Dayashankar Mishra

Digital Editor . डिप्रेशन और आत्‍महत्‍या के विरुद्ध भारत में अपनी तरह की पहली #Digital सीरीज #Dearजिंदगी के लेखक

डियर जिंदगी: गंभीरता और स्‍नेह!

डियर जिंदगी: गंभीरता और स्‍नेह!

खुश रहने की वजह क्‍या है! हम किसके कारण खुश रहते हैं. उम्र बढ़ने के साथ ही खुश रहने की आदत कम होती जाती है. हम सहज प्रसन्‍नता के भाव की जगह उसके अर्थ खोजने लगते हैं.

डियर जिंदगी: दर्द के सहयात्री!

डियर जिंदगी: दर्द के सहयात्री!

दर्द, पीड़ा, दुख जिंदगी के अभिन्‍न अंग हैं. इनसे छुटकारा पाने का ख्‍याल दुख का कारण है. दुख, दुख का मूल कारण नहीं है. वह तो ख्याल के साथ तोहफे में आया हुआ उपहार है.

डियर जिंदगी: अनुभव की खाई में गिरे हौसले!

डियर जिंदगी: अनुभव की खाई में गिरे हौसले!

हम किससे अधिक प्रेम करते हैं. जो हमसे छूट गए. हमको छोड़ गए. जिनका साथ चाहकर भी नहीं मिला. जिनको चाहते हुए भी हम उनके साथ न जा सके! इन सबके बाद भी आत्‍मा के तार वहीं उलझे हुए हैं.

डियर जिंदगी: बच्‍चे को 'न' कहना!

डियर जिंदगी: बच्‍चे को 'न' कहना!

बच्‍चों को यथासंभव सुख-सुविधा देने के बीच यह भी जरूरी है कि उनको संघर्ष की धूप मिलती रहे. ठीक, वैसे ही जैसे शरीर को प्रकृति की सहज धूप की जरूरत होती है.

डियर जिंदगी: प्रेम दृष्टिकोण है…

डियर जिंदगी: प्रेम दृष्टिकोण है…

प्रेम को हमने एकदम व्‍यक्तिगत बना दिया. निजी. इसका असर यह हुआ कि यह केवल व्‍यक्तियों के बीच फंसकर रह गया. यह सामाजिक नहीं हो पाया. यह समाज में वैसा रूप नहीं ले पाया, जिसकी मनुष्‍य को जरूरत है.

डियर जिंदगी: बच्‍चों के बिना घर!

डियर जिंदगी: बच्‍चों के बिना घर!

भारत में बच्‍चों को लेकर अभिभावक कुछ ज्‍यादा ही फ‍िक्रमंद हैं. बच्‍चा पास रहता है, अभिभावक उसे अपनी ओर से यथासंभव मदद की कोशिश करते हैं. बच्‍चों के पास वह लगभग परछाईं की तरह ही रहते हैं.

डियर जिंदगी: रास्‍ता बुनना!

डियर जिंदगी: रास्‍ता बुनना!

मेरे लिए यह अलग तरह का अनुभव था. उन्‍होंने कभी इसके बारे में पढ़ा, सुना नहीं था. हमारे संवाद के बीच वह तुरंत गूगल कर पाने की स्थिति में भी नहीं थे.

डियर जिंदगी: ‘ कड़वे ’ की याद!

डियर जिंदगी: ‘ कड़वे ’ की याद!

सिंगरौली में युवाओं के साथ ‘डियर जिंदगी’ के जीवन संवाद में उत्‍साह, उमंग के बीच इस सवाल ने सबका ध्‍यान अपनी ओर खींचा...‘मैं बहुत अच्‍छा हूं, लेकिन मेरे साथ हमेशा कुछ ऐसा होता है, जिससे मुझे दुख ही

डियर जिंदगी: अरे! कितने बदल गए...

डियर जिंदगी: अरे! कितने बदल गए...

एक चीज़, जो सबसे अधिक स्‍थाई है, हम उसे परिवर्तन के नाम से जानते हैं. इसके बाद भी कोई हमसे कह दे कि आप बदल गए हैं. तो हम खंडन करने में जुट जाते हैं. नहीं, ऐसा कुछ नहीं. कुछ भी नहीं बदला.

डियर जिंदगी: सबकुछ ठीक होना!

डियर जिंदगी: सबकुछ ठीक होना!

लगभग दो दशक पुराने मित्र हैं. आईटी इंजीनियर. जब हमारे पास मिनी बस में बैठने के पैसे मुश्किल से होते, तो वह मोटरसाइकिल में घूमते. जब हम  मोटरसाइकिल के पैसे जुटा सके, तो वह कार में दिखते.