी बात कहने की. वह क्‍या कहते हैं! क्‍या वह कोई नई बात कहते दिखते हैं. कुछ ऐसा जो हमारी सड़ी-गली सोच-विचार की शैली को बदलने में मदद कर सके.

डियर जिंदगी: यह दीवार कैसे टूटेगी!

डियर जिंदगी: यह दीवार कैसे टूटेगी!

अगर आप गांव में रहे हैं तो दीवार उठने, बनने और गिरने को थोड़ा आसानी से समझ सकते हैं. भाइयों में मतभेद होने पर अक्‍सर आंगन के बीच दीवार खड़ी कर दी जाती थी.

डियर जिंदगी: गंभीरता और स्‍नेह!

डियर जिंदगी: गंभीरता और स्‍नेह!

खुश रहने की वजह क्‍या है! हम किसके कारण खुश रहते हैं. उम्र बढ़ने के साथ ही खुश रहने की आदत कम होती जाती है. हम सहज प्रसन्‍नता के भाव की जगह उसके अर्थ खोजने लगते हैं.

डियर जिंदगी: दर्द के सहयात्री!

डियर जिंदगी: दर्द के सहयात्री!

दर्द, पीड़ा, दुख जिंदगी के अभिन्‍न अंग हैं. इनसे छुटकारा पाने का ख्‍याल दुख का कारण है. दुख, दुख का मूल कारण नहीं है. वह तो ख्याल के साथ तोहफे में आया हुआ उपहार है.

डियर जिंदगी: अनुभव की खाई में गिरे हौसले!

डियर जिंदगी: अनुभव की खाई में गिरे हौसले!

हम किससे अधिक प्रेम करते हैं. जो हमसे छूट गए. हमको छोड़ गए. जिनका साथ चाहकर भी नहीं मिला. जिनको चाहते हुए भी हम उनके साथ न जा सके! इन सबके बाद भी आत्‍मा के तार वहीं उलझे हुए हैं.